लेखक परिचय

डॉ. प्रवीण तोगड़िया

डॉ. प्रवीण तोगड़िया

वैभवपूर्ण जीवन को भारतमाता के श्रीचरणों की सेवा में समर्पित करने वाले ख्‍यातलब्‍ध कैंसर सर्जन तथा विश्‍व हिंदू परिषद के अंतरराष्‍ट्रीय महामंत्री।

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हिंदू संस्‍कृति पर ‘हमलावरों’ का करें आर्थिक बहिष्‍कार

पाकिस्तानी क्रिकेटरों को आईपीएल क्रिकेट के लिए किसी ने नहीं खरीदा। बड़े नाटकीय ढंग से ‘सेक्युलर’ समूह तथा पत्रकारों ने इसका भी दोष भारतीयों पर मढ़ना शुरु कर ही दिया था कि आईपीएल की कंपनियों के मालिकों ने स्पष्ट भूमिका ली और कह दिया कि आखिर यह हमारे पैसे और देश की सुरक्षा का प्रश्न है। एक खेल समीक्षक ने एक तथाकथित ‘सेक्युलर’ चैनल पर यहां तक कह डाला, ‘क्या आज कोई पत्रकार या पाकिस्तानी सरकार या पाकिस्तानी क्रिकेटर यह ‘गारण्टी दे सकते हैं कि आईपीएल खेलों के दौरान पाकिस्तानी आतंकवादी फिर से 26/11 जैसा हमला नहीं करेंगे? ऐसा होता है तो क्या पाकिस्तानी क्रिकेटरों को यहां कोई आने देगा?’ और अब पाकिस्तान भारत को धमकियां देता है! प्रश्न केवल खेल का नहीं है।

आजकल भारत में विशेषत: भारत के ‘हाईक्लास’ ‘सो कॉल्ड इलिट्स’ में फैशन हो गयी है कि जो भी पाकिस्तानी खेल-खिलाड़ी, कला-कलाकार, वस्त्र-परिधान, व्यंजन-खाना, सिरैमिक के बर्तन, कपास, बासमती, पीओके से ‘स्मगल’ होकर जम्मू-कश्मीर में आनेवाली गंदी सस्ती दाल इन सबको अपनाए। यह फैशन स्वयं को ‘सेक्युलर’ दिखाने की होड़ का हिस्सा है। पाकिस्तान से आ-आकर गजल गानेवाले गुलाम अली हो या गला फाड़कर चिल्लाकर ‘सूफी’ गानेवाले नुसरत फतेह अली खाँ (अब मृत) हो-अब उनका पुत्र राहत फतेह अली खाँ हो या सूफी गानेवाली पाकिस्तानी महिलाएं हों-इन सबके रंगारंग कार्यक्रम-‘महफिल’ उनकी स्टाइल में-दिल्ली, मुंबई जैसी जगहों पर होती रहती हैं।

पिछले वर्ष भारत की एक शास्त्रीय गायिका को पाकिस्तान ने व्हिसा तक नहीं दिया था और अब ये सब ‘अमन की आशा’ नाम का षड्यन्त्र पाकिस्तानी वृत्तपत्र ‘जंग’ के साथ मिलकर चला रहे हैं। बड़ी-बड़ी बातें, लंबे-चौड़े विज्ञापन दे-देकर ‘अमन की आशा’ वाले घूम रहे हैं। जो पाकिस्तान हमारे भारत का हरा-भरा चमन उजाड़ने पर तुला है, उस पाकिस्तान के साथ ‘अमन की आशा’ का ‘मार्केट’ चलाने वाले देश के साथ गंभीर खिलवाड़ कर रहे हैं। वहाँ पाकिस्तान के सुरक्षा प्रधान भारत को धमकियां दे रहे हैं- ‘अगर पाकिस्तानी क्रिकेटरों को नहीं लिया गया तो हम भी देख लेंगे’, यहां हमारे सुरक्षा मंत्री लगातार कह रहे हैं, ‘पाकिस्तान से आतंकियों की बड़ी फौज यहां आयी है।’ फिर भी अमन की आशा की नौटंकी ये फैंसी सेक्यूलरिस्ट कर रहे हैं।

देश की सुरक्षा सर्वोपरि है, यह आम आदमी समझता है। हमारी सेना, पुलिस के जवान भी यह समझते हैं। परन्तु कुछ फैशनवाले सेक्यूलर समझकर भी ‘अमन की आशा’ जैसा सामाजिक-आर्थिक-राजकीय (Socio-Economic-Political) षड्यन्त्र चलाते हैं। इनमें से भी कुछ महनीय कलाकार सहृदय हैं, शायद उन्हें ऐसी योजनाओं के पीछे की गंभीर सच्चाई की जानकारी भी नहीं होगी। इसलिए हृदय में मधुर संबंधों की सच्ची आशा लिए वे भी कुछ दांभिक (ढोंगी) देशप्रेमियों के साथ जुड़ जाते हैं और फंसते हैं। अधिकांश भारतीय कलाकार बहुधा इनसे दूर ही रहते हैं।

‘कला के लिए कला’ या जीवन समाज के लिए कला यह विवाद वर्षों से चला आ रहा है। इस चर्चा का यह स्थान नहीं और आज वह समय भी नहीं। परन्तु यह प्रश्न अवश्य है कि क्या केवल पाकिस्तानी, मुस्लिम कलाकारों, खिलाड़ियों, फिल्म वालों को ही ‘वाणी, उच्चार, विचार, आचार स्वातन्त्र्य’ प्राप्त है? और वह भी भारत में? कोई हिन्दू या डच कलाकार मोहम्मद पैगम्बर का कार्टून बनाता है तो इनकी भावनाएं तिलमिलाने लगती हैं, जब मकबूल फिदा हुसैन दुर्गा मां और भारत माता का (एक जैसा दिखनेवाला !) नंगा चित्र बनाता है, तब ही इनको सब स्वातन्त्र्य याद आते हैं? पाकिस्तानियों और मुसलमानों के लिए रो-रो कर, चिल्ला-चिल्ला कर बोलने वाले ये सेक्युलर फैन्सीज तब कहां चले जाते हैं, जब पाकिस्तानी फिल्मकार, एक्टर, भारत में आकर भारतीय कलाकारों की रोजी-रोटी छीनते हैं? टूरिस्ट व्हिसा पर आकर वर्क व्हिसा ना लेकर फिल्में बनाकर भारतीयों का पैसा, नौकरी लूटनेवालों के विरुद्ध ये ‘अमन की आशा’, ‘जंग’ वाले क्यों चुप रहते हैं?

यही नहीं, भारत में भी कई ‘मिनी’ और ‘प्रॉक्सी’ पाकिस्तान कला, खेल, साहित्य, शिक्षा, विज्ञान और अन्य कई क्षेत्रों में बने हैं। फिल्मी दुनिया कितनी भी चमचमाती दिखे, पर्दे के पीछे हिन्दुओं के विरुध्द यहां भी पाकिस्तान और मुसलमानों का महाभयंकर षडयन्त्र चल रहा है। पाकिस्तानी एक्टरों, गायकों, निर्देशकों का भारत में आकर भारत के फिल्मवालों के पेट पर पाँव देना ही नहीं, फिल्म व्यवसाय में हिन्दुओं को सीधा-सीधा कैमरामैन की, स्टूडियो बॉय की, मेकअप मैन की भी नौकरी से कम कर उनकी जगह पाकिस्तानी/मुसलमान भरे जा रहे हैं। किसी भी फिल्म की श्रेयसूची देखें तो इसका पता चलता है। हिन्दू निर्देशक, निर्माता, नायक-नायिका इनका कोई चित्रपट न आए, इसके लिए मुसलमान निर्देशक, निर्माता, नायक-नायिका, डांस कोरिओग्राफर भयंकर षडयंत्र, गलत प्रचार करते रहते हैं। यह अन्तत: इतना फैला है कि हिन्दू निर्माता ही त्राहि माम् हो चुके हैं। यह षडयन्त्र यहां तक ही नहीं रुकता। हिन्दू परम्परा, मां गंगाजी, हिन्दू मंदिर, हिन्दू श्रद्धा, हिन्दू धर्मश्लोक इनका मजाक उड़ाना, इनका दुरुपयोग करना ये सब गतिविधियां आज चरमसीमा पर पहुंची हुई हैं। हम सबने समय रहते यदि इन पर काबू नहीं पाया तो इस्लाम और पाकिस्तान का यह व्हायरस क्रिकेट, चित्रकला, संगीत में घुसा है, जो करोड़ों रुपयों की फिल्म इण्डस्ट्री में पूर्णतया फैल जायेगा काकस हम सब क्या करें?

