शमसोई गांव के वाल्मीकि समाज के लोग क्यों मुसलमान होना चाहते हैं ?

दूसरी तरफ कुछ सवालात उन लोगों से भी होने चाहिए जो लगता है कि इस्लाम मज़हब को दूसरों को ब्लैकमेल करने का ज़रिया समझ बैठे हैं। आपकी नज़र में इस्लाम क्या है ? यह सब से पहला सवाल है। क्या आप जानते हैं कि इस्लाम ही वह मज़हब है जो कहता है कि अगर तुम मुझ पर मुकम्मल यक़ीन रखोगे और मेरे बताए तरीक़े पर अमल करोगे तो दुन्या और परलोक दोनों में तुम्हारी कामयाबी स्पष्ट है।

संभल के फतेहपुर शमसोई गांव में जिला और पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद गांव के नाई वाल्मीकि समाज के लोगो के बाल कटवाने को तैयार हो गए है। गांव के अगडी जाति के लोगों के वाल्मीकि जाति के लोगों के बाल नहीं काटने की चेतावनी देने के बाद गांव के नाइयों ने अपनी दुकानें बंद कर दी थीं। फतेहपुर शमशोई गांव के वाल्मीकि समाज के लोगो ने अपने ही गांव में अगड़ी जातियों के विरोध की वजह से बाल न कटवा पाने पर इस्लाम धर्म अपना लेने की धमकी दी थी। इस गांव में करीब 15,000 ठाकुर तथा 1250 वाल्मीकि परिवार रहते है।

गांव में अगडी जाति के फरमान की वजह से बरसों से वाल्मीकि समाज के लोग गांव के नाई से न तो अपने बाल कटवा पाते थे और न ही दाढी बनवा पाते थे। गांव के रहने वाले सौरभ वाल्मीकी ने बताया कि करीब एक माह पहले मेरे चचेरे भाई अनिल भूरा और ब्रजेश वाल्मीकि गांव में एक मुस्लिम नाई की दुकान पर गये और अपने बाल कटवाएं। लेकिन कुछ दिन बाद वह लोग उसी दुकान पर दाढी बनवाने गये तो दुकानदार ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। उसने बताया कि वाल्मीकि समाज के लोगो के बाल काटने पर गांव के अगड़े लोगो ने उसकी पिटाई की साथ ही डराया धमकाया भी, ऊंची जाति के दबाव के कारण उसने बाल काटना बंद कर दिया।

अब नौबत यहां तक आ गई है कि गांव के वाल्मीकि इस्लाम धर्म अपनाने की बात कर रहे हैं। हाल में भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज के राष्ट्रीय मुख्य संचालक लल्ला बाबू द्रविड़ ने ऐलान किया था कि अगर अत्याचार जारी रहा तो वाल्मीकि समुदाय के लोग धर्म परिवर्तन की राह अपनाएंगे। वहीं संभल के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पांडे ने बताया कि उन्हें वाल्मीकि समाज के लोगो के बाल न काटने की शिकायत गांव से मिली थी लेकिन अब नाई वाल्मीकि समाज के लोगो के बाल काटने को तैयार हो गए है।

देखा जाए तो मामला नाक का है, अपनी आना का है, अपने आपको बड़ा और दूसरे को ज़लील और कमतर साबित करने का है। लेकिन सवाल यह है कि आज इक्कीसवीं सदी में जब के साइंस और टेक्नोलॉजी का दौर है, देश का प्रधान मंत्री देश के उज्जवल भविष्य की बात करता है, क्या इन्ही हालात में देश का भविष्य उज्जवल हो सकता है ?  क्या ऐसे ही हम दुन्या के दूसरे विकसित देशों से आँखों से आंखें मिला पाएंगे ? क्या ऐसे ही अंधविश्वास पर पलने बढ़ने वाला समाज उन्नति कर सकता है ?

दूसरी तरफ कुछ सवालात उन लोगों से भी होने चाहिए जो लगता है कि इस्लाम मज़हब को दूसरों को ब्लैकमेल करने का ज़रिया समझ बैठे हैं। आपकी नज़र में इस्लाम क्या है ? यह सब से पहला सवाल है। क्या आप जानते हैं कि इस्लाम ही वह मज़हब है जो कहता है कि अगर तुम मुझ पर मुकम्मल यक़ीन रखोगे और मेरे बताए तरीक़े पर अमल करोगे तो दुन्या और परलोक दोनों में तुम्हारी कामयाबी स्पष्ट है। क्या आपको मालूम है कि इस्लाम एक ईश्वर जो निराकारी है उस पर भरोसे की बात करता है। क्या आपको यह मालूम है कि ईश्वर ने दुनिया के लोगों को सही मार्गदर्शन दिखने और अपनी बातों दुनया के लोगों को बताने के लिए अपने दूत भेजे हैं। दुनिया का पहला इंसान आदम अलैहि अस्सलाम को अपना दूत बनाया ताकि आने वाले लोग ईश्वर की बातों को जानते हों और उस पर अमल कर सकें और अगर ईश्वर की बात समझने में कोई परेशानी हो तो उसका दूत उनकी मदद करे।

क्या आपको मालूम है की आदम ईश्वर की और से पहला इंसान और पहला दूत थे। फिर जैसे जैसे लोग बढ़ते गए, दुनिया फैलती गई ईश्वर ने हर जगह अपने दूत भेजने का सिलसला जारी रक्खा। यहाँ तक कि आखरी दूत मोहम्मद सल्लाहो अलैहेवस्सलम को भेजा। और क्या आपको मालूम है कि मुहम्मद सल्ललाहो अलैहेवस्सलम के जाने से पहले ही ईश्वर ने क़ुरआन में बता दया कि यह आखरी दूत है और अब मोहम्मद सल्ललाहो अलैहेवस्सलम के बाद कोई दूत नहीं आऐगा। और मुहम्मद सल्ललाहो अलैहेवस्सलम ने जाते वक़त बताया कि दुनया और परलोक में बस वही कामयाब होंगे जो क़ुरआन और मेरी सुन्नत यानि हदीस पर अमल करेगा। और क्या आपको यह मालूम है की एक ईश्वर जिसे अल्लाह कहते हैं और मोहम्मद जो उसके आखिरी दूत हैं उन दोनों पर यक़ीन रखने वाले, उन दोनों की बात मानने वाले, उन दोनों के अलावा किसी और की बात ना मानने वाले को और एक ईश्वर, अल्लाह के अलावा किसी और को इश्वर्य शक्तियां ना रखने वाले को ही मुसलमान कहते हैं। क्या आप इन तमाम बातों की जानकारी के साथ ही मुसलमान हो रहे हैं या होने का इरादा था आपका ? या बस ऐसे ही अपने मुद्दे को मीडिया में लाने, उस पे चर्चा हो और उसस्के समाधान यानि आपके बाल सब नाई काटें, इसके लिए आप मुसलमान हो रहे थे ?

 

मोहम्मद आसिफ इकबाल

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