स्वामी रामदेव- तीन भ्रम और उनकी वास्तविकता

आजकल स्वामी रामदेव देशभर में चर्चा का विषय बने हुए है। जहाँ कई साईंटे ऐसी है जो इस विषय पर स्वामी रामदेव कि आलोचना में कई लेख निकाल चुकी है, वही कुछ साईंटे ऐसी भी है जिन्होंने उनके पक्ष में भी लेख प्रकाशित किये है। विश्व में कोई भी व्यक्तित्व शत प्रतिशत स्वीकार्य नहीं है विरोध किसी भी कार्य का पहला चरण है, जिन विशिष्ट व्यक्तियों का मैंने नीचे जिक्र किया है उन सभी का प्यार और समर�¥ �थन स्वामी रामदेव को हासिल है, हालाँकि ये सूची काफी लम्बी है लेकिन हो सकता है कुछ लोगो को ये भी छोटी लगे, मैं कुछ सम्मानित व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम देना चाहता हूँ जैसे योगपितामह श्री बी के एस अयंगर जी, श्री श्री रविशंकर, सद्गुरु जग्गी वासुदेव, महामंडलेश्वर श्री सत्यमित्रानंद जी,महामंडलेश्वर श्री अवधेशानंद गिरिजी, श्री रमेश भाई ओझा जी, सुधांशु जी महाराज, श्री शंकराचार्य जी à ��ांची काम कोटि पीठ, प्रणव पंड्या गायत्री परिवार, ब्रह्माकुमारी, किरण बेदी, अन्ना हजारे, गोविन्दाचार्य, अग्निवेश, राम जेठमलानी, कल्बे जव्वाद, अरविन्द केजरीवाल, विश्वबंधु गुप्ता, कुप श्री सुदर्शन, मोहन भागवत, स्वामी चिदानंद मुनि जी महाराज, सुब्रमण्यम स्वामी, वेद प्रताप वैदिक, आर्क बिशप विन्सेंट कांसेसो, महमूद ए मदनी, जे ऍम लिंगदोह, शांति भूषण, प्रशांत भूषण, मुफ्ती शमूम काजमी, मल्लà ��का साराभाई, अरुण भाटिया, सुनीता गोदरा, आल इंडिया बैंक इम्प्लायिस फेडरेशन और सबसे बढ़कर अखिल भारतीय अखाडा परिषद् और न जाने कितने और लोग और संस्थाए, अब अगर उनके आलोचकों को ये भी काम लगता है तो कुछ और लोगो के नाम भी मैं उपलब्ध करा सकता हूँ। अगर ये आलोचक इन लोगो से भी ज्यादा विद्वान और समझदार है, तो कृपया अपना नाम और पता बताये सबसे पहले तो उनके चरण ही छुने चाहिए अगर नहीं तो इन लोगो के वात ्सल्य का कारण जानना चाहिए कि क्यों स्वामी रामदेव इन्हें इतने प्रिय है।

आलोचकों की केवल तीन शंकाए है जो जानकारी के अभाव के कारण है।

पहली – स्वामी रामदेव की संपत्ति घोषित नहीं है और उनकी बहुत सारी संपत्ति विदेशों में भी है।

उत्तर – स्वामी रामदेव के नाम कोई भी संपत्ति या बैंक अकाउंट नहीं है जो भी है वो ट्रस्ट का है जो पूर्णतः घोषित है, और सरकार द्वारा इसका प्रतिवर्ष आडिट भी किया जाता है। इसके लिए आप पतंजलि योगपीठ से पत्राचार कर सकते है और २५ मार्च को तमाम टी वी चैनलों पर भी उन्होंने इसकी घोषणा कर दी थी। जहाँ तक विदेशो में संपत्ति का सवाल है ये गोपनीय नहीं है जो भी व्यक्ति प्रातः ५ से साढ़े ७ तक आस्था चै�¤ �ल देखता है। वो इस बात को जानता है और ये भी जानता है कि स्वामी जी को ये संपत्ति किसने और कब दान में दी और इसका भारत के कर एवं कानून व्यवस्था से कोई लेना देना नहीं है। ये उन देशो में वहा के भक्तो द्वारा दिया गया दान है जिसे उन देशो कि सरकारों द्वारा ही देखा जाना है अगर भारत सरकार को इसमे कोई शंका है तो वो उन सभी देशो के नाम जानती है आवश्यक कार्यवाही कर सकती है।

