हिन्द स्वराज का दूसरा पलड़ा

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शंकर शरण डॉ. राममनोहर लोहिया ने 1963 में लिखा था, “गाँधीजी ने दार्शनिक और कार्यक्रम-संबंधी उदारवाद का जो मेल बिठाया, उसका मूल्यांकन करने का समय शायद अभी नहीं आया है। … अधिकांश देशवासी आजादी की प्राप्ति को ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। दरअसल वह कोई उपलब्धि नहीं है। उनके बिना भी देश अपनी… Read more »