01 जहां कहीं पाकिस्तानी वस्तुएं, कला, संगीत, फिल्मकार, नायक-नायिकाएं, कपड़ा-परिधान, खाना आदि हैं, उन पर तुरन्त ‘बॉयकाट’ करें। महेश भट्ट जैसे दंभी-हिप्पोक्रेट-जिसके पुत्र का नाम आतंकी हेडली के साथ लिया गया है-जो हमेशा पाकिस्तानी नायिकाओं को लाते रहता है, उसकी फिल्में चलनी नहीं देना चाहिए।

02. ‘जिहाद’ का समर्थन करनेवाली बहुत सी फिल्में पेट्रो डॉलर खर्च कर या स्थानीय मुसलमानों के समर्थन से बनायी जा रही हैं। उन सब पर तुरंत पाबंदी लगाने की मांग करते हुए सड़क पर उतर कर लोकतांत्रिक आन्दोलन करना चाहिए।

03. हिन्दुओं की भावनाओं, हिन्दुओं की नौकरियाँ, इनको आहत करनेवाली जो फिल्में बनती हैं, उन पर तुरंत पाबंदी लगा देनी चाहिए। किसी भी चित्रपट में कला के नाम पर हिन्दू धर्म और संस्कृति का भद्दा मजाक उड़ाना, उनका दुरुपयोग करना इनके लिए कानूनन कार्रवाई तथा बॉयकॉट करना चाहिए। ऐसी फिल्में किसी भी चित्रपट गृह में नहीं चलानी चाहिए।

04. भारत में आकर खेलनेवाले पाकिस्तानी खिलाड़ियों के खेल का बॉयकॉट करना चाहिए।

05. भारतीय होकर या ना होकर, भारत और हिन्दू धर्म के प्रतीकों का भद्दा मजाक चित्रकला, संगीत (ओऽम् का दुरुपयोग आजकल अनेकानेक गानों में, चित्रों में, फिल्मों में दिख रहा है। यही बात टीके की, सिन्दूर की और धर्मध्वज की है।) में, फिल्मों में जो करते हैं उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलाना चाहिए और हिन्दुओं को भी सड़क पर उतरकर इन सबका विरोध करना चाहिए।

06. हिन्दुस्तान लीवर (अब युनिलीवर) जैसी कंपनियां अपने उत्पादों के विज्ञापनों में (साबुन का विज्ञापन : बाबर का बेटा हुमायूं का बेटा अकबर) मुसलमान राज का महिमा मण्डल कर रही हैं। इन पर तुरंत पाबंदी लाना चाहिए। इसी बाबर ने हमारा राम मंदिर तोड़ा था।

07. मीडिया में क्रिश्चियन और मुसलमान धर्मप्रसारक या औषधियों के कई विज्ञापन लंबे चलते हैं जिनमें हृदयविकार, कैंसर जैसी बीमारियां ठीक करने का दावा किया जाता है। हिन्दू साधु-सन्तों, ज्योतिषियों के प्रति शत्रुत्तव का व्यवहार करनेवाले, अंधश्रध्दा निर्मूलन वाले और उनके कानून, ऐसे क्रिश्चियन, मुसलमान ढोंगी लोगों के बारे में चुप क्यों रहते हैं? हम सबका मिलकर ऐसे विज्ञापन करने वाले तथा उन्हें दिखानेवाले सभी पर तुरन्त कार्रवाई की मांग करनी चाहिए।

अब समय आ गया है कि, हम सब मिलकर कहें, ”बस ! अब बहुत हो गया!” ऐसी देशद्रोही, धर्मद्रोही नौटकियां अब और नहीं। इसका आरंभ हम कम से कम इस्लामिक फिल्में, कलाकार, गायक, उत्पाद, सब्जीवाले, पानवाले इत्यादियों पर आर्थिक बहिष्कार करके करें। जनसंख्या बढ़ाकर हमारे धर्म का संस्कृति पर हमला करने वालों को अब और आगे बढ़ने न दें। गौहत्यारे, गौभक्षक और जिहाद में विश्वास रखनेवालों का आर्थिक बहिष्कार यदि आज नहीं करेंगे तो कल हिन्दू बच्चे भूखे मरेंगे!

