आर्थ‍िक मोर्चे पर प्रधानमंत्री की तार्किक बातें

डॉ. मयंक चतुर्वेदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था में सुस्ती को लेकर प्रतिपक्ष एवं अपनी पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों का जिस तरह से एक के बाद एक उत्‍तर दिए हैं, उसके बाद उन सभी लोगों को अवश्‍य ही यह समझ जाना चाहिए कि केंद्र की भाजपा सरकार मोदी नेतृत्‍व में जो भी निर्णय ले रही है, वह देश को स्‍थायी शक्‍ति सम्‍पन्‍न एवं अर्थ व्‍यवस्‍था की दृष्‍ट‍ि से मजबूत बनाने वाले ही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष के समक्ष जो भी बातें तार्किक ढंग से रखी हैं, उसके बाद यह कदापि नहीं लगता कि विपक्ष उसी अंदाज में अपनी बात देश की आमजनता के समक्ष रखकर स्‍वयं के उन सभी तर्कों को सही ठहराने में सफल हो सकेगा, जिसकी बार-बार वह मंचों से चर्चा करता रहा है और आज भी कर रहा है।

वस्‍तुत: सच यही है कि जब से केंद्र में मोदी सरकार आई है, तब से पीएमओ और केंद्रीय मंत्रीमण्‍डल के द्वारा लिए गए सभी फैसले देशहित में ही हुए हैं। फिर उसमें नोटबंदी का निर्णय हो या अन्‍य कुछ ओर । आज विपक्ष का केंद्र सरकार पर सबसे बड़ा आरोप यही है‍ कि देश की अर्थव्‍यवस्‍था पटरी से नीचे उतर गई है, जिसके कारण से रोजगार के अवसर कम हुए है। जीडीपी का बुरा हाल है। महंगाई चरम पर है। इस बार इन सभी आरोपों के उत्‍तर प्रधानमंत्री ने पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन के सहारे देकर अपने आलोचकों को बिन्दुवार जवाब देने का प्रयास किया है। इस प्रस्‍तुतिकरण में प्रधानमंत्री मोदी ने कई पैरामीटर्स का जिक्र किया है, जिससे कि वर्तमान में देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति, सरकार की निर्णय शक्ति और विकास की दिशा और गति को साक्ष्‍य सहित समझाया जा सके।

प्रधानमंत्री ने यहां भाजपा सरकार के आलोचकों से सीधा प्रश्‍न किया है कि क्या ऐसा पहली बार हुआ है जब देश के जीडीपी की वृद्धि किसी तिमाही में 5.7 प्रतिशत पर पहुंची है?  पिछली सरकार में छह साल में आठ बार ऐसे अवसर आए, जब विकास दर 5.7 प्रतिशत या उससे नीचे गिरी थी। इतना ही नहीं तो देश की अर्थव्यवस्था ने ऐसी तिमाही भी देखी हैं जब विकास दर 0.2 प्रतिशत और 1.5 प्रतिशत थी और उस समय भारत की मुद्रास्फीति और चालू खाते का घाटा भी अधिक था। क्‍या आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इन बातों को कोई नकार सकता है कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के कार्यकाल में अर्थव्यवस्था की स्थिति इतनी नाजुक हो गई थी कि भारत को “फ्रेजाइल फाइव” ग्रुप का सदस्य कहा जाने लगा था। उस समय बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों के रहते ऐसा कैसे हो गया? हमारे देश में जीडीपी से ज्यादा महंगाई की दर थी और बढ़ते राजकोषीय घाटे तथा बेकाबू चालू खाते के घाटे पर ही चर्चा होती थी।

प्रधानमंत्री ने यूपीए और एनडीए सरकार के तीन सालों के कार्यकाल की कुछ इस तरह से तुलना प्रस्‍तुत की कि उसे पढ़ लेने के बाद कोई यह नहीं कह सकता, कि इस सरकार में देश आर्थ‍िक सुधारों की ओर अग्रसर न हो कर एक पल के लिए भी अर्थ की कमजोर स्‍थ‍िति में आया हो। वे कहते हैं कि पिछली सरकार के आखिरी तीन सालों में गांवों में 80 हजार किलोमीटर सड़क बनी थीऔर हमारी सरकार के तीन साल में 1 लाख 20 हजार किलोमीटर सड़क बनाई है। यानि 50 प्रतिशत से ज्यादा ग्रामीण सड़कों का निर्माण हुआ है। पिछली सरकार ने अपने आखिरी के तीन साल में 15 हजार किलोमीटर राष्‍ट्रीय राजमार्ग बनाने के काम किया , जबकि हमने तीन साल में 34 हजार किलोमीटर से ज्यादा राष्‍ट्रीय राजमार्ग बनाया है।

