लेखक परिचय

सिद्धार्थ शंकर गौतम

सिद्धार्थ शंकर गौतम

ललितपुर(उत्तरप्रदेश) में जन्‍मे सिद्धार्थजी ने स्कूली शिक्षा जामनगर (गुजरात) से प्राप्त की, ज़िन्दगी क्या है इसे पुणे (महाराष्ट्र) में जाना और जीना इंदौर/उज्जैन (मध्यप्रदेश) में सीखा। पढ़ाई-लिखाई से उन्‍हें छुटकारा मिला तो घुमक्कड़ी जीवन व्यतीत कर भारत को करीब से देखा। वर्तमान में उनका केन्‍द्र भोपाल (मध्यप्रदेश) है। पेशे से पत्रकार हैं, सो अपने आसपास जो भी घटित महसूसते हैं उसे कागज़ की कतरनों पर लेखन के माध्यम से उड़ेल देते हैं। राजनीति पसंदीदा विषय है किन्तु जब समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भान होता है तो सामाजिक विषयों पर भी जमकर लिखते हैं। वर्तमान में दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, हरिभूमि, पत्रिका, नवभारत, राज एक्सप्रेस, प्रदेश टुडे, राष्ट्रीय सहारा, जनसंदेश टाइम्स, डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट, सन्मार्ग, दैनिक दबंग दुनिया, स्वदेश, आचरण (सभी समाचार पत्र), हमसमवेत, एक्सप्रेस न्यूज़ (हिंदी भाषी न्यूज़ एजेंसी) सहित कई वेबसाइटों के लिए लेखन कार्य कर रहे हैं और आज भी उन्‍हें अपनी लेखनी में धार का इंतज़ार है।

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 सिद्धार्थ शंकर गौतम

९० के दशक में रुपहले परदे पर जीवंत अदाकारी कर महिला वर्ग को अपना ख़ास प्रशंसक बनाने वाले शाहरुख़ लगता है सेल्लूलाईड की चमक को पचा नहीं पा रहे हैं तभी मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में देख लूँगा, गाड़ दूंगा, जो उखाड़ना है उखाड़ लो जैसे ओछे वाक्यों का प्रयोग कर वे मीडिया सहित तमाम बड़े आलोचकों के सीधे निशाने पर आ गए हैं| अपनी ख़ास संवाद अदायगी की वजह से जो शाहरुख लोगों को अपना दीवाना बनाए हुए थे; अब इस ख़ास तरह की संवाद अदायगी से वे उन्हीं दीवानों का दिल तोड़ रहे हैं| कभी सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान तो कभी अपनी आईपीएल टीम के सदस्यों से नोक-झोंक; कभी सलमान से अदावत तो कभी पारिवारिक मित्र शिरीष कुंदर की सार्वजनिक पिटाई; शाहरुख़ को लेकर विवादों में नित इजाफा होता जा रहा है| दिल वालों की दिल्ली के शाहरुख़ के पास मानों दिल बचा ही नहीं है तभी उनके चरित्र का स्याह पक्ष कुछ ज्यादा ही उजागर हो रहा है| बॉलीवुड का बादशाह विवादों के बादशाह के रूप में तब्दील होता जा रहा है| आखिर क्यूँ? क्या कारण है कि शाहरुख़ को लेकर बीते कुछ समय से नकारात्मक ख़बरों का बाज़ार गर्म है? क्या सफलता का नशा शाहरुख़ पर कुछ ज्यादा ही हावी हो गया है या वे अब अपने सामने किसी को कुछ समझते ही नहीं हैं?

दरअसल शाहरुख ने इस गगनचुम्बी सफलता तक पहुँचने के लिए कड़ा संघर्ष किया है और एक बार जो व्यक्ति कड़े संघर्ष के बाद सफलता महसूस करता है वह इसे खोना नहीं चाहता| यह व्यक्ति का स्वभाव ही है| बस अंतर इतना है कि कोई इस सफलता को पचा कर महानायक बन जाता है तो कोई खलनायक| शाहरुख़ में अहंकारात्मक वृत्ति की अधिकता है जिसे कई लोगों ने महसूस किया होगा| वे स्वयं के आगे सभी को तुच्छ मानते हैं| बस यही अहंकार उनकी जीवन-शैली में भी घर कर गया है जो उन्हें विवादित व्यक्तित्व में तब्दील करता जा रहा है| बुधवार रात हुआ विवाद भी इसी अहंकार का नतीजा था| चूँकि उनकी टीम कोलकाता नाईट राईडर्स पिछले चार आईपीएल में कुछ ख़ास कमाल नहीं दिखा पाई थी और इस आईपीएल सीजन में टीम का सामुहिक प्रयास उसे सफलता दिलवा रहा है; लिहाजा शाहरुख़ के अंदर की कुंठा बाहर निकलने लगी है| पिछले चार आईपीएल में टीम भले ही फ्लॉप रही हो किन्तु ठीकरा शाहरुख़ के सर फोड़ा गया| फिर उनकी गाढ़ी कमाई का जो नुकसान हुआ वह अलग| किन्तु आईपीएल की मजबूत टीम मुंबई इंडियंस को हारने के बाद टीम के मालिक शाहरुख़ की हार की कुंठा जीत के अहंकार में बदल गई और वे भावनाओं की अतिरेकता में बह गए जिसका नतीजा है ताज़ा विवाद|

