लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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Dyslexia                                    वाक विकार (Dyslexia) एक प्रकार की सीखने की कठिनाई है, जिसमे ध्वनि को समझना फिर उसका  कूटानुवाद  (decoding) कर पाना,  शीघ्र प्रसंस्करण  (processing)   कर पाना कठिन होता है। अतः भाषा समझने में , नामों को दोहराने में अधिक समय लगता है।  वाक विकार भाषा को पढ़ने लिखने, वर्तनी (spelling ) सीखने में मुश्किल होती हैं।  बोलने और फिर लिखने की क्षमता का विकास बहुत धीरे धीरे और मुश्किल से होता है।

वाक विकार के कारण पढ़ने लिखने में जो समस्यायें होती हैं उनका संबध दृष्टि दोष  (hearing vision) या श्रुतिदोष   (poor hearing)  से नहीं होता।   बोध (cognitive) दृष्टि से वाकविकार के मुख्य तीन प्रकार होते हैं श्रवण संबधी (auditory),दृष्टिंसं बधी (visual) और ध्यान संबधी  (attention)। बच्चों में ये जो भी कमियाँ पाई जाती हैं जीवन भर साथ रहती हैं, परन्तु उचित प्रशिक्षण से इन समस्याओं पर क़ाबू   पाकर बहुत कुछ सिखाया जा सकता है। किसी भी अन्य विकार की तरह यह भी मामूली तीव्र या अति तीव्र हो सकता है। अच्छी  तरह पढ़ाने पर भी ये बच्चे ठीक से सीख नहीं पाते, क्योंकि मस्तिष्क सूचनाओं को सही तरह से ग्रहण नहीं कर पाता। इसका कारण ना तो मन्दबुद्धि होना होता है, ना कान आँख की ख़राबी, ना ही मस्तिष्क पर कोई चोट लगने का असर।

वाक विकार के हर मामले को व्यक्तिगत स्तर पर अलग अलग समझना पड़ता है, पर यह मूल रूप से स्नायु संबधित  भाषा सीखने की कठिनाई है, कभी कभी गणित सीखने मे भी दिक़कत होती है। भाषा को, ध्वनि को, ग्रहण कर पाने में मुशकिल होती है। भाषा ग्रहण करने के साथ अभिव्यक्त करने में भी दिक्कत होती है। आवाज़ को समझना भी कठिन हो सकता है। वयस्क वाकविकार से ग्रस्त लोग पढ लिख और समझ लेते हैं पर आम आदमियों से थोड़ा धीरे धीरे।  वाक विकार और बुद्धि का कोई सीधा संबध नहीं है।

वाक विकार से ग्रस्त बच्चा जब अन्य बच्चों की तरह पढ़ना लिखना नहीं सीख पाता तो वो कुँठाग्रस्त होने लगता है। शिक्षक और माता पिता कभी उसे आलसी या कभी मन्दबुद्धि समझ लेते हैं तो वह और चिंताग्रस्त और दुखी हो जाता है। दूसरे बच्चे भी उसकी तकलीफ़ न समझकर मज़ाक उडाने लगते हैं तो वह अवसादग्रस्त [depressed] भी हो सकता है।

वाक विकार के लक्षणों को संक्षेप में –

  1. पढने में दिक़्कत
  2. कमजोर वर्तनी (spelling)
  3. विचारों को संगठित (organize) करके लिखने में दिक्कत
  4. कमज़ोर व्याकरण
  5. अत्यन्त ख़राब लिखावट
  6. कमजोर याददाश्त
  7. छोट बड़े शब्दों को बोलने में दिक्कत
  8. कमज़ोर शब्दावली
  9. पढ़े हुए को समझन में दिक्कत
  10. बच्चे का  देर  से बोलना शुरू करना
  11. उच्चारण दोष
  12. गणित सीखने में भी दिक्कत

13   .6 और 9 कोया d, b मे अन्तर कर पाना मुश्किल

14. अक्षरों को उलटा पढ़ना या लिखना (शीशे मे प्रतिबिम्ब)

वाकविकार होने का यह अर्थ कभी नहीं होता व्यक्ति बेवकूफ़ है, कुछ कर नहीं सकता। इस दोष से ग्रस्त लोग  विभिन्न क्षेत्रों में बहुत होनहार निकले हैं। अविष्कारकर्ता थौमस ऐडिसन, अभिनेत्री हूपीगोल्डबर्ग, फिल्म निर्माता   वाल्ट डिज़नी  ,बेसबाल खिलाडी नोलन रायन और भारतीय अभिनेता अभिषेक बच्चन वाक विकार से जूझ कर जीवन मे सफल हुए हैं।

वाक विकार के लक्षण दिखने पर किसी मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक को दिखायें, सही निदान के लियें कुछ परीक्षण भी करवाये जा सकते हैं। एक बार यदि निदान हो जाय तो बच्चे का हौसला बढ़ाना चहिये । स्थानीय मनोवैज्ञानिक द्वारा निकटतम संस्थान जहाँ वाक विकार से ग्रस्त बच्चों के प्रशिक्षण की व्यवस्था हो सूचना प्राप्त की जा सकती है।  वाक विकार का कोई इलाज न होते हुए भी बहुत से संस्थान और प्रशिक्षित शिक्षक इन बच्चों को पढ़ना लिखना  सिखा देते हैं जिनसे बहुत लाभ हो सकता है।इन संस्थानो की विस्तृत जानकारी इंटरनैट पर आसानी से मिल सकती है। किसी अच्छे संस्थान को चुनकर प्रशिक्षण  दिलवाना चाहिये। धीरे धीरे माता पिता भी इन प्रशिक्षण की तकनीकों को सीख कर घर मे अभ्यास करा सकते हैं।

 

2 Responses to “वाक विकार (Dyslexia)”

  1. vijay nikore

    अच्छी जानकारी दी है। धन्यवाद।
    विजय निकोर

    Reply

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