सफलता की कहानी कमाल दिखा रही कमला, हरित क्रान्ति के नवाचारों से निहाल हुई प्रगतिशील महिला काश्तकार, उन्नत खेती-बाड़ी से समृद्ध हुए खलिहान, घर-आँगन में पसरी खुशहाली

– डॉ. दीपक आचार्य,

सहायक निदेशक (सूचना एवं जनसम्पर्क)

चित्तौड़गढ़

किसानों की माली हालत सुधारने, कृषि एवं उद्यानिकी के माध्यम से कृषकों की आय बढ़ाकर उनकी तथा घर-परिवार एवं क्षेत्र की खुशहाली में विस्तार और खेत-खलिहानों को समृद्ध बनाकर सामाजिक एवं आर्थिक विकास की दर में लगातार अभिवृद्धि के लिए सरकार विभिन्न स्तरों पर भरसक प्रयासों में जुटी हुई है।

किसानों के कल्याण तथा कृषि क्षेत्र के व्यापक विकास एवं विस्तार की दिशा में सरकार की विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों और नवाचारों का प्रदेश भर में बेहतर क्रियान्वयन हो रहा है। किसान भी अब समय की रफ्तार और मौजूदा युग की आवश्यकताओं के मद्देनज़र परंपरागत फसलों के साथ ही नकदी फसलों और फल-सब्जियों की खेती करने में रुचि ले रहे हैं।

इन्हीं का परिणाम है कि हरित क्रान्ति से जुड़ी गतिविधियों का सार्थक प्रतिफल सामने आ रहा है। चित्तौड़गढ़ जिले में भी कृषि एवं उद्यानिकी विभागीय योजनाओं का सूत्रपात रंग ला रहा है और किसानों की मेहनत का अच्छा फल मिलने लगा है।

कृषि एवं उद्यानिकी विभागों तथा कृषि विज्ञान केन्द्र के विशेषज्ञों एवं अधिकारियों की राय के अनुसार खेती-बाड़ी को नई दिशा प्रदान करने वाले किसानों ने अपनी पहल और मेहनत के बूते समृद्धि के द्वार खोले हैं और प्रगतिशील काश्तकार के रूप में क्षेत्र में अच्छी-खासी पहचान भी बनाई है।

अनुभवों का खजाना समेटे है 61 वर्षीया यह काश्तकार

इन्हीं में एक हैं प्रगतिशील श्रीमती कमला धाकड़। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित यह काश्तकार बेगूं पंचायत समिति अन्तर्गत मेघपुरा पंचायत के बन्दे का राजपुरा गांव की हैं। निरक्षर किन्तु खेती-बाड़ी के मामले में लम्बा अनुभव रखने वाली इकसठ वर्षीया कमला के पास है तो मात्र एक हैक्टेयर सिंचित कृषि भूमि, लेकिन इसका उन्होंने बेहतर उपयोग करने की ठानी और आज अपने खेतों से खुशहाली का दोहन कर खुश हैं।

जो सोचावह कर दिखाया

कमला बताती हैं कि परंपरागत खेती के साथ ही उसने खेतों के अधिक से अधिक उपयोग तथा आमदनी में कई गुना बढ़ोतरी के बारे में सोचा तथा इस बारे में वह कृषि विभाग के अधिकारियों व कार्मिकों से करीब एक दशक से सम्पर्क में है। इस दौरान विभागीय अधिकारियों एवं कृषि वैज्ञानिकों ने उसकी कई सारी जिज्ञासाओं का समाधन करते हुए उसे कृषि क्षेत्र के नवाचारों की ओर मोड़ा तथा सरकार की योजनाओं से भी जोड़ा।

उसने अपने खेत में सोलर पम्प सेट, शेडनेट हाउस, पोली हाउस आदि बना रखे हैं। पोली हाउस में ढाई माह का खीरा आकार ले चुका है। इसी प्रकार शेडनेट हाउस में उसने उन्नत प्रजाति का धनिया लगा रखा है जिसे पाले व शीतलहर से नुकसान होने की कोई गुंजाईश नहीं रहती।

गुलाब दे रहा समृद्धि की सुगन्ध

कमला गुलाब की खेती में भी  अव्वल है। वह ढाई बीघा में गुलाब की खेती करती है। अपनी क्यारियों में पल्लवित गंगानगरी एवं पुष्करी किस्म के उन्नत गुणवत्ता के गुलाब दो दिन के अन्तराल में उसने बनोड़ा बालाजी में बेचकर दो लाख रुपया कमाया।

कई फसलों का केन्द्र बना खेत

अपने खेत से वह संकर मक्का, कपास, गेहूं आदि परंपरागत फसलों के साथ ही नगदी फसलों का भी प्रयोग किया है और इससे अच्छा लाभ पाया।  अपने खेतों में उसने विभिन्न प्रजातियों की बड़ी नर्सरी भी तैयार की हुई है। इसके साथ ही मिर्च सहित विभिन्न प्रकार की सब्जियों और केला, अमरूद, हाईब्रिड किस्म के उन्नत बैंगलोरी सीताफल की पैदावार भी ली है।  उन्होंने अपने यहाँ एपल बेर, खजूर, क्राफ्टेड़ बैंग्लोरी सीताफल, गुजराती केले आदि की सफलतपूर्वक पैदावार ली है।