-डॉ0 प्रवीण तोगड़िया

8 Responses to “बस! अब बहुत! हो गया! -डॉ0 प्रवीण तोगड़िया”

  1. VIJAY SONI ADVOCATE

    आदरणीय प्रवीनभाई नमस्कार -जयश्रीराम-जय जय श्री राम, सौभाग्यवश मैंने आपका दुर्ग छत्तीसगढ़ में लगभग ३महिने पहले उदबोधन सुना ,आपके विचार हिन्दू अस्तित्व और हिन्दू सभ्यता -संस्कारों के न केवल अनुकूल बल्कि इसे बचाकर रखने का कार्य भी कर रहे हैं ,आपका आभार व्यक्त करता हूँ की आपने हिदू रक्षा के लिए अहिंसात्मक उपाय बताते हुवे केवल आर्थिक बहिष्कार की सलाह दी -जो १०० प्रतिशत कारगर उपाय है ,साथ ही मल्टी नेशनल कंपनियों द्वारा जिस प्रकार का आर्थिक शोषण किया जा रहा है उस पर भी आपने चिंता व्यक्त की जो बिलकुल सही है ,इस देश में कोक -क्रिकेट -कोलगेट जबरदस्ती ठोक ठेल कर केवल बाजारवाद को बढ़ावा देने -प्रचार प्रसार के माध्यम से थोपे गए हैं ,मैं स्वम इन तीनो चीजों से सदा दूर रहता हूँ ,एक और व्यावहारिक सत्य आपने हिन्दुओं की जनसंख्या वृद्धि दर के बारे में बताया की हमारी तुलना में अन्य सम्प्रदायों की संख्या वृद्धि कई गुना ज्यादा है -जो की हिन्दुस्तान में हिन्दुओं को अल्पसंख्यक बनाने के लिए पर्याप्त है ,निश्चित ही आप जैसे विचारकों को अब और आगे आकर हिन्दुओं को प्रेरित करना होगा तभी हिन्दू और हिन्दुस्तान बचेगा अन्यथा नहीं …विजय सोनी अधिवक्ता दुर्ग छत्तीसगढ़

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  2. Mayank Verma

    आमिर शाहरुख़ फिल्म का उपयोग अपने धर्म के प्रचार और हमारे धर्म को नीचा दिखाने के लिए कर रहे हैं. अगर आप ३ idiot देखें तो आपको पता चलेगा की उसमे शर्मन जो की हिन्दू पात्र है उसके परिवार को बहुत पिछड़ा गरीब और उसके बाप को कार्टून बनाया गया है, ताकि लोंगो के मस्तिस्क मैं ये स्थापित हो जाये की हिन्दू गरीब और आचरण विहीन होते हैं जबकि माधवन के पात्र की पृष्ठभूमि को एक उच्च मध्यमवर्ग का दिखाया है. आमिर के पात्र को दो नामो मैं उलझाया गया है, जिससे अंत मैं जिनिअस वांगचुक वांगडू को साबित किया गया है न की छाचेड़ को . हिन्दुओं को पूरी पिक्चर मैं मूर्ख ही दिखाया गया है. शर्मन की बहिन की शादी को भी मजाक बनाया गया है साथ ही शहस्त्रबुद्दे को भी अपने आप को जिनिअस समझनेवाला मूर्ख बताया गया है. शहस्त्रबुद्दे की दोनों बेटियां भी उसके विरोध मैं ही काम करती हैं बड़ी बेटी की डिलीवरी के समय उसके पति का साथ न होना भी एक हिन्दू पति का उसकी पत्नी के प्रति लापरवाही ही प्रदर्शित करता है. तथा आमिर को डिलीवरी करते दिखाना भी बहुत सी बातों को जनम देता है. करिश्मा के मंगेतर को जो की एक हिन्दू पात्र है को पैसों के पीछे भागनेवाला बताया है. इस पूरी फिल्म मैं हिन्दुओ को ही idiot बताया गया है और हम उसे देखकर अपने अवचेतन मस्तिस्क पर होते हमले के बाद अपने को नीचे गिरा हुआ देखकर भी कहते हैं बहुत अच्छी फिल्म है सभी को देखना चाहिए. चक दे मैं भी ऐसी बहुत सी बातें हैं टार्गेट हिन्दू महिलाओं के अवचेतन मस्तिस्क को किया जा रहा है. ताकि वे अन्य धर्म के लोगो के प्रति आकर्षित हो. प्रवीण जी इस सम्बन्ध मैं बहुत बड़ा अभियान चलने की जरूरत है. हमें अपने धर्म की रक्षा का पूरा अधिकार है. आप जैसे लीडर्स को आगे आकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने साथ जोड़ना होगा और जागरूक करना होगा.

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  3. Vinayan

    महेश भट्ट , शाहरुख खान, आमिर खान जैसो को सबक सीखाने का एक ही तरीका है. इनकी फिल्मो की थोक के भाव पाइरेटेड सीडी बनाकर लोगो में बाँट दो. ताकि लोग थियेटर में इनकी फिल्मे देखने ही नहीं जायेंगे. तो खुद बा खुद पिट जाएँगी. एक सी डी का खर्च महज ५ रुपये ही आता है.

