रोम रोम में हमारे ओम भर जाये

हे प्रभु ज्ञान दाता,ज्ञान हमको दीजिये |
शीघ्र हमारे दुर्गणों,को दूर हमसे कीजये ||

लीजिये हमको शरण में,हम सदाचारी बने |
ब्रह्मचारी धर्म रक्षक और वीर व्रतधारी बने ||

रोम रोम में ओम भर जाये हमारे |
प्रभु, ऐसी शक्ति हमको दीजिये ||

छल कपट से कोसो दूर रहे हम प्रभु |
बस अपनी भक्ति में लगा लीजिये ||

भला हम सबका करे,बुरा किसी का न करे,|
ऐसी सन्मति हमरे मस्तिष्क में भर दीजिये ||

करे भलाई हम सबकी,बुराई किसी की न करे ने |,
बस यही हमारे आचरण में अब भर दीजिये |

पर्यावरण को शुद्ध करे,गंदगी हम कही न करे |
पेड़ पौधे हम लगाये,बस ऐसा साहस दीजिये ||

शिक्षित हो हमारा समाज,अनपढ़ कोई न रहे |
हर जगह अब शिक्षा के द्वार खोल दीजिये ||

मात पिता की सेवा करे,कष्ट न दे हम उन्हें कभी,|
ऐसी हो हमारी सन्मति बस ऐसी बुद्धि दीजिये ||

आर के रस्तोगी

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