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    मकर सक्रांति पर 29 साल बाद बन रही है सूर्य-शनि की युति,त्रिग्रही योग 7 राशियों के लिए रहेगा बेहद अशुभ : पं. रामकिशन

    भगवत कौशिक।

    अबकी बार मकर सक्रांति पर त्रिग्रही योग बन रहा है जो कि 7 राशियों के लिए बेहद अशुभ है और इन राशि वाले जातकों की मुश्किलें बनाएगा। यह जानकारी देते हुए छपारिया हनुमान मंदिर के पुजारी पं. रामकिशन गोवर्धन-मथुरा वाले ने बताया कि मकर सक्रांति हर बार लगभग 14 जनवरी को मनाई जाती है अबकी बार भी मकर सक्रांति 14 जनवरी को ही मनाई जाएगी। मकर सक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में अपनी यात्रा आरंभ करते हैं इसलिए इसे मकर सक्रांति कहा जाता है। पंडित रामकिशन ने बताया कि चिंतामणि ग्रंथ के अनुसार मकर संक्रांति का पुण्यकाल मुहूर्त सूर्य के संक्रांति समय से 16 घटी पहले और 16 घटी बाद का पुण्य काल होता है। इस बार पुण्यकाल 14 जनवरी को सुबह 7 बजकर 15 मिनट से शुरू हो जाएगा, जो शाम को 5 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। इसमें स्नान, दान, जाप कर सकते हैं। वहीं स्थिर लग्न यानी समझे तो महापुण्य काल मुहूर्त सुबह 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। इसके बाद दोपहर 1 बजकर 32 मिनट से 3 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। इस दिन श्रीमद्भागवत के 1 अध्याय का पाठ करें या गीता का पाठ करें तथा नए अन्न, कंबल, तिल, घी आदि वस्तुओं का दान करें। इस दिन किया गया दान अक्षय फलदाई होता है। उन्होंने बताया कि अबकी बार इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि की स्वराशि मकर में आ रहे हैं जो 2 माह तक रहेंगे वही मकर राशि में बुध पहले से ही मौजूद हैं मकर राशि में एक साथ शनि, बुध और सूर्य की मौजूदगी से त्रिग्रही योग बन रहा है। उन्होंने बताया कि ज्योतिष के अनुसार यह योग शुभ और अशुभ दोनों तरह के ही परिणाम देता है। उन्होंने बताया कि यह त्रिग्रही योग मेष, वृषभ, मिथुन, कन्या, धनु, मकर और मीन 7 राशियों के लिए अशुभ रहेगा।

    7 राशियों के लिए अशुभ त्रिग्रही योग…..

    मेष :- मेष राशि के दशम भाव में सूर्य और बुध की मौजूदगी शुभ नहीं मानी जा रही है कार्यक्षेत्र में विषमता का सामना करना पड़ सकता है, स्थानांतरण के योग हैं, व्यापार में हानि हो सकती है।

    वृषभ :- नवे भाव में सूर्य की मौजूदगी परिवार की सुख-शांति में ग्रहण लगाएगी पिता से संबंध खराब हो सकते हैं, परिवार में व्यर्थ में वाद-विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, इसलिए वृषभ राशि के जातक को सावधान रहना चाहिए।

    मिथुन :- अष्टम भाव में सूर्य और शनि के एक साथ होने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, किसी लंबी यात्रा पर भी जा सकते हैं।

    कन्या :- आपके लिए यह समय बहुत अधिक शुभ नहीं कहा जा सकता है। संतान पक्ष से तनाव मिल सकता है, विद्यार्थियों के जीवन में यह समय उथल-पुथल मचाएगा, उनका पढ़ाई से ध्यान भटका हुआ रहेगा।

    धनु :- यह समय आपके लिए भी शुभ नहीं है परिवार में तनाव का माहौल आपको परेशान करता रहेगा, आपके संचित धन में भी इस दौरान कमी आएगी।

    मकर :- आर्थिक समस्या से घीरे रह सकते हैं। स्वास्थ्य को लेकर सावधान रहें, किसी गंभीर रोग की चपेट में आ सकते हैं।