दूसरी – स्वामी रामदेव कोई बड़े विद्वान व्यक्ति नहीं है और योग के कोई खास जानकर नहीं है वो आम साधारण लोगो को बहका कर उन्हें लूट रहे है।

उत्तर – स्वामी रामदेव हमेशा इस बात को स्वीकार करते है कि वो कोई विद्वान व्यक्ति नहीं है बल्कि गाँव के किसान के घर पैदा हुए कम पढ़े लिखे व्यक्ति है और मोटी बात समझते है और मोटी बात ही बोलते है। योग और आयुर्वेद पर भी उनका ज्ञान वृहद् नहीं है लेकिन जो बोलते है वो तथ्यात्मक है और तार्किक एवं वैज्ञानिक भी वो एम्स, दिल्ली में भी एक अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में व्याख्यान दे चुके है(ऐसे सेà ��िनारों के सूची बहुत लम्बी है उन्हें यहाँ दे पाना संभव नहीं है) और सबसे बड़ी बात देश के मूर्धन्य योगगुरुओं का उन्हें आशीर्वाद प्राप्त है, जिनका जिक्र लेख में ऊपर किया जा चुका है। जहा तक आम साधारण लोगो को बहका कर उन्हें लूटने कि बात है तो ऊपर दी गयी विद्वानों सूची से ये जाना जा सकता है कि बहकने वाले केवल आम साधारण लोग नहीं है वो बार बार कहते है कि मुझे समर्थ लोगो से ज्यादा से ज्यादा द ान कि आवश्यकता है जिससे कि ज्यादा से ज्यादा लोगो का भला किया जा सके जैसे पतंजलि योगपीठ के देश में ७०० से भी ज्यादा चिकित्सालय है जहाँ निशुल्क चिकित्सीय परामर्श प्राप्त किया जा सकता है और ८०० से ज्यादा आरोग्य केंद्र है जहाँ से रोगी शुद्ध दवाए और अन्य उत्पाद बाज़ार से कम मूल्य पर खरीद सकता है ( ये याद रक्खे कि आयुर्वेद कि ज्यादातर दवाएं दुर्लभ जड़ी बूटियों से बनती है जिनका उत्पादन �¤ �हुत कम है स्वामी रामदेव के प्रयासों से इस क्षेत्र में किसानों के लिए सम्भावनाये बढ़ी है जिससे भविष्य में आयुर्वेदिक दवाओं के दाम कम हो सकते है और नए रोजगार सृजित हो सकते है )। हरिद्वार के पतंजलि योगपीठ में स्थित संत रविदास लंगर में रोज ५ हज़ार लोगो को निशुल्क भोजन कराया जाता है। हरिद्वार के पतंजलि योगपीठ में ४०० कमरों कि निशुल्क आवास व्यवस्था (महर्षि वाल्मीकि धर्मशाला) भी कि गयी है। योग पर वैज्ञानिक परीक्षण करने के लिए और आधुनिक चिकित्सीय विज्ञान में मान्यता दिलाने के लिए उस पर शोध कि आवश्यकता है जिसके लिए धन कि जरूरत है। पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट दो अलग अलग ट्रस्ट है और इनमे दिये जाने वाले दान का प्रयोग भी अलग अलग क्षेत्र में होता है।

