लेखक परिचय

पंडित दयानंद शास्त्री

पंडित दयानंद शास्त्री

ज्योतिष-वास्तु सलाहकार, राष्ट्रीय महासचिव-भगवान परशुराम राष्ट्रीय पंडित परिषद्, मोब. 09669290067 मध्य प्रदेश

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प्रिय पाठकों, हमारे जीवन मे दिशाओ का बहुत महत्व है। हमारे जीवन मे अनेक कष्ट एवं कठिनाइयाँ केवल दिशाओं के गलत उपयोग के कारण ही आती है। आप अपनी दिशाएं बदल के अपने जीवन मे सुख शांति ला सकते हैं।

वास्तु का भी हमारे जीवन में विशेष प्रभाव रहता है.मानसिक हालत कमजोर होने की स्थिति में हम डिप्रेशन या अवसाद का शिकार हो जाते हैं। ऐसा होने पर व्यक्ति के विचारों, व्यवहार, भावनाओं और दूसरी गतिविधियों पर असर पड़ता है। डिप्रेशन से प्रभावित व्यक्ति अक्सर उदास रहने लगता है, उसे बात-बात पर गुस्सा आता है, भूख कम लगती है, नींद कम आती है और किसी भी काम में उसका मन नहीं लगता। लंबे समय तक ये हालत बने रहने पर व्यक्ति मोटापे का शिकार बन जाता है, उसकी ऊर्जा में कमी आने लगती है, दर्द के एहसास के साथ उसे पाचन से जुड़ी शिकायतें होने लगती हैं। कहने का मतलब यह है कि डिप्रेशन केवल एक मन की बीमारी नहीं है, यह हमारे शरीर को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। डिप्रेशन के शिकार किसी व्यक्ति में इनमें से कुछ कम लक्षण पाए जाते हैं और किसी में ज्यादा।

आमतौर पर शरीर में बीमारी होने पर हम उसके बायोलॉजिकल, मनोवैज्ञानकि या सामाजिक कारणों पर जाते हैं। यहां पर आज हम बीमारियों के उस पहलू पर गौर करेंगे, जो हमारे घर के वास्तु से जुड़ा है। कई बीमारियों की वजह घर में वास्तु के नियमों की अनदेखी भी हो सकती है। अगर आप इन नियमों को जान लेंगे और उनका पालन करना शुरू करेंगे तो आपको इन बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है।

वास्तु शास्त्र अध्ययन से एक बात सामने आई है की जो लोग अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं में सफल रहे हैं उन सभी में एक बात आम है – उनके घर अथवा ऑफिस जाने या अनजाने में वास्तु शास्त्र के मौलिक सिद्धांतों का पालन करते हैं । एक निर्मित भवन के भीतर जिस भी स्थान में वास्तु दोष पाया गया है, निवासियों को जीवन के उसी पहलू में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है जिससे की वह स्थान जुड़ा हुआ है ।

वास्तु में केवल घर के सुख समृद्धि हेतु ही उपाय नहीं बताये जाते बल्कि इसमें आपकी सेहत से जुड़े हुए भी कुछ उपाय दिए गये हैं. जिन पर ध्यान देकर अप अपने जीवन को सुखी और स्वस्थ बना सकते हैं. अच्छा स्वास्थ्य हर व्यक्ति के जीवन का आधार होता हैं. क्योंकि यदि व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं रहेगा तो उसके पास बेशक कितने ही सुख – साधन क्यों न हो. उनका आनंद वह नहीं उठा पाएगा. क्योंकि जब व्यक्ति का शरीर स्वस्थ रहता हैं तभी उसका मन प्रसन्न रहता हैं और वह अपने आस – पास होने वाली गतिविधियों में शामिल हो पाता हैं या अपने आस – पास उपस्थित साधनों का प्रयोग कर पाता हैं |

आज के समय में यदि कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं हैं तो हम उस व्यक्ति के बीमार होने के मनोवैज्ञानिक, बॉयोलोजिकल और सामाजिक कारणों को जाने की कोशिश करते हैं. लेकिन हम वास्तु के अनुसार होने वाली बिमारियों की तरफ ध्यान नहीं देते. अक्सर हम अनजाने में ही कुछ वास्तु नियमों को नजरंदाज कर देते हैं. जिसकी वजह से ही हमारी तबियत ख़राब हो जाती हैं. तो चलिए जानते हैं कि ऐसे कौन से कारण हैं, जिनकी वजह से व्यक्ति बीमार हो सकता हैं और उन कारणों का ध्यान रखकर एक सुखी और स्वस्थ जीवन जीने के योग्य बन सकता हैं |

वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री से जानिए कुछ महत्वपूर्ण वास्तु सिद्धांत—

—सोने की सही दिशा (Sleeping Direction) – अच्छा स्वास्थ्य काफी कुछ हमारे सोने की अवस्था पर भी निर्भर करता हैं. जैसे यदि आप अपना सिर दक्षिण दिशा की ओर करके सोते हैं तो आपका स्वास्थ्य हमेशा ठीक रहेगा. इसके अलावा यदि आपको पित्त की शिकायत हैं तो आप अपने दाहिने हाथ की ओर करवट लेकर सो सकते हैं तथा यदि आपको कफ की शिकायत हैं. तो वास्तुशास्त्र के अनुरूप आपको बाई और करवट लेकर सोना चाहिए |
—-पलंग (Bed) – वास्तुशास्त्र में यह मान्यता हैं कि हमेशा पलंग की लम्बाई सोने वाले व्यक्तियों की लम्बाई से अधिक होनी चाहिए. इसके साथ ही पलंग पर छोटा या बड़ा कैसा भी दर्पण नहीं लगा होना चाहिए. क्योंकि यदि दर्पण लगा होगा और सोने से पहले आप उसमें अपना प्रतिबिम्ब देखते हैं तो इससे आपकी सेहत को नुकसान पहुँचता हैं और आपकी आयु भी कम होती हैं.
—-दर्पण (Mirror) – कभी भी दर्पण को अपने कमरे के ऐसे स्थान पर न लगायें जहाँ से आपको अपना प्रतिबिम्ब लेटी हुई अवस्था में दिखाई दें. इसके सतह ही बेड को कभी भी दीवार के कोने से सटाकर बिल्कुल न रखें. क्योंकि इसका असर भी आपकी सेहत पर पड़ता हैं.
—बीम (Beem) – घर बनवाते समय बीम को भी घर के बीचों बीच न बनवाएं. क्योंकि इससे दिमाग से सम्बन्धित परेशानियाँ उत्पन्न हो सकती हैं.
— अग्नि (Fire) – वास्तुशास्त्र के अंतर्गत घर में बिमारियों के पैदा होने का सबसे बड़ा कारण हैं घर में अग्नि का गलत दिशा में का प्रयोग होना. यदि आप दक्षिण मुखी घर में रहते हैं तो कभी – भी अपने घर की दक्षिण दिशा में आग न जलाएं.
—-फर्नीचर (Furniture) – अक्सर लोग अपने घरों में फर्नीचर ड्राइंग रूम के बीच में रखते हैं लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के बीच में फर्नीचर नहीं रखने चाहिए. घर के बीच का स्थान ब्रहमस्थल होता हैं. इस स्थान में किसी तरह के पत्थर का या कंकरीट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए तथा प्रयास करना चाहिए कि यह स्थाम अधिकतर खाली ही रहे. क्योंकि इससे घर के सदस्यों की तबियत अधिकतर समय ख़राब रहती हैं.
—-सीढियाँ (Stairs) – यदि आप घर बना रहे हैं तो अपने घर की सीढियों को घर के कोने में बनवाएं. क्योंकि जो व्यक्ति अपने घर में सीढियाँ बिल्कुल घर के बीच में बनवाते हैं. उनकी तबियत अधिकतर ख़राब रहती हैं.
—-मुख्य द्वार और रसोई (Mein Gate and Kitchen) – यदि आपके घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने रसोई घर हैं. जिससे की आपके घर के सामने से आने जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को आपका घर दिखाई देता हैं. तो वास्तु के अनुरूप इससे घर की मुख्य महिला के द्वारा बनाये गये भोजन में स्वाद नहीं आता तथा उसकी तबियत अधिकतर समय खराब रहती हैं |इसके यदि आपके घर की रसोई बड़ी हैं तो आप अपना भोजन रसोईघर में ही बैठ कर करें. इससे यदि आपके घर के किसी सदस्य की कुंडली में राहु के दुष्ट प्रभाव हैं तो उस व्यक्ति की कुंडली में से ये प्रभाव नष्ट हो जायेंगे |
——उत्तर–पूर्व में शौचालय : वास्तु -शास्त्र के प्राचीन ग्रंथों के अनुसार भवन का उत्तर पूर्वी कोना ईशान कोने के नाम से जाना जाता है । शास्त्रों के अनुसार ईशान भगवान शिव का नाम है । अतः यह कोना वास्तव में एक प्रार्थना घर अथवा ध्यान कक्ष बनाने के लिए आदर्श स्थान है । यहाँ शौचालय रखने से इस क्षेत्र की दिव्य ऊर्जा पूर्ण रूप से प्रभावित होती है एवं क्षीण हो जाती है जिसके कारणवश गंभीर एवं दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्यायएं, विशेष रूप से मस्तिष्क प्रणाली से सम्बंधित, उत्पन्न होती हैं । वैज्ञानिक दृष्टि से पृथ्वी की भू-चुम्बकीय ऊर्जा का प्रवाह उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर होता है । अतः यहाँ शौचालय बनाने से इन ऊर्जाओं का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो जाता है । यह पाया गया है की घर का कोई एक अथवा प्रतेयक सदस्य लंबे समय तक बीमार रहता है तथा कोई भी दवाईयां उन्हें पूर्ण रूप से ठीक करने में सक्षम नहीं रहती । जिस प्रकार इस शौचालय में फ्लश किया जाता है , उसी प्रकार ज्ञान एवं रचनात्मकता भी फ्लश हो जाती है । निवासी स्पष्ट रूप से सोच नहीं पाते और जल्दबाज़ी में निर्णय लेते है जिनके कारण उन्हें जीवन के सभी पहलुओं में नुक्सान भुगतना पड़ता है । बच्चों में एकाग्रता की कमी आती है जिसके कारण वह परीक्षा में अच्छे अंक लाने में असफल होते हैं ।
—-यदि किसी रोगी व्यक्ति को अगर पूर्व दिशा की ओर मुख करके भोजन दिया जाए तो वो जल्दी स्वस्थ हो सकता है दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से यश की प्राप्ति होती है। पर अगर आपके माता पिता जीवित है तो आपको दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन नही करना चाहिये। इनके लिये पूर्व या पश्चिमी दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
—-अगर आपकी आर्थिक स्थिति चिताँजनक है तो पश्चिम दिशा की ओर मुख करके भोजन करे इससे आर्थिक स्थिति मे सुधार आता है ।इस तरह दिशाओ मे बदलाव लाकर अपने जीवन मे सुधार ला सकते है।

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