निर्भया सामूहिक बलात्कार कांड़

निर्भया को आखिर मिला इंसाफ

स्त्री की इस परिपक्वता और न्यायपालिका के दायित्व निर्वहन के बाद अब समाज की जिम्मेबारी बनती है कि वह समाज में उस मानसिकता को बदलने का काम करे, जो बलात्कार जैसे अपराधों का कारण बनती है। क्योंकि केवल सजा के जरिएं इस दुष्प्रवृत्ति को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता है। समस्या के टिकाऊ हल के लिए उन पितृसत्तात्मक धारणाओं पर भी कुठाराघात करना होगा, जो स्त्री के साथ दुष्कृत्य करने की भावना को उत्तेजित करती हैं।