योगविद्या को हिंदू आस्था का अंग मानने पर झिझक क्यों?

Posted On by & filed under धर्म-अध्यात्म, स्‍वास्‍थ्‍य-योग

हरिकृष्ण निगम आज जब लगभग डेढ़ करोड़ लोग मात्र अमेरिका में ही योगाभ्यास, ध्यान और प्राणायाम से जुड़े हुए हैं इसकी अंतर्राष्ट्रीय लोकप्रियता एवं स्वास्थ जीवन के संदर्भ में प्रासंगिकता को समझा जा सकता है। यह भारतीय वैकल्पिक चिकित्सा पध्दति की बढ़ती हुई स्वीकृति का भी सूचक है जिसके बीच में आस्था, नस्ल, रंगभेद या… Read more »