नोटबंदी पर हंगामा

आखिर यह हंगामा क्यों बरपा है?

लाइनों में खड़े लोगों से भड़काऊ संवाद किया गया घरना, प्रदर्शन, सभाएं की गई लेकिन कुछ भी हासिल नहीं हुआ। हर जगह मोदी-मोदी के नारे मिले साथ ही विरोध का सामना करना पड़ा। इतना होने के बावजूद राहुल बाबा, ममता दीदी मानने को तैयार नहीं हैं। उन्हें सलाह है कि बुद्धिमानी इसी में है कि शांत बैठकर अपनी देश तोड़ू नीतियों, भ्रष्टाचार और घपले, घोटालों को समर्थन देने वाली नीतियों में परिवर्तन का कोई रास्ता तलाशें इसी में उनकी भलाई है।