लेखक परिचय

डॉ.प्रेरणा चतुर्वेदी

डॉ.प्रेरणा चतुर्वेदी

लेखिका कहानीकार, कवयित्री, समाजसेवी तथा हिन्दी अध्यापन से जुड़ी हैं।

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डॉ प्रेरणा दूबे

दुबली-पतली, सांवली, औरत तथा उसमें भी पिछ़डी, दलित तथा उसमें भी अनुसूचित जाति-जनजाति की महिला हों तो हम क्या समझते हैं। उसे नोच डालो, मार डालो। हर तरह से प्रतारित करो। इसके आवाज को, इसके निर्णय को, इसके स्वतंत्रता तथा अधिकार को कैद कर डालो। इसे बोलने मत दो। यह घर की चौखट न लांघे नहीं तो भ्रष्ट हो जाएगी। इसके लिए सीता की तरह एक लक्ष्मण रेखा खींच डालो। यही भारतीय स्त्रियॉं के प्रति आज भी धारणा है।

हां, लेकिन 69 वर्षीया संपत देवी पाल ने ठीक इसके विपरीत कार्य किया है। बुंदेलखण्ड जैसे आर्थिक रुप से पिछ़डे क्षेत्र में महिलाओं के लिए यह महिला आदर्श है। वो पाल (गडरिया) जाति से है लेकिन उसके दृढ निश्चय तथा आत्म विश्वास से ब्राहमणियों, राजपुतानियों तथा अन्य प्रभुत्त्व वर्ग की महिलाओं के दांत खट्टे हो जाते हैं।

सन् 1947 में पैदा हुयी संपत देवी पाल उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के धनग़ढ क्षेत्र की महिला है, जो गा्रमीण महिलाओं में स्वास्थ्य, शिक्षा पर्यावरण तथा अन्य कुरीतियों को दूर करने के लिए प्रयासरत हैं। इस कार्य के सुचारु रुप से संचालित करने के लिए एक समाजसेवी संगठन की शुरुआत की। उसका नाम उन्होने ‘‘गुलाबी गैंग’‘ अथवा ‘‘पिंक गैंग‘‘ रखा है। जो इसी नाम से भारत ही नहंभीं फ्रांस तक प्रचलित है। जैसा कि नाम से ही लगता है इस दल की महिलाओं के वस्त्र गुलाबी रंग के होते हैं।

अभी उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने जो चार राज्यों के गठन की बात की है उसमें पूर्वांचल, हरित प्रदेश, बुंदेलखंड तथा उत्तर क्षेत्र है। प्रायः बुंदेलखंड पिछ़डा हुआ जिला है। यहां अपराधियों की जमात पर जमात है। क्षेत्र में जातिवाद चरम पर है। बुंदेलखंड के लठैतों को बॉलीवुड में देखा जा सकता है। वे ल़डाकू भी होते हैं तथा जातिय संघर्ष को भी वहां देखा जा सकता है। जहां तक नारी मुक्ति तथा नारी विकास की बात है यहां रूढ़िवादिता तथा शिक्षा की न्यूनता है। इन्हीं सामाजिक परिस्थितियों ने संपत देवी पाल को ‘‘गुलाबी गैंग‘‘ बनाने के लिए विवश किया, क्योंकि रुढिवादिता तथा अशिक्षा में निकटता का संबंध है। ज्यों-त्यों स्त्री शिक्षित होती है त्यों-त्यों रुढिवाद का अंत होता है।