    मीन :- इस राशि के जातक इस अवधि में अपने अहंकार को किनारे रखकर अपने जीवनसाथी से शांतिपूर्वक और धैर्य के साथ संवाद करें। इस अवधि में आपको अपने पेशेवर जीवन में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

    पंडित रामकिशन के अनुसार सूर्य देव 14 जनवरी को दोपहर 2 बजकर 28 मिनट पर अपने पुत्र शनि की स्वामित्व वाली मकर राशि में आ रहे हैं। जो आगामी 14 मार्च को रात 12 बजकर 15 मिनट तक इसी राशि में रहेंगे। वहीं शनिदेव पहले से ही मकर राशि में है, बुध ने पिछले साल दिसंबर में मकर राशि में गोचर किया था। ऐसे में एक साथ शनि, बुध और सूर्य की मौजूदगी से मकर राशि में त्रिग्रही योग बन रहा है। यह योग उपरोक्त 7 राशियों के लिए बेहद अशुभ है।

    मकर संक्रांति के दिन सुख-समृद्धि के लिए करें उपाय, सालभर होगी बरकत…..

    छपारिया हनुमान मंदिर के पुजारी पं. रामकिशन गोवर्धन-मथुरा वाले के अनुसार मकर सक्रांति के मौके पर स्नान, दान के साथ-साथ कुछ खास उपाय भी अपनाने चाहिए, इससे आपको सुख-शांति के साथ धनलाभ भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि मकर सक्रांति के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर सूर्य के उगने पर तांबे के लोटे या गिलास में शुद्ध जल लेकर उसमें कुमकुम और लाल फूल डालकर भगवान को अर्घ्य दें। फिर कुश के आसन पर बैठकर सूर्य गायत्री मंत्र ओम आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्य: प्रचोदयात का इच्छा अनुसार जाप करें। पंडित रामकिशन का कहना था कि अपने सुख-सौभाग्य में वृद्धि के लिए मकर सक्रांति के दिन 14 की संख्या में किसी भी एक चीज का सुहागिन औरतों को दान करना चाहिए। सूर्य देव के शुभ फल प्राप्त करने के लिए गुड और कच्चे चावल बहते हुए जल में प्रवाहित करें। उन्होंने बताया कि अपने मन की कोई इच्छा पूरी करना चाहते हैं तो मकर सक्रांति को तांबे का सिक्का या तांबे का चौकोर टुकड़ा बहते पानी में प्रवाहित करें साथ ही एक लाल कपड़े में गेहूं और गुड़ बांधकर किसी जरूरतमंद को दान करें।

    29 साल बाद बन रही है सूर्य-शनि की युति….

    पं. रामकिशन गोवर्धन-मथुरा वाले ने बताया कि लगभग हर साल की तरह इस साल भी मकर सक्रांति पर्व 14 जनवरी को ही होगा। उनका कहना था कि मकर सक्रांति के दिन सूर्य शनि की राशि मकर में प्रवेश करते है और इस राशि में करीबन 1 माह तक विराजमान रहते है। उन्होंने बताया कि इस अवधि के दौरान सूर्य देव शनि देव के प्रति अपने क्रोध को भूल जाते हैं। जबकि सूर्य हर साल मकर सक्रांति के दिन मकर राशि में प्रवेश करता है बहुत कम ही उसका सामना अपने पुत्र शनि से होता है अबकी बार शनि और सूर्य एक साथ मकर राशि में विराजमान रहेंगे। यह दुर्लभ संयोग अब 29 साल के अंतराल के बाद 14 जनवरी 2022 को बन रहा है इससे पहले सन 1993 में जब शनि और सूर्य एक साथ मकर राशि में विराजमान थे तब यह दुर्लभ संयोग बना था। पं. रामकिशन का कहना था कि वैदिक ज्योतिष में सूर्य और शनि की युति सबसे दिलचस्प और डरावनी मानी जाती है। सूर्य और शनि एक दूसरे के कट्टर शत्रु हैं। सूर्य-शनि की युति के कारण आमतौर पर रिश्तो को नुकसान होता है।

    भगवत कौशिक
    भगवत कौशिक
    मोटिवेशनल स्पीकर व राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिल भारतीय साक्षरता संघ

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