death of simi terrorist

भोपाल जेल ब्रेकः- सेकुलरवादियों की फिर सियासत गरमायी

बांग्लादेश में भी दीपावली के दिन हिंदुओं के 15 से अधिक मंदिरों को ध्वस्त किया गया तथा हिंसक झडपों में 100 हिंदू घायल हुए व कुछ हिंदू महिलाओं केे साथ अभद्रता किये जाने का भी समाचार है। लेकिन इस वीभत्स अत्याचार पर किसी भी संेकुलर नेता व मानवाधिकारी का दिल अभी तक नहीं पसीजा हैं क्योकि वह वोटबैंक नहीं है। यह भारत के सभी दलों की दोहरी विकृत मानसिकता का परम उदाहरण हैं।

आतंकियों की मौत पर आंसू बहाना

अब दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, मोहन प्रकाशऔर एआईएमआईएम के स्वयंभू असददुद्दीन औवेसी ने मुठभेड़ पर सवाल और व्यक्ति के मानवाधिकारों की पैरवी की है। ये कुशंकाएं नेताओं के लिए राजनीतिक रोटियां सेंकने जैसी तो हैं ही, आतंकियों की हौसला-अफजाई करने वाली भी हैं। यह छींटाकशी राष्ट्रहित को परे रखते हुए वोट-बैंक को भुनाने जैसी है। मुठभेड़ को फर्जी घोषित करने वालों को यह चिंता नहीं हुई कि ये आतंकी उस जेल प्रहरी की हत्या कर भागे हैं, जो अपने उत्तरदायित्व का ईमानदारी से निर्वहन कर रहा था।