इतिहास गवाह है कि जिसने भी सफलता को सर माथे बिठाया है वही पतन के गर्त में गिरा है| खासकर अहंकारी व्यक्ति का अहंकार उसके नाम और काम; दोनों को लील गया है| ऐसे लोगों के पास मात्र सुनहरे अतीत की यादें होती हैं; वर्तमान उन्हें हमेशा बिसराता रहा है| चाहे फिर वो दक्षिण भारतीय अभिनेत्री सिल्क हों या फिल्म इंडस्ट्री के प्रथम सुपरस्टार राजेश खन्ना “काका”| अपने सफलतम जीवनकाल में इन्होंने बहुत नाम कमाया किन्तु हठधर्मी स्वभाव तथा स्वयं को श्रेठ मानने की आदत ने इन्हें समय से पहले ही जनता से दूर कर दिया| कुछ यही गलती वर्तमान में शाहरुख़ कर रहे हैं| शाहरुख़ को यह समझना चाहिए कि वे जिस जनता की ताकत पर बादशाह बने हैं, उनका अमर्यादित आचरण उन्हें उसी जनता की नज़रों में खलनायक बनाता जा रहा है| फिर यह आर्थिक एवं पब्लिसिटी का दौर हैं| यहाँ आपकी एक भी भूल आपको जीवन भर पछतावा करवाने हेतु काफी है| अन्य फिल्म सितारों मसलन अमिताभ बच्चन, आमिर खान और भी कई जिन्होंने अपने नाम के साथ कभी समझौता नहीं किया आज सार्वजनिक जीवन में लोगों के आदर्श बन गए हैं| उनका संघर्ष आम लोगों के संघर्ष को प्रेरणा देता है| किन्तु शाहरुख़ का संघर्ष यह सीख देता है कि सफलता को कभी खुद पर हावी न होने दो|

लोकप्रियता का पैमाना यूँ तो काफी बड़ा होता है किन्तु जब लोकप्रियता गिरावट की ओर अग्रसर होती है तो बड़ी-बड़ी हस्तियों का नाम जेहन से मिट जाता है| वैसे भी वर्तमान में शाहरुख़ की कई फिल्में बॉक्स आफिस पर धडाम हो चुकी हैं और उनके सभी दोस्त एक-एक कर उनसे छिटकते जा रहे हैं| हालिया विवाद से शाहरुख़ को ५ वर्षों के लिए वानखेड़े स्टेडियम में प्रवेश से वंचित कर दिया गया है| यह निश्चित तौर पर शाहरुख़ जैसे नामी ब्रांड के लिए शर्मनाक है| अमेरिका में अपमानजनक तलाशी पर देश में हो-हल्ला मचाने वाले शाहरुख़ अब अपनी बत्तमीजी पर चुप क्यूँ हैं? यह तो ऐसा ही है कि अपने घर में सभी शेर होते हैं| बीते सालों को देखें तो कहा जा सकता है कि शाहरुख़ का बुरा वक्त चल रहा है लिहाजा उन्हें आत्म-मंथन करने की आवश्यकता है ताकि उनकी जिस छवि को संघर्ष की प्रतिमूर्ति कहा जाता था कहीं उसे दाग न लग जाए| शाहरुख़ खुद अपने लिए लोगों के दिलों में नफरत पैदा कर रहे हैं जिसका खामियाजा उन्हें जल्दी ही भुगतना पड़ेगा|

One Response to “सफलता के नशे में चूर शाहरुख़ अहंकारी हो गए हैं”

  1. iqbalhindustani

    shahrukh hero ki sirf acting hi krte हैं वे असली जिंदगी में आम आदमी हैं, ये बार कई बार साबित हो चुकी है.

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