तीसरी – स्वामी रामदेव की राजनीतिक महत्वाकांक्षा है ।

उत्तर – इसका जवाब समय ही दे सकता है फिलहाल उनके राजनीतिक हस्तक्षेप से जनता को उम्मीदे है वो पहले भी कह चुके है कि वो सन्यासी है और सन्यासी ही रहेंगे वो कोई राजनीतिक पद नहीं लेंगे लेकिन शीर्ष राजनीतिक पदों पर योग्य लोगो को ही बैठने देंगे अगर आजका राजनीतिक नेतृत्व चाहे वो किसी भी पार्टी का हो उनकी ९ सूत्रीय मांगो को पूरा करता है या पूरा करने का वचन देता है तो वो उसका समर्थन करेंगे और अपनी तरफ से कोई राजनीतिक विकल्प नहीं खड़ा करेंगे, अगर किसी राजनीतिक दल को उनकी मांगे गलत लगती है तो उनसे संवाद कर सकता है वो अपने घोषणापत्र में बदलाव करने को तैयार है। जहाँ आज देश के नामी वकील (सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, वीरप्पा मोइली, हंसराज भरद्वाज, मनीष तिवारी, अभिषेक मनु सिंघवी, रविशंकर प्रसाद, जयंती नटराजन………) और किसान (मुलायम सिंह, चौधरी अजित सिंह, ओमप्रकाश चौटाला , भूपिà ��दर सिंह हुड्डा…………) और ग्वाले (लालू प्रसाद……………….) और शिक्षक (मायावती…………..) और अभिनेता (हेमामालिनी, गोविंदा, राजबब्बर, जयाप्रदा, शत्रुघ्न सिन्हा, विनोद खन्ना………..) और कुछ राष्ट्र द्रोही(महबूबा मुफ्ती, सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाईज उमर फारूख…………..) और कुछ धार्मिक नेता और संत ( स्वामी चिन्मयानन्द, सतपाल महाराज, योगी आदित्यनाथ, उमा भारती……………) औà �° खिलाडी( अज़हरुद्दीन, कीर्ति आज़ाद, नवजोत सिद्धू……………….) और पत्रकार (कुलदीप नय्यर, बलबीर पुंज, चन्दन मित्रा, राजीव शुक्ला………..) और अपराधी( मुख़्तार अंसारी, शहाबुद्दीन, धनञ्जय सिंह, अरुण गवली ………….) तमाम डॉक्टर, इंजीनियर, रिटायर्ड अधिकारी, रिटायर्ड जज इन सभी के पेशे पर कोई सवाल नहीं ये सभी नेता बन सकते है चुनाव लड़ सकते है लेकिन अगर स्वामी रामदेव इनके चरित्र पर सव�¤ �ल उठाते है और साथ ही ये वचन भी देते है कि वो कभी चुनाव नहीं लड़ेंगे उस पर न जाने कितने सवाल ।

स्वामी रामदेव के भारत स्वाभिमान संगठन के ९ उद्देश्य उल्लिखित है –

१. स्वदेशी चिकित्सा व्यवस्था

२. स्वदेशी शिक्षा व्यवस्था

३. स्वदेशी अर्थ व्यवस्था

४. स्वदेशी कानून एवं कर व्यवस्था

५. भारतीय संस्कृति की रक्षा

६. भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, गरीबी, महगाई, एवं भूखमुक्त वैभवशाली भारत का निर्माण

७. ग्रामीण स्वावलंबन

८. पर्यावरण की रक्षा एवं स्वच्क्षता

९. नियंत्रित जनसँख्या

इन उद्देश्यों को पूरा करने के कुछ उपाय देश की कुछ सम्मानित हस्तियों और विशेषज्ञों द्वारा सुझाया गया है ये आन्दोलन इन्ही उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जा रहा है देश के सभी सम्मानित नागरिको से अनुरोध है कि वो सभी भारत स्वाभिमान कार्यक्रम के निम्नलिखित संगठनों में से किसी में भी शामिल होकर इस आन्दोलन को समर्थन दे, अगर कोई शंका हो तो पहले उसका पुर्णतः निराकरण करे आज देश को आपकी जरूरत है ।

