हास्य व्यंग्य कविता : परेशान ‘मेल’

मिलन सिन्हा     

man in 0fficeमैनेजर  ने बड़े  बाबू से  पूछा,

ये क्या हाल बना  रक्खा है,

टेबुल पर फाइलों का

अंबार लगा रक्खा है ?

क्या बात है,

कुछ  कहते क्यों नहीं ?

सर, कहने से  क्या लाभ

हमीं अब बदल रहें है

अपना स्टाइल, अपना स्वभाव !

सर, हम जो मर्द हैं न, अर्थात ‘मेल’

परेशां  हैं हर हाल में .

आफिस में, घर में

हर मौसम, हर काल में .

आफिस में परेशान हैं हम

फोन,फैक्स और ई-मेल  से

तो घर में,

पडोसी, आगंतुक और ‘फी-मेल’ से ! 

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