सौ दिन के साहसिक फैसलों के उजाले

– ललित गर्ग-

राष्ट्रीय आदर्शों, राष्ट्रीय प्रतीकों, राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय समृद्धि और राष्ट्रीय मान्यताओं की मजबूती के लिये नेतृत्व ऐसा होना चाहिए जो पचास वर्ष आगे की सोच रखता हो। जो केवल खुद की ही न सोचें, परिवार की ही न सोचें, जाति की ही न सोचें, पार्टी की ही न सोचंे, राष्ट्र की भी सोचें। सौभाग्य से आजादी के सात दशकों के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रूप में ऐसा नेतृत्व मिला है, जिनके दूसरे कार्यकाल के पहले सौ दिन ऐसे समय में पूरे हो रहे हैं जब चंद्रयान-2 के चंद्रमा के दक्षिणी धु्रव पर उतरने का तमगा भी संभवतः उसकी चमक बढ़ाने के लिए तैयार रहेगा। भले ही आर्थिक आपातकाल, मंदी, बेरोजगारी का शोर खड़ा किया जा रहा हो, लेकिन उपलब्धियों की फेहरिस्त लम्बी है, उजालों की प्रतीक है, नये भारत के निर्मित होने की द्योतक हैं।
नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण के साथ शुरू हुए कार्यकाल में भाजपा सरकार ने संसद में कामकाज के नये कीर्तिमान स्थापित किये। जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 और 35ए को निष्प्रभावी करने के अलावा मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक की कुप्रथा समाप्त करने का कानून भी बना। इस दौरान सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात, अर्थ और श्रम क्षेत्रों में सुधार व प्रगति के लिए कई बड़े कदम भी उठाए। किसी भी राष्ट्र के जीवन में 100 दिन ज्यादा नहीं होते, तो कम भी नहीं होते। यही बात मोदी ने अपनी कार्यशैली से उजागर की है। अब तक के शासन की यह विडम्बना रही है कि उसमें आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक स्तर पर सुधार केवल सतही, प्रदर्शन और श्रेय प्राप्ति की भावना से अधिक हुए है, रचनात्मक कम। राष्ट्रीय जीवन मूल्यों की नीति को पाखण्ड कहा जाता रहा है और मुद्दों की राजनीति को आगे किया जाता रहा है। मुद्दे तो माध्यम हैं, लक्ष्य तो मूल्यों की स्थापना है और मोदी इसी तरह मूल्यों की राजनीति करते हुए देश को मजबूती दे रहे हैं। इसके लिये उन्हें सोच के कितने ही हाशिये छोड़ने पड़ रहे हैं। कितनी लक्ष्मण रेखाएं बनानी पड़ रही है। यह सब करते हुए वे साहसिक फैसलों से नया भारत- मजबूत भारत बना रहे हैं। संकट कम नहीं है, लेकिन वे जिजीविषा से भर कर उम्मीद पर खड़े हैं।
नरेंद्र मोदी ने अपनी दूसरी पारी के सौ दिन में अब तक सात देशों की विदेशी यात्राओं के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को नया आयाम दिया है। पाकिस्तान की कुचेष्टाओं एवं आतंकवादी सोच को निस्तेज करने में इन यात्राओं की महत्वपूर्ण भूमिका बनी है एवं भारत के प्रति चीन को छोड़कर सभी देशों का समर्थन मिलना मोदी की दूरगामी सोच एवं सूझबूझ का नतीजा है। श्रीलंका एवं भूटान की यात्राओं में उन्होंने जहां पड़ोसियों से संबंधों को और मजबूत करने के लिए नेबरहुड फस्र्ट पॉलिसी पर अमल किया, वहीं पर दुनिया के शक्तिशाली राष्ट्रों में से एक और पुराने सहयोगी रहे रूस का भी दौरा कर धाक जमाई। फ्रांस में जी-7 सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी मीटिंग चर्चा में रही। सबसे पहले मालदीव का दौरा किया। वहां के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह से भेंट की। मालदीव दौरे का मुख्य उद्देश्य नेबरहुड फस्र्ट पॉलिसी के तहत सुरक्षा, विकास की दृष्टि के भारत के संबंधों को और मजबूत करना था। दरअसल मालदीव की दक्षिण एशिया और हिन्द महासागर में जो स्ट्रेटजिक (सामरिक) लोकेशन है, वह भारत के लिए बेहद अहम है। मालदीव में पिछले कुछ सालों में चीन ने अपना प्रभुत्व बढ़ाया है। चीन ने इस देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में भारी निवेश किया है। हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर उल्लेखनीय सफलता मिली। इस परिप्रेक्ष्य में मोदी के मालदीव दौरे की बहुत अहमियत रही। दौरे के दौरान मोदी को मालदीव के सर्वोच्च सम्मान ‘निशान इजुद्दीन’ से भी सम्मानित किया गया। मोदी ने 23 और 24 अगस्त को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दौरे में क्राउन प्रिंस अबू धाबी, शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ भेंटवार्ता की। मोदी ने यूएई का सर्वोच्च जायद सम्मान भी हासिल किया। नरेंद्र मोदी ने बहरीन दौरे के दौरान चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए। वहीं किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला बहरीन दौरा है।
