लेखक परिचय

मिलन सिन्हा

मिलन सिन्हा

स्वतंत्र लेखन अब तक धर्मयुग, दिनमान, कादम्बिनी, नवनीत, कहानीकार, समग्रता, जीवन साहित्य, अवकाश, हिंदी एक्सप्रेस, राष्ट्रधर्म, सरिता, मुक्त, स्वतंत्र भारत सुमन, अक्षर पर्व, योजना, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण, आज, प्रदीप, राष्ट्रदूत, नंदन सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेक रचनाएँ प्रकाशित ।

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मिलन सिन्हा     

man in 0fficeमैनेजर  ने बड़े  बाबू से  पूछा,

ये क्या हाल बना  रक्खा है,

टेबुल पर फाइलों का

अंबार लगा रक्खा है ?

क्या बात है,

कुछ  कहते क्यों नहीं ?

सर, कहने से  क्या लाभ

हमीं अब बदल रहें है

अपना स्टाइल, अपना स्वभाव !

सर, हम जो मर्द हैं न, अर्थात ‘मेल’

परेशां  हैं हर हाल में .

आफिस में, घर में

हर मौसम, हर काल में .

आफिस में परेशान हैं हम

फोन,फैक्स और ई-मेल  से

तो घर में,

पडोसी, आगंतुक और ‘फी-मेल’ से ! 

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