रोबोट छीनते मानव रोजगार

 देवेंद्रराज सुथार

रोबोट के बढ़ते निर्माण और प्रयोग के कारण मानव के रोजगार पर संकट गहराने लग गया है। वस्तुतः आज रोबोट्स न सिर्फ ऑफिस के अंदर बल्कि ऑफिस के बाहर भी लोगों की नौकरियां छीनने में लगे हैं। यह चिंता जताई जा रही है कि साल 2020 तक कई रोजगार ऐसे होंगे जो ऑटोमेशन के शिकार हो जाएंगे, तो कुछ ऐसे भी होंगे जिनका अस्तित्व तो होगा लेकिन इनका स्वरूप मानव के लिए एकदम नया होगा।
प्यू की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकियों को डर हैं कि रोबोट उनकी नौकरी पर सेंध लगा रहे हैं। यही कारण है कि अधिकतर अमेरिकी स्वचालित कार और रोबोट के इस्तेमाल को लेकर झिझक रहे हैं। इसी रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में जिस तरह से ड्राइवरलेस कार का चलन बढ़ रहा है, उससे लगता है कि बहुत जल्द अमेरिका की सड़कों पर केवल ड्राइवरलेस कार का ही कब्जा होगा। अगर ये बदलाव आया तो ट्रैक्सी ड्राइवर और दूसरों की कार चलाने वालों की नौकरी पर खतरा आना तय हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के 56 फीसदी लोग यह मानते हैं कि दस से पचास साल के अंदर पूरे अमेरिका में ड्राइवरलेस कार ही चलेगी, जबकि नौ फीसदी अमेरिकी मानते हैं कि दस साल के अंदर ही सड़क पर केवल ड्राइवरलेस कार दिखाई देगी। गौरतलब है कि रोबोट के कारण अमेरिका में अब तक दो प्रतिशत लोगों की नौकरी जा चुकी है। इसी के साथ जो लोग घंटे के एवज में वेतन पाते थे, उनका काम करने के समय को पांच प्रतिशत तक कम कर दिया गया है। 18 से 24 साल के युवाओं में छह प्रतिशत की नौकरी ऑटोमेशन के चलते नहीं रही, जबकि 11 प्रतिशत युवाओं के काम करने के घंटों में कटौती कर दी गई हैं।

इतना ही नहीं, लंदन में तो अब डिलीवरी बॉय तक की नौकरियों पर संकट नजर आने लगा हैं। यहां रोबोट्स खाने-पीने की सामग्री घर-घर पहुंचाने का काम सफलतापूर्वक करने लगे हैं। ‘स्टारशिप’ नाम की एक टेक्नोलॉजी कंपनी का छह पहियो वाला रोबोट सड़क मार्ग से कई बाधाएं पार करते हुए पार्सल लेकर घर पहुंच जाता है। अपने खास सेंसर की मदद से वह किसी से टकराता भी नहीं और सिग्नल्स भी बखूबी पार कर लेता है। यह जरूर है कि जहां हमारे डिलीवरी बॉय किसी पार्सल पहुंचाने में ज्यादा से ज्यादा 20 मिनट लेने का दावा करते हैं, वहीं ये रोबोट अधिकतम 30 मिनट का समय ले रहा है। दरअसल, यह साढ़े छह किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से अपना रास्ता तय करता है, ताकि किसी दुर्घटना का शिकार न हो। हालांकि, गति की तरह ये जिम्मेदारी में डिलीवरी बॉय से किसी भी मामले में कम नहीं है। अगर कोई पार्सल चुराने का प्रयास करे तो ये उसकी तस्वीर ले सकता है, जो सीधे पुलिस कंट्रोल रूम को भेजी जा सकती है। ऐसा ही हाल कुछ समय बाद भारत में भी देखने को मिल सकता है। अगर ऐसा होता है तो भारत के लिए कई परेशानियां खड़ी हो सकती हैं क्योंकि भारत की दो-तिहाई जनसंख्या 35 से कम उम्र की है और हर महीने 3.5 करोड़ युवा अपनी 18वीं सालगिरह मनाते हैं। ये सभी एक अच्छी नौकरी पाने के उत्सुक हैं। अगर भविष्य में इनके लिए नौकरियां नहीं रहीं तो भारत में सामाजिक अशांति फैल सकती है। जिस तरह हाल में सऊदी अरब ने ‘सोफिया’ नामक रोबोट को नागरिकता दी है, उससे मानव समाज की चिंता ओर भी बढ़ गई है। परिवर्तन के इस दौर में हमारी प्राथमिकता मानव होनी चाहिए। जिस काम को मानव करने के लिए उपलब्ध है, वहां रोबोट को लगाकर हम मानव के महत्व को कम तो नहीं कर रहे हैं।

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