जीवन की कुछ सच्चाईयां


ज़मीन पर बैठ कर,क्यो आसमान को देखता है,
पंख अपने ही फैला,ज़माना उड़ान को देखता है।

कमाई दूसरे की देखकर,क्यो कभी जलता है,
कमाई अपनी ही कर,उसी से काम चलता है।

बुराई मत कर किसी की,भगवान भी देखता है,
भला कर सभी का,भगवान भी उसी को देखता है।

बोए पेड़ बबूल के,आम कहां से तू खायेगा,
लगाया पेड़ खजूर का,छाया कहां से पाएगा।

अच्छे कर्मों का तू अच्छा ही फल सदा पाएगा,
बुरे कर्मों का नतीजा,सदा तेरे ही आगे आयेगा।।

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