कोरोना महामारी के बीच अम्फान का तूफानी खतरा

योगेश कुमार गोयल

            कोरोना महामारी के कहर के बीच भारत में एक महातूफान भी भीषण कहर बरपाने आ चुका है। करीब 21 वर्ष लंबे अंतराल के बाद किसी सुपर साइक्लोन (चक्रवाती तूफान) ने भारत में दस्तक दी है, जिससे निपटने के लिए सेना तथा वायुसेना को पूरी तरह अलर्ट किया जा चुका है और जानमाल के बड़े नुकसान को रोकने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की भी 53 टीमें तैनात की गई हैं। खतरा कितना बड़ा है, यह इसी से समझा जा सकता है कि एयरफोर्स के सी-131 विमानों को भी तैयार रहने को कहा गया है। इस भयानक तूफान का नाम है ‘अम्फान’, जिससे पश्चिम बंगाल तथा उड़ीसा में भारी तबाही की आशंका जताई जा रही है। माना जा रहा है कि अम्फान वर्ष 2014 में आए ‘हुदहुद’ तूफान से भी ज्यादा भयावह और विध्वंसक हो सकता है। उल्लेखनीय है कि छह साल पहले आए हुदहुद तूफान ने तटीय राज्यों पश्चिम बंगाल तथा उड़ीसा के अलावा उत्तर प्रदेश सहित कई मैदानी राज्यों में भी भयानक तबाही मचाई थी। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान ‘अम्फान’ के सुपर साइक्लोन में तब्दील हो जाने के बाद अब पश्चिम बंगाल के दीघा और बांग्ला देश के हटिया द्वीप के पास टकराने से भयंकर तबाही हो सकती है। तूफान से पश्चिम बंगाल में पूर्वी मिदनापुर, दक्षिण और उत्तर 24 परगना, हावड़ा, हुगली तथा कोलकाता जबकि तटीय उड़ीसा में जगतसिंहपुर, केन्द्रपाड़ा, जाजपुर, बालासोर, भद्रक, क्योंझर, खोरधा, पुरी तथा मयूरभंज जिले ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।

            अम्फान सुपर साइक्लोन को वर्ष 1999 में उड़ीसा के तट पर आए प्रचण्ड चक्रवातीय तूफान के बाद उसी श्रेणी का दूसरा तूफान बताया जा रहा है। 1999 में आए बेहद जानलेवा चक्रवाती तूफान ने 9 हजार से भी ज्यादा लोगों की जान ले ली थी। किसी भी तूफान की श्रेणी हवा की गति के आधार पर ही तय की जाती है। तूफान की श्रेणी हवा की गति बढ़ने के आधार पर 1 से 5 की स्केल पर चली जाती है। जब हवा 63 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक रफ्तार से चलती है तो उसे ट्रॉपिकल तूफान कहा जाता है। हवा की गति 119 किलोमीटर प्रति घंटा से भी अधिक होने पर उसे ‘ट्रापिकल साइक्लोन’ कहते हैं। किसी चक्रवाती तूफान की रफ्तार प्रायः 62 से 88 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है लेकिन तूफान की रफ्तार 221 किलेमीटर प्रतिघंटा से भी ज्यादा होने पर उसे सुपर साइक्लोन कहा जाता है। चक्रवाती तूफानों का सिलसिला प्रायः मौसम में गर्मी की शुरूआत से ही शुरू हो जाता है। सूर्य की गर्मी जब समुद्र में भूमध्य रेखा के पास बढ़ती है तो समुद्र का पानी 27 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गर्म हो जाता है, जिससे भाप बनती है और गर्म हवा तेजी से ऊपर उठती है। जब गर्म हवा ऊपर की ओर उठती है तो ऊपर की नमी वाष्प के साथ मिलकर बादल बनाती है और वहां कम वायु दाब का क्षेत्र बन जाता है। गर्म हवा ऊपर उठने पर नीचे की खाली जगह भरने के लिए ठंडी हवा तेजी से आ जाती है और इस प्रकार हवा चक्कर काटने लगती है तथा नमी से भरे बादल भी घूमने लगते हैं, जिससे समुद्री तूफान पैदा होता है। तूफान की तीव्रता गर्मी और नमी की अधिकता पर निर्भर करती है।

            अम्फान से पश्चिम बंगाल तथा उड़ीसा के तटीय जिलों में भारी से अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका है। तूफान के दस्तक देने के दौरान समुद्र से चार से छह मीटर ऊंची तूफानी लहरें उठने के कारण दक्षिण और उत्तर 24 परगना जिलों के निचले इलाके जलमग्न हो सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि जब तूफान स्थल भाग में प्रवेश करेगा तो समुद्र की लहरें 20 फुट की ऊंचाई तक उठ सकती हैं। एनडीआरएफ के महानिदेशक एस एन प्रधान का कहना है कि ‘अम्फान’ को हल्के में नहीं लिया जा रहा है क्योंकि ऐसा दूसरी बार हो रहा है, जब भारत बंगाल की खाड़ी में आए प्रचंड चक्रवातीय तूफान का सामना कर रहा है। उनके मुताबिक यह अत्यधिक प्रचण्ड चक्रवातीय तूफान होगा, जो तट पर आने के दौरान ‘महाचक्रवात’ से केवल एक श्रेणी नीचे होगा। इस भयानक तूफान से कच्चे मकान, मकानों की कच्ची छतों, नारियल के पेड़ों, टेलीफोन तथा बिजली के खंभों को गंभीर क्षति पहुंच सकती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक एम. महापात्रा के अनुसार ‘अम्फान’ के तट से टकराने के दौरान हवा की गति 195 से 200 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है और यह आबादी वाले इलाके को काफी ज्यादा प्रभावित करेगा। उनका कहना है कि चक्रवाती तूफान अम्फान बहुत प्रचण्ड है, जो बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचा सकता है। बंगाल की खाड़ी में तूफान के कारण 230 से 265 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