भारत स्वाभिमान कार्यक्रम के संगठन –

* युवा संग़ठन

* शिक्षक संग़ठन

* चिकित्सक संग़ठन

* वित्तीय व्यवसायी संग़ठन

* अधिवक्ता एवं पूर्व न्यायधीशों का न्यायविद् संग़ठन

* किसान संग़ठन

* उद्योग एवं वाणिज्य संग़ठन

* पूर्व – सैनिक संग़ठन

* कर्मचारी संग़ठन

* अधिकारी संग़ठन

* विज्ञान एवं तकनीकी संग़ठन

* कला-संस्कृति संग़ठन

* मीडिया संग़ठन

* वरिष्ठ नागरिक संग़ठन

जय हिंद, जय भारत।

 

23 thoughts on “स्वामी रामदेव- तीन भ्रम और उनकी वास्तविकता

  1. राजनीती के तरफ बढ़ाते झुकाव ने बाबा रामदेव को विवादित कर दिया है मेरी समझ में तो यही नहीं आता की बाबा क्या हैं संत हैं, योगगुरु हैं, व्यापारी हैं , राजनीतिज्ञ हैं, समाजसेवक हैं या कुछ और हैं. यदि संत हैं तो संतो के जैसा कार्य (ज्ञान ध्यान और तप में लीं न रहना संत का काम है ) नहीं करते, यदि योग गुरु हैं तो दवाओं का व्यापर नहीं करते, व्यापारी हैं तो राजनीती नहीं करते , और समाज सेवक हैं तो किशी दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप नहीं करते मेरी दृष्टी में बाबा रामदेव अपनी लोकप्रियता को भुनाने में lage हैं और एक आम आदमी की तरह सब कुछ अपनी मुट्टी में कर lena चाहते हैं

  2. मैं साजिद जी की इस बात से सहमत हूँ कि भाजपा भी दूध की धुली नहीं है।

    अब भ्रष्‍टाचार को लेकर राजनीतिक दलों में ‘कौन ‘ ज्‍यादा वाली प्रतिस्‍पर्धा है।

    बाबा एक समर्थ, सशक्‍त एवं योग्‍य विकल्‍प हैं।

    मैं इनकी सफलता के प्रति बेहद आशान्वित हूँ।

    भगवान हमें अपनी वर्तमान राष्‍ट्रीय पार्टियों के चरित्र से बचाए। पर यह बचाव राष्‍ट्रीय चरित्र के निर्मा णके बिना संभव नहीं। अत: चरित्र पर बल देने वाले प्रत्‍येक प्रेरक स्रोत का सम्‍मान एवं सहयोग होना चाहिए न कि भ्रष्‍टाचार पर बेबसी या किनारा काटने वाले लोगों के प्रति सहानुभूति का प्रदर्शन होना चाहिए।

