Sukma

नक्सली सफल क्यों होते हैं?

सरकार को इस बात का ठीक-ठाक पता होना चाहिए कि नक्सलियों की सफलता का रहस्य क्या है? छत्तीसगढ़ में नक्सली इसलिए सफल हो जाते हैं कि एक तो उन्हें स्थानीय आदिवासियों का समर्थन मिल जाता है और दूसरा, हर हमले के दौरान वे निहत्थे आदिवासियों को आगे करके कवच की तरह इस्तेमाल करते हैं। तीसरा, उनके पास जवानों से छीने हुए बेहतरीन हथियार होते हैं। चौथा, उन्होंने जोर-जबरदस्ती करके पैसों का जखीरा इकट्ठा किया हुआ होता है। नोटबंदी का उन पर कोई असर नहीं हुआ।

‘अपने ही लोगों ‘ के सामने घुटने टेकने को मजबूर है सरकार

केंद्र सरकार को चाहिए कि वो नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में गंभीरता से सोचे, सिर्फ बैठकें कर लेने और मीडिया के सामने बयानबाजी कर देने से इस समस्या का समाधान नहीं होने वाला है । ठोस कार्रवाई वक्त की मांग है। देश के मंत्रीगण – राजनेता और आला – अधिकारी किसी बड़े नक्सली हमले के बाद शहीदों के शवों पर श्रद्धाञ्जलि के नाम पर फूलों का बोझ ही तो बढ़ाने जाते हैं ? और नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए लम्बी – चौड़ी मगर खोखली बातें करते हैं । लेकिन जब नक्सलवाद के खिलाफ ठोस रणनीति या कार्रवाई करने का समय आता है तो हमारे नेता ” गांधीवादी राग ” अलापने लगते हैं।

सुकमा की शहादत का मुंहतोड़ जबाव हो

कब तक हम इन घटनाओं को होते हुए देखते रहेंगे। कब तक केन्द्र सरकार राज्य सरकार पर और राज्य सरकार केन्द्र सरकार पर बात टालती रहेगी। कब तक सुस्ती और नक्सली हिंसा से निपटने के मामले में कामचलाऊ रवैये अपनाया जाता रहेगा। न जाने कब से यह कहा जा रहा है कि सीआरपीएफ के जवान छापामार लड़ाई लड़ने का अनुभव नहीं रखते, फिर ऐसे जवानों को क्यों नहीं तैनात किया जाता जो इस तरह की छापामार लड़ाई में सक्षम हो, जो नक्सलियों को उनकी ही भाषा में सबक सिखा सके? इसके साथ ही नक्सलियों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर भी सशक्त जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। उनकी कमजोरियों को स्थानीय जनता के बीच लाया जाना चाहिए। नक्सली संगठनों की महिला कार्यकर्ताओं के साथ पुरुषों द्वारा किये जाने वाले शारीरिक एवं मानसिक शोषण को उजागर किया जाना चाहिए।