अगर तुम न होते ह्वेनसांग…।

Posted On by & filed under महत्वपूर्ण लेख, विविधा

 [यात्रा वृत्तांत] – राजीव रंजन प्रसाद ———————————   [लेखन करते हुए ह्वेनसांग, संग्रहाल से एक तैलचित्र]  रिक्शेवाले से नाम ठीक तरह उच्चारित नहीं हो रहा था। उसनें कहा कि “यहाँ हंसवांग का महल है”। मैं मुस्कुरा दिया, मैंने पूछा कि “जानते हो कौन था यह हंसवांग?” अब कि मुस्कुराने की बारी रिक्शावाले की थी बोला… Read more »