इसी तरह रेलवे सेक्टर में पिछली सरकार के आखिरी तीन वर्षों में लगभग 1100 किलोमीटर नई रेल लाइन का निर्माण हुआ था और हम तीन वर्षों में 2100 किलोमीटर से ज्यादा तक पहुंच गए । वहीं इतने समय में पिछली सरकार ने 1300 किलोमीटर रेल लाइनों का दोहरीकरण किया तो हमने 2600 किलोमीटर रेल लाइन का दोहरीकरण किया है।पिछली सरकार के आखिरी के तीन वर्षों में 1 लाख 49 हजार करोड़ का पूंजीगत व्यय किया था इतने ही वर्षों में लगभग 2 लाख 64 हजार करोड़ रुपए का पूंजीगत व्यय हमारे द्वारा संभव हुआ है, यानि ये भी 75 प्रतिशत से ज्यादा है। नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा क्षेत्र में मोदी सरकार पिछली सरकार के बीते तीन वर्षों के कुल कार्यकाल में 12 हजार मेगावॉट की नई क्षमता जोड़ने के स्‍थान पर आज  इतने ही समय में 22 हजार मेगावॉट से ज्यादा ऊर्जा की नई क्षमता को ग्रिड पावर से जोड़ने में सफल रही है।

 

प्रधानमंत्री कहते हैं कि विमुद्रीकरण के बाद सकल घरेलू उत्पाद अनुपात नकद में  नौ प्रतिशत आ गया है, जबकि यह पहले 12 प्रतिशत था । 10 प्रतिशत से ज्यादा की मुद्रास्फीति कम होकर अब इस साल औसतन 2.5 प्रतिशत पर आ गई है। केंद्र सरकार अपना राजकोषीय घाटा पिछली सरकार के 4.5% प्रतिशत से घटाकर 3.5% प्रतिशत पर ले आई है। भारत का विदेशी मुद्रा भण्‍डार आज40 हजार करोड़ डॉलर के पार पहुंच गया है। रिजर्व बैंक का अनुमान है कि अगली तिमाही के जो आने वाले आंकड़े हैं उसमें  जीडीपी ग्रोथ 7.7 तक होने की संभावना है । वहीं एफएमसीजी के क्षेत्र में भी डिमांड ग्रोथ का ट्रेड सितंबर महीने में बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

आंकड़ों को देखें तो कोयला, बिजली, स्‍टील और प्राकृतिक गैस से प्राप्‍त आय में भी काफी अच्छी वृद्धि दर्ज की जा रही है। देश में लोन के क्षेत्र में ग्रोथ देखने योग्‍य है। केपिटल मार्केट, म्‍युचल फंड और बीमा क्षेत्र आज तेजी से प्रगति पथ पर है। कंपनियों ने आइपीओ के द्वारा इस साल पहले 6 महीने में ही 25 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि मोबलाइज की है। गैर-वित्तीय संस्थान में कॉरपोरेट बॉन्ड और निजी नियुक्तियों के द्वारा सिर्फ चार महीने में ही 45 हजार करोड़ रुपयों का निवेश किया जा चुका है। मोदी कहते हैं कि ये ये सारे आंकड़े देश की मजबूत आर्थ‍िक स्‍थिति को दर्शाते हैं, यानि भारत में अब फायनेसिंग केवल बैंकों के कर तक ही सीमित नहीं रह गई है। इस सरकार ने समय और संसाधन, दोनों के द्वारा उसके सही इस्तेमाल पर लगातार जोर दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने जिस एक बात पर विशेष ध्‍यान दिलाया है, वह है, हमें देश में निराशा का माहौल पैदा करने से बचना चाहिए। इस वक्‍त देश आर्थिक विकास की ओर अग्रसर है, जिसमें हमें चाहिए कि देश के आमनागरिक होने के नाते हम अपने प्रधानमंत्री को इस रास्‍ते पर चलने के लिए और अधिक प्रोत्‍साहित करें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थ‍िक मोर्चे पर कही सभी तार्किक बातों को समझकर यदि हम सभी व्‍यवहार करेंगे तो निश्‍च‍ित मानिए वह दिन भी अतिशीघ्र आएंगे जब देश विकासशील की श्रेणी से मुक्‍त होकर विकसित की श्रेणी में आ जाएगा।

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