जब मैं तुम्हारे संग हूँ !

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जब मैं तुम्हारे संग हूँ, तब भी मैं कहाँ तुम्हारे साथ हूँ; तुम्हारी संस्थागत सत्ता में रहते हुए भी, मैं विश्व व्यापी व्यवस्था का परिद्रष्टा हूँ ! मेरे प्राण की फुहार केवल तुम तक नहीं रहती, वह हर पल शून्य के गह्वर में विचर कर आती है; तुम्हारे ढिंग सोया भी, मैं उसकी गोद में… Read more »