  3. दोस्तों, मुझे लगता है कि मेरी बात को अन्यथा लिया गया है! मै एक चीज़ स्पष्ट कर देना चाहता हू कि मै कांग्रेस या किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं कर रहा हू, और न ही मैंने आज तक किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन किया है! मै तो सिर्फ यह बताना चाहता हू कि जब बाबा ने सारे भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध अभियान चलाया है तो किसी भ्रष्टाचारी पार्टी का समर्थन करने क्या औचित्य है! उन्होंने अगर भा ज पा के अलावा किसी और राजनीतिक पार्टी को चंदा दिया होता तो मै तब भी उसके विरोध में ही होता! दूसरी बात जनता ने यह पैसा बाबा को योग के प्रचार और प्रसार के लिए दिया है क्या उस पैसे को किसी भी भ्रष्टाचारी राजनीतिक पार्टी को चंदे के रूप में देना जनता का न्यासभंग नहीं है? जब देश का एक एक व्यक्ति बाबा के साथ दिल से है तब बाबा को और भी ऐसे भ्रष्टाचारियो से (जिनके विरुद्ध उन्होंने अभियान चलाया है) बचना चाहिए! जब तक बाबा ने योग और भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार किया है किसी भी व्यक्ति ने उनका विरोध नहीं किया बल्कि हर धर्म और वर्ग के लोगो का समर्थन उन्हें मिला है, और यह कोई गलती नहीं बल्कि वो उस सम्मान के हक़दार थे और है, और अगर कोई सही व्यक्ति किसी गलत राह पर चले तब तो ये और भी ज़रूरी होता है की उसको रोका जाये और उसकी क्षमता का सही उपयोग किया जाये! अगर आज भी बाबा किसी भ्रष्ट राजनीतिक पार्टी का साथ न देकर इमानदार लोगो का साथ ले तब मै ही क्या देश का हर व्यक्ति उनके साथ ही होगा!

  4. साजिद भाई चंदा बीजेपी को ही नहीं कांग्रेस को भी दिया गया था देखे लिंक
    http://in.jagran.yahoo.com/epaper/index.php?location=40&edition=2011-03-11&pageno=15
    किसी पार्टी को चंदा देने से कोई किसी पार्टी का सदस्य नहीं हो जाता राजनीतिक दलों को चेक से दिया जाने वाला चंदा अवैध नहीं है लेकिन चंदा देने वाला अगर चंदा देने के पीछे कोई लाभ पाना चाहता है तो ये अवश्य अवैध है, एक ईमानदार चंदा देने वाला हमेशा ये अपेक्षा करता है की उसके द्वारा दिए गए चंदे का सदुपयोग किया जायेगा
    केवल चंदा देने को विवाद का विषय कैसे बनाया जा सकता है ऐसे तो हम सभी इन्ही राजनीतिक दलों को अपने वोट देते है तो हम सब भी भ्रष्ट है

  5. आपने लिंक दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आप पढ़े लिखे एवं काफी समझदार मालूम होते हैं पर एक बात फिर भी कहूंगा चेक से वो ही पैसा दे सकता है जिसके पास वैध तरीके से कमाया हुआ पैसा हो,में एक व्यापारी हूँ यह बात अच्छी तरह जानता हूँ, | भले ही बाबा की महत्वाकंशाये राजनितिक हो लेकिन उन्होंने इसे पाने के लिए कभी भी धार्मिक मार्ग से की कोशिश नहीं की, आज कम से कम बड़े भ्रष्टाचारी सकते में तो हैं, पहले तो बिंदास घूम रहे थे बाबा भले ही राजनीति में सफल हो या ना हो लेकिन अब आम आदमी भी जान गया है उनके द्वारा दिए हुए कर के रूप में पैसे का कैसा दुरूपयोग हो रहा है. आप भी बुद्धिजीवी हैं समझते होंगे पैसा तभी तक पैसा होता है जब तक यह चलता रहे एक जगह अगर यह रुक जाता है तो यह बेकार है और ये बड़े भ्रष्टाचारी विदेशों में जमा करके इसे बेकार कर रहे है. मुझे सिर्फ यही बात प्रभावित किये हुए है.

