प्रवीण दुबे

विगत 22 वर्षाे से पत्रकारिता में सर्किय हैं। आपके राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय विषयों पर 500 से अधिक आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। राष्ट्रवादी सोच और विचार से प्रेरित श्री प्रवीण दुबे की पत्रकारिता का शुभांरम दैनिक स्वदेश ग्वालियर से 1994 में हुआ। वर्तमान में आप स्वदेश ग्वालियर के कार्यकारी संपादक है, आपके द्वारा अमृत-अटल, श्रीकांत जोशी पर आधारित संग्रह - एक ध्येय निष्ठ जीवन, ग्वालियर की बलिदान गाथा, उत्तिष्ठ जाग्रत सहित एक दर्जन के लगभग पत्र- पत्रिकाओं का संपादन किया है।

चोरी करके फलता फूलता पट्रोल माफ़िया

इस बात से कतई इंकार नहीं किया जा सकता की इस तरह की चोरी करने का काम देश के कई तमामं शहरों में भी अंजाम दिया जा रहा हो। भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय को इस पर गम्भीरता से विचार करने की जरूरत है। पेट्रोल पंप पर की जाने वाली चोरी और नकली पेट्रोल की बिक्री करने वाले धन्ना सेठों के खिलाफ कड़े नियम बनाये जाए । पूरे देश में संचालित पेट्रोल पुम्पों की जांच का भी अभियान चलाया जाना जरूरी हो गया है।

क्या गलत कहा संघ ने ?

सर्वविदित है कि जब लम्बे समय से शोषण और गुंडागर्दी का शिकार रही राष्ट्रवादी विचारधारा वाली सरकार सत्ता में आई है तो इस तरह की वैचारिकता रखने वाले असंख्य लोगों जिसमे की तमामं कार्यकर्ता भी शामिल हैं में व्यावस्थासुधार को लेकर अतिउत्साह का वातावरण है। ऐसी स्थिति में सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप की सम्भावनाये भी बढ़ जाती हैं, आगरा लखनऊ , आदि शहरों में हुईं घटनाएं इसी का परिणाम कही जा सकती हैं।

यह भारत उदय का संकेत है

यह उस मानसिकता के समर्थक हैं जो नारे लगाते हैं भारत तेरे टुकड़े होंगे, याकूब और अफजल जैसे आतंकवादियों को बचाने यह रात के 2 बजे सर्वोच्च न्यायालय की ओऱ दौड़ लगाते हैं , वन्देमातरम और भारतमाता की जय बोलने का यह विरोध करते हैं।बावरी विद्यन्स पर यह विधवा विलाप करते हैं और गोधरा पर जशन मनाते हैं।

आखिर यह हंगामा क्यों बरपा है?

लाइनों में खड़े लोगों से भड़काऊ संवाद किया गया घरना, प्रदर्शन, सभाएं की गई लेकिन कुछ भी हासिल नहीं हुआ। हर जगह मोदी-मोदी के नारे मिले साथ ही विरोध का सामना करना पड़ा। इतना होने के बावजूद राहुल बाबा, ममता दीदी मानने को तैयार नहीं हैं। उन्हें सलाह है कि बुद्धिमानी इसी में है कि शांत बैठकर अपनी देश तोड़ू नीतियों, भ्रष्टाचार और घपले, घोटालों को समर्थन देने वाली नीतियों में परिवर्तन का कोई रास्ता तलाशें इसी में उनकी भलाई है।

रुपया बड़ा या राष्ट्रहित

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में ऐसे लोगों को भरपूर भरोसा दिलाते हुए उनके हितों के संरक्षण की बात कही, उन्होंने कहा कि देश के लिए देश का नागरिक कुछ दिनों के लिए यह कठिनाई झेल सकता है, मैं सवा सौ करोड़ देशवासियों की मदद से भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई को और आगे ले जाना चाहता हूँ, उन्हीं के शब्दों में ‘ तो आइए जाली नोटों का खेल खेलने वालों और कालेधन से इस देश को नुकसान पहुंचाने वालों को नेस्तनाबूत कर दें, ताकि देश का धन देश के काम आ सके, मुझे यकीन है कि मेरे देश का नागरिक कई कठिनाई सहकर भी राष्ट्र निर्माण में योगदान देगा। मोदी के इन शब्दों को पूरे देशवासियों को ध्यान से पढऩा चाहिए। हमें नहीं भूलना चाहिए कि राष्ट्रहित से बड़ा कोई नहीं।

आखिर इस राष्ट्रहित के निर्णय पर आपत्ति क्यों?

इन दोनों ही बातों में प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि माना है, कोई भी समझदार और देशभक्त नागरिक इसका विरोध करेगा ऐसा समझ नहीं आता है। ऐसा पहली बार नहीं है जब राष्ट्रहित की खातिर कोई बड़ा निर्णय लिया गया है। यहां यह भी लिखने में कोई संकोच नहीं है कि इस देश के नागरिकों ने हमेशा राष्ट्रहित हेतु लिए कठोर निर्णयों का न केवल स्वागत किया है बल्कि उसमें तन मन धन से सहयोग भी किया है।

खिसियानी बिल्ली खंबा नोंचे

अब तो चीन की उपहास भरी टिप्पणियों का जवाब यही होना चाहिए कि चीनी सामान की बिक्री जो 20 से 25 प्रतिशत घटी है वह 100 प्रतिशत तक नीचे कैसे जाए? जिस दिन भी यह चमत्कार हमने कर दिखाया उस दिन चीन को भारत के आगे नतमस्तक होने को मजबूर होना होगा। निश्चित ही यह काम कठिन है और चीन आज जो हमारा उपहास उड़ा रहा है, हमारे खिलाफ भद्दी टिप्पणियां कर रहा है, इसके पीछे का सच भी बड़ा कड़वा है।

जांबाज जवान तुम्हें सलाम

अभी तक कश्मीर मसले को लेकर हमारे देश में इजरायल जैसी शौर्यता और पराक्रम दिखाने की बात की जाती रही है। पिछले तीन वर्षों के दौरान यह दूसरा मौका है जब भारत की सेना ने दूसरे देश में अंदर घुसकर आतंकवादियों को मौत की नींद सुलाने का कार्य किया है।