हाईटेक टेक्नालॉजी अपनाने के मामले में कमला पीछे नहीं रही। आई.एच.आई.टी.सी. जयपुर में उद्यानिकी प्रशिक्षण सहित विभिन्न कार्यक्रमों में भी उनकी सहभागिता रही है।

जैविक विधियों का सफल प्रयोग

फसलों, फल-सब्जियों आदि के उत्पादन में भी वह जैविक विधियों को अपनाती है वहीं फसलों में कीड़ों से उत्पन्न बीमारियों के लिए रसायन की बजाय जैविक नियंत्रण विधियों का ही प्रयोग करती रही हैं। सब्जियों में पंचगव्य का स्प्रे करने के लिए वह बैट्रीचलित मशीन का उपयोग करती है। उसने अपना पूरा समय खेती-बाड़ी को समर्पित कर रखा है। खेत पर ही मकान बना रखा है और परिवार वालों के साथ वहीं रहती हैं।

स्वच्छ भारत मिशन में भी भागीदार

स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत खेत में स्थित अपने मकान पर कमला ने शौचालय एवं स्नानगृह भी बना रखा है जिसका उपयोग उनका पूरा परिवार करता है। कमला बताती है कि एसबीएम के अन्तर्गत खेत-घर में बने शौचालय से उसे काफी सहूलियत हुई है और कई समस्याओं का निदान हो गया है अन्यथा इसके अभाव में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल

सरकारी योजनाओं और आधुनिक कृषि यंत्रों एवं तकनीक के उपयोग में भी कमला पीछे नहीं है। फसलों में सिंचाई के लिए कमला ने खेत के कूएं पर 5 होर्स पॉवर का सोलर पंप लगा रखा है साथ ही बिजली पंप का भी सिंचाई के लिए उपयोग करती हैं। सूक्ष्म सिंचाई मिशन के अन्तर्गत 0.5 हैक्टर में इजरायली पद्धति का प्रयोग करते हुए फिल्टर वेन्चुरी ड्रिप सिंचाई एवं 1 हैक्टर में फव्वारा सेट के माध्यम से सिंचाई कार्य में योगदान मिल रहा है। विभिन्न प्रकार की फसलों, फलों और सब्जियों-मसालों तथा औषधीय फसलों के उत्पादन में उसकी रुचि रही है।

नवाचारों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरुक

जैविक खाद, प्रमाणित बीज, मृदा जांच व संतुलित उर्वरक प्रयोग, पशुधन बीमा, उन्नत पशु आहार उपयोग,कृत्रिम गर्भाधान, डेयरी सहकारी समिति से जुड़ाव, कृषि बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, उन्नत कृषि/पौध संरक्षण यंत्रों के प्रयोग, कृषि एवं संबंधित विभागों की गतिविधियों में भागीदारी आदि के प्रति वह पूरी तरह जागरुक रही हैं और इसका उन्हें काफी लाभ भी हुआ है।

पशुपालन और दुग्ध व्यवसाय से आमदनी

कमला परंपरागत रूप से अच्छी पशुपालक भी हैं। उनके यहां गिर नस्ल की 2 गाय और मुर्रा नस्ल की 2 भैंस हैं जिनसे रोजाना कुल मिलाकर 12-12 लीटर दूध की प्राप्ति होती है। इससे घरेलू उपयोग के साथ ही दुग्ध व्यवसाय में भी काफी सहयोग मिलता रहा है।

नवीन आयामों के प्रति रही है दिलचस्पी

बेगूं के सहायक कृषि अधिकारी अय्यूब मोहम्मद बताते हैं कि प्रगतिशील काश्तकार कमला धाकड़ ने जब से उन्नत कृषि के विभिन्न प्रयोगों को अपनाया है तभी से उसके घर-परिवार की खुशहाली का ग्राफ निरन्तर बढ़ता जा रहा है और इससे उत्प्रेरित होकर वह नवाचारों को बड़ी ही रुचि से अपनाती है।

कृषि क्षेत्र में तरक्की की डगर पर है चित्तौड़गढ़

कृषि विभागीय उप निदेशक भूपेन्द्रसिंह राठौड़ बताते हैं कि चित्तौड़गढ़ जिले में कृषि, उद्यानिकी एवं इससे संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं को अपनाने की दिशा में किसानों में गहरी रुचि रही है और इस वजह से जिले भर में बड़ी संख्या में प्रगतिशील काश्तकारों की कम समय में खुशहाली के बढ़े हुए ग्राफ को देखकर अन्य काश्तकार भी उत्प्रेरित होकर स्वेच्छा से आगे आकर नवाचारों को अपना रहे हैं।

कृषक पुरस्कार एवं प्रोत्साहन 

परियोजना निदेशक (आत्मा) दिनेश कुमार जागा के अनुसार चित्तौड़गढ़ जिले के प्रगतिशील सर्वश्रेष्ठ चयनित काश्तकारों को कृषि विभाग की ओर से आत्मा के अन्तर्गत हर साल पुरस्कृत किए जाने से खासा प्रोत्साहन मिला है और इससे किसानों में उत्प्रेरणा एवं नवाचारों के प्रति रुझान का संचार हुआ है। प्रगतिशील काश्तकार श्रीमती कमला धाकड़ को गत वित्तीय वर्ष में आत्मा के अन्तर्गत सर्वश्रेष्ठ कृषक के रूप में चयनित कर 25 हजार रुपए का पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया जा चुका है।

Leave a Reply

%d bloggers like this: