taliban

याद आ रही ससुराल जाती मिनी , मेवा बेचते रहमत, नेताजी सुभाष, टैगोर

जैसे-जैसे तालिबान काबुल को अपने कब्जे में ले रहा,मेरी आंखों के सामने शरद के पत्तों की तरह सरसराकर गुज़र रही...

तालिबान औऱ भारत के क्षद्म सेक्यूलरवादी

डॉ राघवेंद्र शर्माअफगानिस्तान में तालिबान राज से उपजे हालातों ने भारत के छद्म धर्मनिरपेक्षतावादियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े...

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