जून में एससीओ सम्मेलन में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को नजरअंदाज कर दर्शाया कि आतंक पर ठोस कार्रवाई के बिना वार्ता संभव नहीं। अगस्त में जी-7 सम्मेलन में कश्मीर मसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उछालने की पाक की कोशिश नाकाम की। कश्मीर को आंतरिक मामला बताकर उन्होंने सख्त लहजे में साफ किया कि तीसरे पक्ष के दखल की गुंजाइश नहीं है। 24 अगस्त को संयुक्त अरब अमीरात ने मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ से सम्मानित किया। 25 अगस्त को मोदी बहरीन के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां’ से सम्मानित किए गए। मुस्लिम देशों के सर्वोच्च सम्मानों से मोदी को सम्मानित किया जाना जहां उनकी वैश्विक ताकत को दर्शाता है, वही भारत की पाकिस्तान नीति के समर्थक के तौर पर भी देखा जा रहा है। मुस्लिम देशों को आतंकवाद की बजाय विकास के समर्थन में खड़ा करने में मोदी की कूटनीति एवं रणनीति एक नये राजनीतिक अध्याय का शुभारंभ है।
मोदी सरकार ने अपनी सौ दिनों के कार्यकाल को इतना सशक्त एवं कार्यकारी बनाया है कि हर दिन भारत के भाल पर एक उपलब्धि को जड़ा है। दस सरकारी बैंकों के विलय से चार बड़े बैंक बनाने का ऐलान किया भी बड़ा साहसिक निर्णय है। इससे बैंकिंग प्रक्रिया में नयी ऊर्जा का संचार होगा। गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम (संशोधन) विधेयक-2019 कानून, आतंक के खिलाफ जंग में बड़ा कदम है, अब व्यक्ति विशेष आतंकी घोषित हो सकेगा। पहले सिर्फ संगठनों को आतंकी घोषित करना संभव था। यह मोदी की दृढ़ निश्चिय शक्ति एवं साहस का ही परिणाम है कि लोकसभा ने किसी सत्र में कामकाज का रिकॉर्ड बनाया है। इस सत्र में आरटीआई संशोधन विधेयक सहित 36 विधेयकों को मंजूरी मिली। लंबे समय बाद यह संभव हुआ कि संसद ने बिना किसी दिन को बर्बाद किए देर रात तक काम किया।
मोदी सरकार के सामने अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर आर्थिक मंदी जैसे हालात से निपटने की चुनौती है। महंगाई को नियंत्रित करना और बाढ़ से हुए नुकसान के बाद पनपे हालात को संभालना भी उसकी प्राथमिकता में होगी। व्यापार की दशा एवं दिशा सुधारना, रोजगार के मोर्चे पर बेहतर स्थिति बनाना और आतंकवाद के मामले में सीमापार से बढ़े खतरे से निपटना भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। सरकार ने शुरुआत से ही देश को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का बड़ा लक्ष्य तय कर लिया है। वैश्विक मंदी और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर मुश्किल दौर से गुजर रहे देश को इस मुकाम पर ले जाने के लिए उसने विभिन्न मंत्रालयों के लिए समयावधि लक्ष्य भी निर्धारित किए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने बैंकों की मजबूती के साथ उद्योग जगत को संभालने के लिए कई रियायतें व बड़े कदम उठाने का ऐलान किया है। संसद के दोनों सदनों की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नए मोटर वाहन अधिनियम पर दस्तखत किए। 1 सितंबर 2019 से नया कानून के अन्तर्गत यातायात नियम तोड़ने पर जुर्माना राशि बढ़ायी गयी है, सजा के प्रावधान भी सख्त किये गये हैं। संसद ने ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक-2019’ पारित किया, एक अगस्त से तीन बार ‘तलाक’ बोलकर, लिखकर या एसएमएम-ईमेल भेजकर शादी तोड़ने पर तीन साल तक की जेल का प्रावधान किया गया है। मोदी भ्रष्टाचार के सफाये के लिये भी अपने संकल्प को आकार देने में जुटे हैं। भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों ने सख्त कार्रवाई करके सकारात्मक संकेत दिये हैं। चिदंबरम को जहां तिहाड़ जेल जाना पड़ा है, वहीं मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कर्नाटक के कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार की भी गिरफ्तारी हुई। बीजेपी ने विरोधी दलों में सेंधमारी कर राज्यसभा में अपनी स्थिति भी मजबूत की है। इतिहास के दो प्रमुख राजा हुए हैं। दृढ़ मनोबल के अभाव में एक ने पहले ही संघर्ष में घुटने टेक दिये और साला कहलाया। दूसरे ने दृढ़ मनोबल से संकल्पित होकर, घास की रोटी खाकर, जमीन पर सोकर संघर्ष किया और महाराणा प्रताप कहलाया। नरेन्द्र मोदी दूसरे श्रेणी के सम्राट हंै, वे कांटों की बाड़ नहीं हैं- वे तो एक मर्यादा की, नैतिकता की, राष्ट्रीयता की रेखा है। इसको जिसने भी लाँघा, वक्त का रावण उसे उठा ले गया।

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