सेना़

सेना की साख में सुराख होना चिन्तनीय

ना की साख में यह पहला सुराख नहीं है। समय-समय पर अनेक सुराख कभी भ्रष्टाचार के नाम पर, कभी सेवाओं में धांधली के नाम पर, कभी घटिया साधन-सामग्री के नाम पर, कभी राजनीतिक स्वार्थों के नाम पर होते रहे हैं। एक बार नहीं कई बार सुराख हो चुके हैं। कभी जीप घोटाला तो कभी घटिया कम्बल खरीदने पर खूब विवाद हुआ था। कभी बोफोर्स तोप खरीद घोटाला तो कभी ताबूत खरीद में हेराफेरी के मामले उछलते रहे हैं। दाल खरीद में घोटाला हुआ तो दूध पाउडर घोटाला, अंडा घोटाला, घटिया जूतों की खरीद घोटाला भी चर्चित हुआ।

सर्जिकल स्ट्राइक, सरकार और सेना

अब जैसा कि सभी को पता है कि सेना स्वतः इस सर्जिकल स्ट्राइक की सी.डी. सरकार को सौंप चुकी है, पर वह स्वतः इसे प्रगट किए जाने के पक्ष मंे नहीं है, क्यांेकि इससे क्षत्रु को हमारी रणनीति और विषेषताओं का पता चल जाएगा। वेसे भी जहाॅ तक राष्ट्र की सुरक्शा का प्रष्न है, वहाॅ बहुत चीजें प्रगट नहीं की जाती है। जहाॅ तक सियासी फायदे के लिए सर्जिकल स्ट्राइक करने का सवाल है तो संजय निरूपम से यह पूछा जा सकता है कि क्या 1971 में बांग्ला देश का मुक्ति संग्राम उस समय की इंदिरा सरकार द्वारा सियासी फायदे के लिए किया गया था?