लेखक परिचय

प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो

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भार्गव चन्दोला

11 साल हो गए उत्तराखंड को बने हुये मगर आज भी हम उत्तराखंडी नहीं बन पाये…. आज हम कुमाउनी, गढ़वाली, मैदानी, जौनसारी, ब्राह्मण, ठाकुर, हरिजन, पंजाबी, जाट, सरदार, बनिया, मुस्लमान बन कर रह गए हैं जिस कारण लगातार आपसी भाईचारा धीरे-धीरे कम होता जा रहा है जो की हमारे उत्तराखंड को लाईलाज बीमारी की तरह खोकला करता जा रहा है…. जिसे हमारे महत्वाकांक्षी नेता उनके दलाल और कुछ बीमार मानसिकता के मीडिया से जुडे लोग हवा दे रहे हैं… कई शालों के आन्दोलन के बाद उत्तराखंड का निर्माण क्या इसी दिन के लिए हुवा था क्या उत्तराखंड के शहीदों ने इसी दिन को देखने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी ? हमारे पड़ोसी राज्य हिमाचल के लोगों को देखिये वो केवल हिमाचली हैं….. हम केवल उत्तराखंडी हैं और हमे केवल उत्तराखंडी कहा जाए… मेरा अनुरोध है उन तमाम चाटुकार नेताओं और उनके चाटुकार दलालों से कृपया उत्तराखंडीयों को कुर्सी और लाल बती के लिए बांटने का प्रयास न करें…. उत्तराखंड की जनता से निवेदन है की माजूदा समय में उत्तराखंड के कुछ महत्वाकांक्षी नेताओं और उनके चाटुकारों ने प्रदेश में जो तांडव किया है उसके पीछे केवल और केवल उनके व्यक्तिगत स्वार्थ छिपे हैं और उन्हें उत्तराखंड की जनता और यहाँ की मूलभूत सुविधाओं से कोई लेना देना नहीं है अगर इन्हें उत्तराखंड के हितों से कुछ लेना देना होता तो आज उत्तराखंड विनाश की दहलीज पर खड़ा नहीं होता… यहाँ जनता के द्वारा चुने गए विधायकों का ये कहना की मंत्रीपद उनके जूते पर रखा है इस बात का सबूत है… वही दूसरे एक कद्दावर नेता का ये कहना की वो उत्तराखंड को इसलिए अस्थिर कर रहे थे की वो अपनी ताकत दिखा रहे थे…. क्या हम इन्हें इसी लिए चुनते हैं… क्या इन्होने कभी उत्तराखंड के विकास के लिए कोई ताकत दिखाई है ? नहीं…. औद्योगिक पेकेजे छिना ये मौन रहे, राजधानी के मुद्दे पर ये मौन रहे, मूलनिवास के मुद्दे पर ये मौन रहे, हिमाचल की तर्ज पर भू-कानून के लिए ये मौन रहे, बेरोजगारी के मुद्दों पर ये मौन रहे, कालाबाजारी पर ये मौन रहे …. फिर ये कुर्सी और लाल बती के लिए क्यों अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं…. और ताकत दिखानी है तो दिखाएँ जनता को क्यों जातिगत, क्षेत्रवाद के नाम पर भ्रमित कर रहे हैं…. क्या जनता ने आपका चुनाव इसी के लिए किया है?

 

 

 

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