  6. सबसे पहले भाई शेलेन्द्र जी को में ऐसे तथ्यात्मक लेख के लिए धन्यवाद देना चाहता हूँ… रही बात आलोचना की तो कुछ नए रूप में भाई शाजिद जी स्वामी रामदेव पर में कुछ आरोप लगा रहा हूँ जो मेरे मन को आज तक टीसते हैं….. बाबा योग करते हुए भाषण देते थे किसी को कोई आपत्ति नहीं हुई… पहली गलती बाबा ने अपनी भारतीय संस्कृति के प्रतीक योग को भारत के घर-घर में ही नहीं विदेशों में पहुंचा कर भारत को गौरवान्वित किया…? दूसरी गलती बाबा योग कराते- कराते स्वदेशी पर आगये.. बाबा ने विदेशी मार्केट की विदाई शुरू कर दी भारत को स्वाभिमान से जीना सिखा दिया..? तीसरी गलती बाबा ने ये कर दी की एलोपैथी को खत्म कर आयुर्वेद और योग के जरिये लोगों को जीवन जीना सिखा दिया….. चौथी और सबसे बड़ी गलती बाबा ने देशभक्ति की बातें करना स्टार्ट कर दिया …. और पांचवी गलती उन्होंने देश की पीड़ा और वर्तमान हालातों को समझ कर लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया….? उन्होंने भ्रस्ताचार.. घोटालों…और राजनीतिक अत्याचारों के खिलाफ आवाज बुलंद की….? या शाजिद भाई बाबा को और साधुओं की तरह राम कथा.. या प्रवचन करके और साधुओं की तरह अपने अंधभक्त चेलों की फोज कड़ी करके अपनी पूजा अर्चारना करवानी चाहिए थी ….. भाई सही बात ये है गलतियाँ हम बर्दार्ट कर लेते हें और कोई अच्छा करे तो सबके पेट मैं मरोड़ उठना शुरू हो जाता हे और जिस भास्कर का आप उदाहरण दे रहे हैं आप कूद भी इनकी असलियत जानते होंगे….. रामदेव के भ्रष्टाचार विरोधी खबर मात्र ३ घंटे में ही हटा दी जाती है और एसी खबर जिनका कोई ओचित्य नहीं उनको बढ़ा चढा कर दिखाया जाता है में इसका नियमित पाठक हूँ और जरा आप इस खबर पर नीचे दिए सारे अभ्मत जरुर पढ़े . १५० पूर्व में हटा दिए गए हैं जो की ९९ प्रतिशत रामदेव के पक्ष में थे….. और देशभक्ति और देश हित में अगर बाबा एसी गलतियाँ बार बार करेंगे तो भारत की जनता हमेशा उनके साथ रहेगी……और रही राजनीती में आने की बात लगता है आपने भारतीय इतहास नहीं पढ़ा… न जाने कितने संतों ने राजनीति में प्रत्यक्ष न रहकर भी .. भारत की दिशा बदल दी….. रामकृष्ण परमहंस, समर्थ गुरु रामदास , और सबसे प्रमुख चाणक्य को जरा पढ़ लेना आपको अच्छी तरह समझ आज्येगा… और भैया हम तो हैं मोती बुद्धि वाले मोती बात समझते हैं…. या माटी के संग जो गद्दारी करेगा वो तो भैया हम सबका सबसे बड़ा दुश्मन होगा….. जय राम जी की वन्देमातरम … और शाजिद भैया आपको रामदेव के अकाउन्ट की बहुत चिंता पड़ी है जरा एक चिंता और कर लो … जो जो या धरती को अपनी मैय्या यानि की भारत माता न माने और वन्देमातरम बोलने से तो उनकी जान जले है जरा उनसे बुलबा के दिखाय दियो तो माने के हाँ तुम्हारे मन में भी या देश के काजे कछु पीड़ा है…. अब तुम समझ गए होंगे की में का कहबो चाह रहो हूँ…