            पश्चिम बंगाल तथा उड़ीसा में आने वाले चक्रवाती तूफान को ‘अम्फान’ नाम थाईलैंड द्वारा दिया गया है, जहां इसे ‘उम-पुन’ कहते हैं। चक्रवातों को कोई नाम देने का सिलसिला विश्व मौसम संगठन द्वारा वर्ष 1953 में शुरू किया गया था। अमेरिका में चक्रवाती तूफानों के लिए प्रतिवर्ष 21 नामों की सूची तैयार की जाती है और प्रत्येक नाम क्यू, यू, एक्स, वाई, जैड को छोड़कर अंग्रेजी वर्णमाला के हर अक्षर से रखा जाता है। यदि वहां एक वर्ष में 21 से ज्यादा तूफान आते हैं तो बाकी नामों में अल्फा, बीटा, गामा इत्यादि ग्रीक वर्णमाला का उपयोग किया जाता है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा चक्रवातों को महिलाओं का नाम देना शुरू किया गया था लेकिन वर्ष 1978 से आधे चक्रवातों के नाम पुरूषों के नाम पर भी रखे जाने लगे। वहां तूफानों का नाम तय करने में अब ‘ऑड-ईवन’ फार्मूले को अपनाया जाता है। विषम वर्ष में आने वाले तूफानों के नाम महिलाओं पर जबकि सम वर्ष में आने वाले तूफानों के नाम पुरूषों के नामों पर होते हैं।

            भयंकर तूफानों का नामकरण किए जाने के पीछे भी अहम कारण हैं। दरअसल किसी भी तूफान को नाम इसलिए दिया जाता है ताकि तूफान का कोई नाम होने से लोगों को उसकी भयावहता को लेकर समय रहते चेतावनी दी जा सके और प्रभावित होने वाले क्षेत्र में लोग उसे गंभीरता से ले सकें। नामकरण के बाद ऐसे तूफानों से निपटने के लिए तैयारी करने में भी मदद मिलती है। किसी भी तूफान का कोई नाम रखते समय यह ध्यान रखा जाता है कि वह नाम सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील न हों और उसका अर्थ भी भड़काऊ नहीं हो।

            बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर में आने वाले समुद्री तूफानों के नाम रखने का सिलसिला करीब सोलह वर्ष पूर्व वर्ष 2004 में शुरू हुआ था। इन क्षेत्रों में तूफानों को नाम देने के लिए आठ देशों (बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड) की एक सूची बनाई गई, जिनके द्वारा क्रमवार आठ-आठ नाम दिए गए। भारत द्वारा तूफानों के नामों की इस सूची के लिए अग्नि, आकाश, बिजली, जल, लहर, मेघ, सागर तथा वायु नाम दिए गए थे। जब जिस देश का नंबर आता है, उस देश की सूची में दिए गए नाम के आधार पर उस तूफान का नामकरण किया जाता है। इस प्रकार तूफानों के कुल 64 नाम तय किए गए और अब थाईलैंड द्वारा चक्रवात को दिया गया अम्फान नाम 64 तूफानों के नामों की इस सूची में अंतिम नाम है। बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर में आने वाले तूफानों को नाम देने की शुरूआत के समय अंग्रेजी वर्णमाला के हिसाब से तूफान के नामकरण का पहला अवसर बांग्लादेश को मिला था, जिसने पहले तूफान को ‘ओनिल’ नाम दिया था। उसके बाद जितने भी तूफान आए, उनके नाम क्रमानुसार ही तय किए गए। अम्फान के साथ अब ये 64 नाम समाप्त हो गए हैं और इन्हें अब फिर से नए सिरे से शुरू किया जाएगा।

            बहरहाल, केरल, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, गुजरात, महाराष्ट्र इत्यादि भारत के तटवर्ती राज्य ऐसे चक्रवाती तूफानों से प्रभावित होते रहे हैं। इस तरह के सुपर साइक्लोन अपने पीछे केवल बर्बादी ही बर्बादी छोड़ जाते हैं। अम्फान चक्रवाती तूफान को लेकर भी अनुमान लगाया जा रहा है कि तट पर आने के दौरान इसका प्रभाव ‘फोनी’ चक्रवात जैसा ही होगा। एक वर्ष पहले मई 2019 में आए फोनी तूफान से उड़ीसा तथा आंध्र प्रदेश के तटवर्ती क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए थे। भीषण तबाही मचाकर गुजर जाने वाले ऐसे तूफानों के बाद भी तूफान प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को लंबे समय तक अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अम्फान के कहर से निपटने के लिए की गई तमाम तैयारियों के बाद भी तबाही होनी तो तय है ही, इसलिए जरूरी है कि अम्फान के गुजर जाने के बाद लोगों को भावी मुसीबतों से निजात दिलाने के लिए राजनीतिक बयानबाजियों से परे हटकर युद्धस्तर पर कार्य किए जाएं।

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