सन् 2008 में ओह प्रकाशन से फ्रांसीसी भाषा में ‘मोई संपत पाल-द चीफ डी गैंग एन सॉरी रोज‘ नामक एने बरथोड की पुस्तक आयी। जिस पुस्तक में प्रकाशक ने संपत पाल के साहसिक जीवन का चित्रण किया है। भारत के उंचे पहा़डों तथा मैदानी भागों में एक साहसिक महिला उठ ख़डी हुयी है जो हमारी सहायता कर सकती है। यह महिला वहाँ के सभ्रांत वर्गों से प्रतारितस्त्रियों की रक्षा के लिए ताल ठोककर ख़डी है। यह महिला प्रतारितपत्नियों, संपत्ति छीन लेने तथा बाहुबलियों के अत्याचार से पीड़ित महिलाओं के हक के लिए कार्य कर रही है। यह स्वयं साधनहीन होने के साथ ग़डरिया (पाल) जाति की है। जिस समाज पूर्व में भेड़ पालन, बकरी पालन से जो़डकर देखा जाता है। उक्त जाति सभ्रांत तथा प्रभुत्त्ववर्गां में नहीं गिनी जाती है। क्या ऐसी महिला दबंगों, सामंतों तथा अपराधियों से किस प्रकार लोहा ले सकती है। वह एक विद्रोही एवं न्याय के लिए संघर्षरत महिला है। इसने गरीबी को देखा है। उसने खम्बेकी ओट से ख़डी होकर तथा चोरी से शिक्षा पायी है। वह बालिका वधू भी बनी तथा ससुराल वालों से दुख भी भोगा। उसने यह बीरा उठाया कि वो अन्याय तथा अत्याचार से पीड़ित महिलाओं की रक्षा करेगी। चाहे उसके लिए उसे अपने सम्मान तथा प्राण भी क्यूँ ना देना प़डे। लेकिन समाज ने उसे प्रतारित करने का षडयन्त्र किया। वो जाग उठी तथा उसने अपना घर, अपना गांव छो़डा। उसे लगा कि इस ल़डाई को अकेले नहीं ल़डा जा सकता। आज (उस वक्त 2008में) 3000 स्त्रियां हैं जिनके हाथों में लाठियां तथा शरीर पर गुलाबी वस्त्र है। वो अभिनेत्री नहीं नेत्री हैं। उसने अपने क्षेत्र की हजारों महिलाओं को मान सम्मान दिलाया है तथा दिला भी रही है।

जैसा कि उपर बता चुकी हूं कि ये महिलाएं गा्रमीण क्षेत्रों से आती है। इनमें ज्यादातर के पास शिक्षा का अवहाव है। वे सीधे पल्ले की सा़डी पहनती हैं तथा इनका सिर-माथा पल्ले से ढका रहता है। अर्थात् ये भारतीय संस्कृति के अनुरुप रहते हुए स्त्री अन्याय तथा स्त्री मुक्ति के लिए संघर्ष कर रही हैं। संपत देवी पाल कहती है कि जब सरकार तथा समाज हमारी रक्षा नहंभीं करेगा तो विवश होकर हमें स्वयं की रक्षा करनी होगी। क्यूंकी आत्मरक्षा हर स्त्री का, हर मानव का तथा हर दलित-उपेक्षित महिला का जन्मसिद्ध अधिकार है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने तो स्वतंत्रता को जन्मसिद्ध अधिकार माना था, पर न्याय हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। उसे प्राप्त करने के लिए गुलाबी गैंग नामक गैर सरकारी संगठन का गठन किया गया है। यह गैंग कोई अपराधियों का संगठन नहंभीं है या यह गैर कानूनी भी नहंभीं है। इस गैंग का गठन ‘‘फॉर जस्टिस‘‘ हेतु किया गया है तथा गुलाबी रंग ही जीवन का रंग है। आज बुंदेलखंड की संपत देवी पाल महिलाओं के लिए एक औरत, दृढ निश्चय, आत्म विश्वास तथा न्याय की मिसाल है।

2 Responses to “गुलाबी गैंग और संपत देवी पाल”

  1. धनगर राजेश कुमार पाल

    आयरन लेडी सम्पत देवी पाल को प्रणाम ..

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  2. इक़बाल हिंदुस्तानी

    iqbal hindustani

    संपत देवी को सलाम, प्रेरणा जी को बधाई.

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