सूरज है रूठा: नवगीत

अविनाश ब्यौहार

वर्षा की
पहली फुहार है।
और हवा के
आर पार है।।

डाली में
कोंपल फूटी है।
आज तपन
लगती झूठी है।।

हरितिमा की
साज सँवार है।

नहा रहा है
बूटा बूटा।
बादल से
सूरज है रूठा।।

घूंघट काढ़ेगी
बयार है।

मंजर दिखता रहा
बाढ़ का।
स्वागत बारिश में
अषाढ़ का।।

मेह बरसते
धुन सवार है।

अविनाश ब्यौहार,
रायल एस्टेट कटंगी रोड
माढ़ोताल जबलपुर
मो: 9826795372

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

* Copy This Password *

* Type Or Paste Password Here *

16,496 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress