हिन्दू धर्म की चुनौतियां

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अशोक शास्त्री कुछ ऐसी तस्वीर साफ दिखाई देती है कि बादरायण (वेद व्यास) से शंकर तक, जो हिन्दुत्व की इबारत लिखी गई है, वो मोजूदा दौर में धर्म का प्रमुख ताना बाना है। पर वो कुलीन व्यवस्था की हवा में ही जीवित रह सकती है 1906 में आल इण्डिया मुस्लिम लीग की स्थापना के लिए,… Read more »

हिन्दुओं का पलायनवाद : आखिर कब तक

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विकास सिंघल हिन्दू पलायनवादी क्यों है? हिन्दू कब तक सहेंगे और कब तक समझौतावादी बने रहेंगे। समझौतावाद ही हमारी कमजोरी बन गया है। और जब तक ये समझोतावाद बना रहेगा तब तक दुसरे लोग हमे ऐसे ही झुकाते रहेंगे। और ऐसे ही हम अपनी इस मात्रभूमि, जन्मभूमि, कर्मभूमि, पुण्यभूमि भारत वर्ष का बटवारा होते देखते… Read more »

हिंदू धर्म को अपडेट या पुनर्भाषित किए जाने की आवश्यकता

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श्रीराम तिवारी विगत ३० सितम्बर २०१० के बाद देश में आसन्न चुनौतियों की सूची में जो विषय अभी तक बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समाजों के द्वंदात्मक विमर्श का कारण था, वो वरीयता में अब नहीं रहा. मंदिर-मस्जिद विवाद वैसे भी आस्था के दो नामों, दो पूजा पद्धतियों, दो बिरादरियों और दो दुर्घटनाओं की एतिहासिक द्वंदात्मक संघर्ष… Read more »

इस्‍लाम भी हिन्‍दू-माता का पुत्र है

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-हजरत साज रहमानी ‘फिरदोसी बाबा’ हिन्दू-धर्म ही संसार में सबसे प्राचीन धर्म है’- यह एक प्रसिद्ध और प्रत्यक्ष सच्चाई है। कोई भी इतिहासवेत्ता आज तक इससे अधिक प्राचीन किसी धर्म की खोज नहीं कर सके हैं। इससे यही सिद्ध होता है कि हिन्दू-धर्म ही सब धर्मों का मूल उद्गम-स्थान है। सब धर्मों ने किसी-न-किसी अंश… Read more »

पुरुष से ऊंचा स्‍थान है नारी का हिंदू परंपरा में

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-राजीव त्रिपाठी भारतीय संस्कृति में नारी का उल्लेख जगत्-जननी आदि शक्ति-स्वरूपा के रूप में किया गया है। श्रुतियों, स्मृतियों और पुराणों में नारी को विशेष स्थान मिला है। मनु स्मृति में कहा गया है- यत्र नार्यस्‍तु पूज्‍यन्‍ते रमन्‍ते तत्र देवता:। यत्रेतास्‍तु न पूज्‍यन्‍ते सर्वास्‍तफला: क्रिया।। जहाँ नारी का समादर होता है वहाँ देवता प्रसन्न रहते… Read more »