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  4. Jeet Bhargava

    डॉ. साहब आपकी बात सही है. सबसे बड़ी समस्या यह है की हम हिंदुत्व की सही तरीके से मार्केटिंग नहीं कर पाए. नतीजन दुनिया का सर्वोत्तम जीवन-दर्शन होने के बावजूद हम बदनाम किये जा रहे हैं. दूसरी अहम् बात वेटिकन और खाड़ी देशो के चंदे पर और मैकाले के पुत्रो द्वारा संचालित मीडिया हमेशा ही हिन्दू विरोधी रहा है. और आजकल तो हद हो गयी है. ऐसे में हमें मीडिया में एक समग्र दखल देनी होगी. भारतीय जनता पार्टी सहित सभी हिन्दुत्ववादी पार्टियों के १००० से भी अधिक सांसद-विधायक हैं. यदि एक विधायक-सांसद सिर्फ १ लाख का योगदान दे तो १०,००,००,००० रुपये का इंतजाम हो सकता है. इतने रुपये से तो हम एक अच्छा खासा न्यूज चैनल, एक अंगरेजी अखबार और एक धाँसू पोर्टल खोल सकते हैं. यह सही है की फिलहाल आप एक ही समय में कई तरह के दायित्व निभा रहे हैं, लेकिन इस विषय में आप एक निष्ठावान मीडिया टीम बनाकर काम को अंजाम दे सकते हैं.

    @ भाई राजेश कुमार, आप निकटतम विश्व संवाद केंद्र से संपर्क कर सकते हैं या सीधे मुझे मेल कर सकते हैं: jeetbhargava @ yahoo.co .in

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  5. shrikant upadhayay kawardha

    मैंने आपका लेख पढ़ा और सोभाग्य से कवर्धा में ४-०२-२०१० को आपको सुनने का अवसर मिला किन्तु मुझहे अफ़सोस इस बात के लिए होता है की हम क्यों अपनी हिंदुत्व के भावना को जगाने में असमर्थ है क्या आपको ऐसा नहीं लगता की हिन्दुओ के पतन के लिए मोलिक जिम्मेदारी हमारे सम्मानी नेताओ को लेना चाहिए !पैसे के पीछे भागते ये गद्दार नेता ही लोगो को बरगलाने का सड़यन्त्र करते मुझहे लगता है इनकी महेरबानियो से आने वाले समय में हमे मुस्लिम और क्रिस्चन में से हिन्दू नहीं अपितु हिन्दुओ में हिन्दू तलासने पड़ेगे मुझहे पता है ये आपकी अकेले की जिमेवारी नहीं है किन्तु चूँकि आप इस महत्वापूर्ण कार्य के बीड़ा उठाये है तो कृपया आप अपना दोरा बड़े सहरो के बजाये ग्रामीण अंचल में ज्यादा करे तो बेहतर होगा!

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  6. ravi tembhare

    dr.praveen ji.
    aadarniya ye saari jawabdari aap logo ki hai, itne uche post(viswa hindu parisad ke maha mantri sorry international ) per rahene ke baad bhi aap asahye najar aate hai, hum jaise lakho carore log aake aawhan per mar mitne ki liye tatpar rahe hai kahi na kahia aap humare hero hai lekin jab hero hi aasaye ho jaye to samaj ka kaya hoga, mahoday shirf baadi baadi baato se kisi ka pet nahi bharta uske liye jameen per aana hota hai, mai bhi ek hindu hone ke saath saath ek bharatiya hu.

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  7. RAJESH KUMAR

    Mr.Praveenji
    मैंने सनातन धर्म और कुछ सामाजिक समस्या पर कुछ लेख लिखा है / मुझे समझ में नहीं आ रहा था की अपने लेख को कैसे प्रकाशित करवाऊ / तभी मुझे RSS साईट पर आपके बारे में पता चला / मै चाहता हूँ के मेरे लेख का PRESENTATION बहुत ही ATTRACTIVE हो जिसके लिए मै चाहता हूँ की आपकी RSS टीम मेरे लेख को अच्छी तरह से पढ़ कर अपने हिसाब से MODIFY करे ताकि उसका PRSENTATION बहुत ही अच्छा हो /
    मै अपने जानकारी के हिसाब से संछिप्त विवरण RELIGION OR सामाजिक समस्या का लेख TOPIC लिखा हूँ / मै चाहता हूँ की RSS टीम मेरे हरेक TOPIC में और महत्वपूर्ण जानकारी ADD करके तथा त्रुटियों को सुधार करके प्रकाशित करवाए /
    यदि आप मुझे मदद करें तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी तथा मै आपको अपना लेख भेज सकता हूँ /
    Rajesh kumar thakur
    Ph.No-09463359339

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