  7. साजिद भाई
    क्या बी जे पी कोई आतंवादी संगठन है जो यदि चंदा भी दे दिया तो कोई गुनाह हो गया. कभी कांग्रेस ने अपने बारे मे बताया है की कोंन उसे चंदा देता है और कैसे कैसे तरीकों से पैसा जोड़ते हैं. अपने घोत्ताले दिखाई नहीं देते. जब बाबा के चरित्र में और करनी में कोई खोट नहीं मिला तो उल-जुलूल आरोप लगाने शुरू कर दिए. आप जैसे कुछ लोग जिन्हें कोंग्रेस यदि नंगा करके सड़कों पे डंडे मारे, मुंह की रोटी छीन ले, साँस लेना मुहल कर दे, फिर भी कोंग्रेस के ही गुण गाते है. दो दिन पहले स्टार न्यूज़ बाबा पर समाचार दिखा रहा था और उस पर केवल चंदे का आरोप और दूसरा जो मजेदार आरोप था की बाबा बी जे पी की alochana नहीं karte pura adha ghante tak dikhaya jata रहा. apko नहीं lagta की ye kiske ishare पर हो रहा है. jis sarkar ने दो saal में logo का jina haram कर दिया है ab भी यदि उसे vot milte हैं तो is desh की janta ko dhikkar है. बाबा ने is sarkar की pol-patti kholni शुरू की तो chamchon ko dard hona शुरू हो गया kyonki is bhrasht sarkar में yeh भी shamil हैं.

  8. @ अजीत जी, मै आपको लिंक दे रहा हू! रामदेव की संस्था पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने भारतीय जनता पार्टी को चेक के जरिये 11 लाख रुपए दान दिए। पंजाब नेशनल बैंक का यह चेक (चेक नंबर-859783) 8 मार्च 2009 को काटा गया था। जिसको आप http://www.bhaskar.com/article/nat-baba-ramdev-on-congress-1919923.html पर जाकर देख सकते है! बाबा भी दुसरे राजनीतिज्ञों की तरह ही है! जिन्हें बस चुनावी मुद्दा चाहिए! ये उनके लिए चुनावी मुद्दे से अधिक कुछ भी नहीं है! इसलिए उनका समर्थन सिर्फ भा. ज. पा. ही कर रही है और वे भा. ज. पा. कार्यकर्त्ता है!

  9. Yek baat to kahanee padegi ki Ramdev baba jo bhrastachar ka agenda haath me liya bahoot hee sarahniya hai saayad kishrna lord bhee………..

  10. @ साजिद आप इस झमेले ना पड़े तो बेहतर होगा, आपने जो जानकारियाँ दी हैं उनका लिंक अवश्य दे नहीं तो इसको कचरे से ज्यादा कुछ नहीं समझा जाएगा. और अगर लिंक देते हैं तो आपका सम्मान बढेगा. आपको कैसे मालूम पडा की स्वामी रामदेव ने 11 lakh का चेक दिया हैं कृपया साक्ष्य दे.

  11. स्वामी रामदेव की तीन बातो में से ऊपर की २ बाते बिलकुल ठीक है, पर क्या हम बाबा के रूप में एक और उमा भारती को नहीं देख रहे है! ऐसे लोग कहने को तो सन्यासी होते है पर सबसे बड़े भोगी भी होते है! अगर सत्ता की मलाई न मिले तो उमा भारती जैसी सन्यासी अपना सन्यास भूल कर अधिकार मांगने लगती है कि मुझे सी. एम. क्यों नहीं बनाया! यही हाल बाबा का भी है कि उन्हें भ्रष्ट तो सभी लगते है पर भा. ज. पा. उन्हें भ्रष्ट नहीं लगती तभी तो उन्होंने भा. ज. पा. को ११.०० लाख का चेक दिया है! बाबा को ये साफ़ करना होगा कि जब सभी भ्रष्ट है, तो क्या भा. ज. पा. उनको भ्रष्ट नहीं लगती है जो उन्होंने ऐसा किया! या वो भा. ज. पा. के एक और गुप्त कार्यकर्ता है! अगर ऐसा है तो फिर दुसरे नेताओ कि तरह ऐसा ढोंग क्यों! अगर भा. ज. पा. के समर्थक हो तो खुल के बोलो डरना क्या है! भ्रष्टाचार चाहे १० करोड़ का हो या १०० करोड़ का, वो भ्रष्टाचार ही होता है, बाबा एक योग गुरु के रूप में सम्मानित है और रहेंगे पर उन्हें इस प्रकार के दोगले व्यवहार कि अनुमति नहीं दी जा सकती है! रही दुसरे नेताओ कि बात तो वो तो दोगले होते ही है! पर बाबा को इस प्रकार भ्रष्ट भा. ज. पा. के समर्थन का कारण बताना ही होगा!

