एनडीए सरकार के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था का परिदृश्य (2014 -2021)


डॉ. ब्रजेश कुमार तिवारी

एनडीए सरकार ने पिछले महीने अपने सात साल पूरे कर लिए हैं। इस अवधि के दौरान देश की आर्थिक भलाई पर ध्यान देने के साथ कई सुधार लागू किए गए हैं। हालांकि कोरोना ने लगातार दो साल से पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है, फिर भी भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में गिनी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक उन्नति को एक नई दिशा देने का प्रयास किया है।
“गरीबी हटाओ” के नारे से आगे बढ़कर अब भारत आत्मसम्मान से जीने के लिए आत्मनिर्भर बन रहा है, पहले हमारे देश से गया कच्चा माल, विदेशों से उत्पाद बनकर लौटता था, पर आज वेंटीलेटर से लेकर बड़ी बड़ी वस्तुओं का उत्पादन देश में ही हो रहा।
बिजनेस वर्ल्ड कॉम्पिटीटीवनेस रैंकिंग में भारत की वैश्विक रैंकिंग में लगातार सुधार हो रहा है। देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में काफी तेजी आयी है। परचेजिंग मैनेजर इंडेक्स (पीएमआई) अक्टूबर 2020 में 8 साल के उच्चतम स्तर 58 पर पहुंच गया था। फरवरी 2012 के बाद PMI की यह सबसे मजबूत ग्रोथ है। विश्व बैंक के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस 2020 सर्वेक्षण के अनुसार, भारत पहले ही 14 स्थानों की छलांग लगाकर विश्र्व में 63वां स्थान हासिल कर चुका है, जो की पिछले सात सालों में सबसे ऊपर है। ‘लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स’ (एलपीआई) में भारत अब 160 देशों में 35 वें स्थान पर है। जहाँ ये वर्ष 2014 में 54 वें नंबर पर था । आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 590 अरब डॉलर हो चूका है, जो की आजादी के बाद सबसे अधिक है। शेयर बाजार भी इतिहास रच रहा 15-16 हज़ार पर रहने वाला सेंसेक्स आज 40 हज़ार पार कर रहा ।
जब देश आजाद हुआ तब देश की कुल आबादी में से लगभग 75% लोग गरीब थे, आज यह गरीबी, घटकर लगभग 21% हो गई है, “आधार” आज भारत की सबसे विश्वसनीय ‘पहचान मुद्रा’ बन गया है। वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना को भी लागू करने का फैसला किया गया है अब कोई भी कार्डहोल्डर देश के किसी भी हिस्से में जन वितरण प्रणाली की दुकान से राशन ले सकेगा। सरकार ने छोटे व्यापरियों के लिए पेंशन योजना शुरू की है। इस योजना के तहत, देश के करीब 3 करोड़ खुदरा व्यापारियों को 60 साल की उम्र के बाद 3000 हजार रुपए हर महीने पेंशन दी जा रही है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था आय सुरक्षा प्रदान करने के उदेश्य से अटल पेंशन योजना (एपीवाई) मोदी सरकार की एक और प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना है। “हर परिवार को आवास” के नारे के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 1.95 करोड़ नए आवासों का निर्माण वर्ष 2022 तक किया जाना प्रस्तावित है। धुँआरहित ग्रामीण भारत की परिकल्पना करते हुए ‘उज्जवला योजना” के अंतर्गत लगभग 8 करोड़ एलपीजी के कनेक्शन गरीबों को मुफ्त में दिलवाए गए हैं। सौभाग्य योजना के अंतर्गत 100 प्रतिशत गांवों में बिजली उपलब्ध करवा दी गई है। आयुष्मान भारत (पीएम-जय)दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है जिसके तहत लगभह 10 करोड़ बीपीएल धारक परिवार (लगभग 50 करोड़ लोग) को कैशरहित स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराया जा रहा। इसके अन्तर्गत आने वाले प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ़्त इलाज होगा। बैंक खाता न होने की वजह से देश के करोड़ों गरीब परिवार ऐसे थे जो मुख्यधारा के अर्थतंत्र से बाहर थे। लगभग 44 करोड़ लोगों ने प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत अपना खाता खुलवाया है, आज करोड़ों किसानों, महिलाओं, प्रवासियों को सरकार सीधा मदद पहुँचा पा रही है।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए अनेक वैकल्पिक चीजों पर भी बल दिया गया है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 6,000 रुपए प्रति वर्ष प्रत्येक पात्र किसान को खाद व बीज के लिए दिए जा रहे हैं, देश के किसानों को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर देने के लिए एक लाख करोड़ रुपए का ‘एग्रीकल्चर इनफ्रास्ट्रक्चर फंड’ बनाया गया है।
‘मेक इन इंडिया’, ‘स्किल इंडिया’ व ‘वोकल फ़ॉर लोकल’ जैसे कार्यक्रम की शुरुआत हुई है, इससे देश में निवेश एवं निर्माण, संरचना तथा नए रोजगार सृजन में बल मिला है। कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम हुआ है, इसके तहत कुल 7,000 उपाय (सुधार) किए गए हैं। मेक इन इंडिया कार्यक्रम के बदौलत भारत 20 साल में पहली बार एफडीआई हासिल करने के मामले में चीन से आगे निकल गया। इस दौरान वर्ष 2018 में भारत में 38 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ, जबकि चीन सिर्फ 32 अरब डॉलर ही जुटा सका। अप्रैल 2014 से मार्च 2019 तक भारत में एफडीआई में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2016 में नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के इरादे से स्टार्टअप इंडिया योजना प्रारम्भ हुआ है, देश में 1,000 करोड़ रुपये के स्टार्टअप इंडिया सीड फंड की शुरुआत की गई है। स्वरोजगार व नए बिजनेस मॉडल के स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए मुद्रा लोन योजना प्रारंभ की गई है। जिसमें युवा दस लाख तक का लोन बहुत ही आसानी से ले सकते हैं, इस योजना से लगभग 3.5 करोड़ नए उद्यमी बने हैं जिनको 30 करोड़ रुपये के करीब लोन दिए गए हैं। गरीब से गरीब भी आत्मसम्मान का जीवन बिता सकें इसके लिए रेहड़ी व पटरी वालों को “पीएम स्व-निधि योजना” के तहत दस हज़ार तक का कर्ज दिया जा रहा है।
मार्च 2013 तक बैंकिंग सेक्टर के खाते में 48382 करोड़ रुपये एजुकेशन लोन था, अक्टूबर 2020 तक कुल एजुकेशन लोन का आंकड़ा बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। जो आज के युवाओं में सीखने की ललक को दर्शाता है।
बैंकिंग प्रणाली किसी भी अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा होती है, सात साल के दौरान सबसे साहसिक आर्थिक कदम उठाते हुए सरकार ने 10 सरकारी बैंकों का बड़े बैंकों में विलय किया है। यह विलय भारतीय बैंकों को पूंजी पर्याप्तता और बड़े आकार का लाभ प्रदान करेगा, जो कि अधिकांश विदेशी बैंकों के पास है। बैंकिंग क्षेत्र में एनपीए को कम करने के लिए सरकार ने कई कठोर कदम उठाए हैं जिनमें रिकॉग्निशन, रिजर्वेशन, रीकैपिटलाइजेशन एंड रिफॉर्म तथा इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड प्रमुख बड़े कदम शामिल हैं, जिसका असर होना शुरू ही हुआ था कि कोरोना महामारी ने एनपीए को कुछ समय के लिए जरूर बढ़ा दिया है। अन्तर्राष्ट्रीय एजेंसी पीडब्लूसी के सर्वे के अनुसार भारत वर्ष 2040 तक दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बैंकिंग हब हो सकता है।
