उच्‍चन्‍यायालय का ऐतिहासिक निर्णय और सेक्‍यूलरवादी विषवमन

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हरिकृष्‍ण निगम इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ का 30 सितंबर का ऐतिहासिक निर्णय यद्यपि अनेक पुराने विवादों पर निर्णायक फैसला देने से नहीं चुका है पर लगभग तीनों न्यायधीशों ने उन दुराग्रही अंग्रेजी मीडिया के एक बड़े वर्ग और कथित प्रगतिशील बुद्धिजीवियों की अयोध्या की रामजन्म स्थान के प्राचीन आस्तित्व को नकारने की निर्लज्जता… Read more »

अयोध्या पर संतों का निर्णय और हमारा उत्तरदायित्व

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– विनोद बंसल गत 6 अप्रेल को हरिद्वार पूर्ण कुंभ के अवसर पर गंगा तट पर देश भर के वरिष्ठ पूज्य संतों ने जब श्री राम की जन्म भूमि पर बनने वाले भव्य मंदिर हेतु हनूमान चालीसाओं का पाठ करने का निर्णय दिया तो पता नहीं क्यों मेरे मन में एक अनपेक्षित शंका ने जन्म… Read more »

रामजन्मभूमि विवाद, राजनीति के बांझपन का नतीजा ?

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-भरतचंद्र नायक राजनीति को लोकनीति बनाना श्रेष्ठ स्थिति मानी गयी है, लेकिन आजादी के बाद सियासत सकरे दायरे में कैद हुई है, उससे वह बांझ बनकर रह गयी है। राम जन्म भूमि विवाद को पाल पोसकर रखा जाना फिरंगी शासन की बांटो और राज करो की कुशल रणनीति का हिस्सा माना जा सकता था। लेकिन… Read more »

रामजन्मभूमि विवाद, राजनीति के बांझपन का नतीजा

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-भरत चन्‍द्र नायक राजनीति को लोकनीति बनाना श्रेष्ठ स्थिति मानी गयी है, लेकिन आजादी के बाद सियासत सकरे दायरे में कैद हुई है, उससे वह बांझ बनकर रह गयी है। राम जन्म भूमि विवाद को पाल पोसकर रखा जाना फिरंगी शासन की ‘बांटो और राज करो’ की कुशल रणनीति का हिस्सा माना जा सकता था।… Read more »

जीत तो आस्था की ही हुई है

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– आशुतोष साठ साल से भी ज्यादा समय से पहले जिला और फिर उच्च न्यायालय में रामजन्मभूमि और बाबरी ढ़ांचे का विवाद चला। मुकदमा लड़ने वालों की पीढ़ियां बीत गयीं पर मुकदमे में गवाही तक पूरी न हो सकी। त्वरित सुनवाई के लिए गठित विशेष पीठ ने भी फैसले तक पहुंचने में १७ वर्ष लगाये।… Read more »

अयोध्या की समस्‍या के मूल में संवादहीनता

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– प्रो. बृज किशोर कुठियाला इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ ने राम जन्मभूमि का जो निर्णय दिया उससे पूरे देश की जनता ने राहत की सांस ली है। फैसले से पूर्व का तनाव सभी के चेहरों और व्यवहार में था। परन्तु इस राहत के बाधित होने की संभावनाएं बनती नज़र आ रही हैं। 60… Read more »

यह आस्था बनाम कानून नहीं, यह कानून द्वारा आस्था का अनुमोदन है

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-लालकृष्‍ण आडवाणी मैंने अपने जीवन के शुरु के बीस वर्ष कराची में बिताए। इस दौरान मैं दो ही भाषाओं को जानता था एक मेरी मातृभाषा सिंधी और दूसरी अंग्रेजी, जिसमें मेरी पढ़ाई हुई। फिल्मों के प्रति मेरे शौक के चलते मैं हिंदी कुछ-कुछ समझ लेता था और टूटी-फूटी बोल भी लेता था लेकिन मैं हिन्दी… Read more »

संचार माध्यमों का संयम

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अयोध्या मामले पर मीडिया की भूमिका को सलाम कीजिए -संजय द्विवेदी मीडिया, खासकर इलेक्ट्रानिक मीडिया की भूमिका पर उठते सवालों के बीच अयोध्या मामले पर उसकी प्रस्तुति और संदेश एक नया चित्र उपस्थित करते नजर आते हैं। अयोध्या के मामले पर फैसला आने से पहले ही मीडिया ने जो रूख और लाइन अख्तियार की, वह… Read more »

अयोध्या मामले पर योगीराज श्री देवराहाबाबा की भविष्यवाणी अक्षरश: सत्य

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अयोध्या मामले में ब्रह्मलीन योगीराज श्रीदेवराहाबाबा की भविष्यवाणी अक्षरश: सत्य हुई। विदित हो कि श्रीदेवराहा बाबा ने अपने भक्तों की जिज्ञासा का समाधान करते हुए यह भविष्यवाणी की थी कि विवादित स्थल पर रामलला विराजमान होंगे और वहां राममंदिर निश्चित बनेगा। अयोध्या मामले पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ का निर्णय आते ही ब्रह्मलीन… Read more »

संवाद का नया सोपान

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– आशुतोष श्रीरामजन्मभूमि के मुकदमे का बहुप्रतीक्षित फैसला गत 30 सितम्बर को सुनाया गया। निर्णय के अनुसार जिस स्थान पर आज श्रीरामलला विराजमान हैं वही श्रीराम का जन्मस्थान है। इसके लिये विद्वान न्यायाधीशों ने आस्था को आधार बनाया है। एक दृष्टि से यह देश के बहुसंख्यक समाज की आस्था की जीत है। फैसले की न्यायिक… Read more »