  12. जो विरोध कर रहे है वो सब जनता का ध्यान बटाने के खातिर वाही कांग्रेसी है जिनका धन बहार विदेशो में बैंक में जमा है . हमें खुश होना चाहिए की किसी ने हिम्मत की जन आन्दोलन करने की

  13. ‘प्रवक्ता.काम’ पर स्वामी रामदेव जी के पक्ष में इस लेख पर टिप्पणियों के लिए अन्य लेखों के सामान विकल्प उपलब्ध है. पर विरोध में लिखे एक पक्षीय लेख के साथ टिपण्णी करने की सुविधा सुलभ न करवाने का क्या अर्थ समझा जाए ? प्रवक्ता क्यों नहीं चाहता की स्वामी जी के धुर विरोध में लिखे लेख पर कोई टिपण्णी हो ? क्या प्रवक्ता भी किसी पूर्वाग्रह या दबावों के अंतर्गत ऐसा कर रहा है ? आशा है की इस अतार्किक व्यवहार में सुधार किया जाएगा. उपरोक्त उत्तम लेख हेतु सादुवाद!
    ‘प्रवक्ता.काम’ के उत्कर्ष की शुभकामनाएं!

  14. धेर्य के साथ आसा और बलवती होती जा रही हे की बाबा को चाणक्य के रूप में उस खोये हुए गोरव को लोटाने के लिए भेजा हे अभी तक आस बंदी हुई हे क्योंकि हजारो वर्सो से ये पुण्य भूमि आक्रमण कारियों और देश द्रोहियों से त्रस्त हे इसलिए जल्दी यकीं नहीं होता मगर बाबा के साथ देश भक्तो का सम्रथन रहेगा एक वाही हे जिन्होंने उमीदो का दिया जलाया वन्दे मातरम

  15. स्वमिरामदेव वैदिक कालीन वर्ण व्यवस्था का पाठ पदाने की भी कोशिश कर रहे हें

  16. mai baba ke virodhiyon se sirf itnaa kahnaa chaahta hoo ki thodaa dherya rakh kar intjaar karo, are mere bhaiyon baba ke maare achchhe achhe logon ko dil kaa doraa pad gayaa hai.

  17. mai kai logo se kahtaa thaa ki bhale hi baba ramdev raajniti me safal naa ho lekin ek alakh to jagaa hi dee hain unhone bhrashtachaar ke virudh.

  18. कृष्ण को आना ही होगा कोई उनका अर्जुन जनम ले चूका है . धृतरास्त्र के वंशज परेशांन हो रहा है क्योकि ??????

  19. हरपाल जी कितना समय निर्धारित कर रक्खा है आपने

  20. शैलेन्द्र जी ऐसे ही किसी लेख की आवश्यकता मैं और कई लोग जो इस आन्दोलन को फलीभूत होते देखना चाहते है, महसूस कर रहा था! आपने अच्छा काम किया है इसके लिए साधुवाद! प्रवक्ता.कॉम को भी बधाई!

    ज्यूँ ज्यूँ ये आन्दोलन अपने मंतव्य की और बढ़ रहा है उन लोगों को मिर्च लगनी शुरू हो गई है जिनकी दाल गलनी बंद हो जाएगी अगर स्वामी रामदेव जी इसी जोश के साथ लगे रहे तो! हद तो ये है की लल्लू जैसे नेता जो किसी वक़्त गुणगान करते नहीं थकते थे अब पानी पी पी कर कोस रहे हैं!

    जय भारत जय भारत स्वाभिमान

  21. अन्दर की बात समय आने पर पता चल जाएगी धर्य रखिये

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