कर सुधार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। जीएसटी भारत में सबसे बड़ा कर सुधार है जिसकी स्थापना “एक राष्ट्र, एक बाजार, एक कर” की धारणा पर हुई थी और अब जीएसटी पूरे देश के लिए एक एकल घरेलू अप्रत्यक्ष कर कानून है जो भारतीय अर्थव्यस्था में बखूबी अपना किरदार निभा रहा। नोटबंदी का ज़िक्र न किया जाए, तब तक मोदी सरकार की उपलब्धियों का ज़िक्र अधूरा रह जाएगा. एक और जहाँ इससे काले धन पर प्रहार हुआ वहीँ लोगों में केसलेस् व डिजिटल पेमेंट में भरोसा जगा, भीम यूपीआई ने पेमेंट सिस्टम में क्रांति ला दी है, इसका श्रेय मोदी सरकार को देना ही पड़ेगा।
सरकार ने समावेशी विकास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए औद्योगिक कॉरिडोर की स्थापना कर रही है। भाग्य की रेखाओं की तरह सड़के तरक्की का रास्ता होती हैं, देश में पहली बार प्रतिदिन 37 किमी नेशनल हाईवे 6 से 12 लेन के बनाये जा रहे। आम आदमी के लिए हवाई यात्रा को और अधिक किफायती बनाने के लिए “उड़ान योजना” अक्टूबर 2016 में शुरू की गई है। 5 जी से जहाँ संचारक्रांति आई वहीँ इसरो ने एक साथ 100 से ज़्यादा उपग्रह प्रक्षेपित करने का रिकॉर्ड मोदी सरकार के कार्यकाल में ही बनाया है।
देश अब बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर से ‘मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर’ की और बढ़ चुका है। 2014 और 2021 के बीच बहुत कुछ बदल गया है। लाल फीताशाही पद्धति को बदलते हुए पीएम मोदी व्यक्तिगत रूप से कार्यक्रमों की प्रगति की निगरानी और समीक्षा करते हैं।
सरकारी बजट का अतीत की तुलना में बेहतर तरीके से उपयोग हो रहा है लेकिन हम जानते हैं सिक्के के दो पहलु होते हैं ढेर सारी आर्थिक उपलब्धियों के बाउजूद कुछ आर्थिक चुनौतियां भी मुँह खोले खड़ी हैं। इसमें कोई दो-शक नहीं की स्वरोजगार के लिए देश में बहुत सारे प्रयास हो रहे पर अभी तक सभी इंतजाम नाकाफी साबित हुए हैं। रोजगार भारत के सामने सबसे बढ़ा चुनौती है, बेरोजगारी दर बढ़ रही, देश में हर महीने लगभग 10 लाख से ज्यादा लोग रोजगार पाने की होड़ में आ जाते हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर लोगों को रोजगार नहीं मिलता। सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के मुताबिक कोरोना महामारी के चलते बेरोजगारी ने 4 दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। सरकार के लिए महंगाई के मोर्चे पर चुनौतियां कम नहीं हैं। कुछ समय से कई खाद्य वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ी रही हैं। देश की बड़ी आर्थिक चुनौतियों में सकल घरेलु उत्पाद (जीडीपी) प्रमुख है जिसे महामारी ने काफी हानि पहुंचाई है वहीँ कुछ महीनों से उपभोग में मंदी नजर आ रही है। एक ओर जहाँ कई उत्पादों की बिक्री में गिरावट देखी जा सकती है वहीं पेट्रोल व डीजल की कीमतें बढ़ती जा रहीं, हालांकि भारत सरकार आश्वस्त है, लेकिन अर्थव्यवस्था को उच्च विकास के रास्ते पर वापस लाने के लिए कुछ ठोस और साहसिक कदमों की बड़ी शिद्दत से जरूरत महसूस की जा रही है।

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