भाजपा ने अभी से 2019 के लिये बिछाई बिसात

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anant vikram singhयुवराज अंनत के सहारे राहुल गंाधी को घेरने की तैयारी

21 को अनंत ग्रहण करेंगे भाजपा की सदस्यता

 

जो काम पिता नहीं कर पाया था,वही काम अब बेटा भारतीय जनता पार्टी के लिये करेगा।बात ज्यादा पुरानी नहीं है जब आम चुनाव से पहले भाजपा ने सांसद और अमेठी के राजा संजय सिंह को कांगे्रस के पाले से अपने(भाजपा) पाले में खींचने के लिये जद्दोजहद की थी।संजय सिंह के सहारे भाजपाई अमेठी में राहुल गांधी को पटकनी देना चाहते थे,लेकिन ऐन वक्त पर दस जनपथ ने डैमेज कंट्रोल करके भाजपा का पासा पलट दिया।भाजपा की यह रणनीति फेल हुई तो उसने छोटे पर्दे की बहू और अपनी युवा नेत्री स्मृति ईरानी को राहुल गांधी के खिलाफ मैदान में उतार दिया।स्मृति ईरानी चुनाव हार जरूर गईं,लेकिन उन्होंने राहुल गांधी को अपनी सीट बचाने के लिये -गाँव पैदल यात्रा करने को मजबूर कर दिया था।यह सब बातें इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुकी हैं,लेकिन अमेठी को लेकर भाजपा ने अपने इरादे नहीं बदले हैं।पहले वरूण गांधी को पीलीभीत से लाकर अमेठी के बगल की संसदीय सीट सुल्तानपुर से लड़ाना,उसके बाद स्मृति ईरानी को लोकसभा का टिकट देना,चुनाव हार जाने के बाद भी स्मृति को राज्यसभा भेज कर मंत्री बनाना,स्मृति का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना आर्दश ग्राम के तहत अमेठी के एक गाँव को गोद लेना,उसके बाद भाजपा नेता और रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर का भी अमेठी के गाँव को ही गोद लेना,भाजपा पक्ष द्वारा अमेठी में अग्निपीडि़तों के लिये राहत सामग्री और साड़ी वितरित करना।यह बताने के लिये काफी है कि दिल्ली में मोदी को घेरने में लगे राहुल गंाधी को उनके संसदीय क्षेत्र अमेठी में मोदी टीम विकास के सहारे एड़ी के बल घसीटने को मजबूर कर देना चाहती है।यह सब पांच साल बाद की प्लानिंग के तहत हो रहा है।यानी 2019 के चुनाव में जब राहुल गांधी कांगे्रस की तरफ से प्रधानमंत्री पद के दावेदार होंगे जिसकी काफी संभावना है तो उन्हें गांधी खानदान की उस परम्परागत सीट को बचाना आसान नहीं होगा जहां से उनसे(राहुल गांधी)पहले कभी कभी संजय गांधी,राजीव गांधी और सोनिया गांधी विजय हासिल कर दिल्ली में अपना रूतबा कायम कर चुकी हैं।

भाजपा ने संजय सिंह के मुह मोड़ने के बाद अब उनके पुत्र युवराज अनंत विक्रम का सहारा लिया है,जो कुछ माह पूर्व अपने पिता संजय सिंह और सतौली माॅ अनीता सिंह से विरासत के झगड़े के बाद सुर्खिंयों में आये थे।विरासत की जंग में अमेठी की जनता ने युवराज का साथ दिया जिसका उन्हें फायदा भी मिला।यह जंग जीतने के बाद अब युवराज भाजपा के सहारे सियासत की बिसात पर भी अपने पिता संजय सिंह को पटकनी देने के लिये गोंटे बिछाने लगे हैं।इसके लिये वह अपने बाबा राजा रणंजय सिंह और स्थानीय जनता की इच्छा का सहारा लेते हुए जनता को बता रहे हैं कि राजा रणंजय सिंह तो जनसंघी थे।जनसंघ से ही वह पहले सांसद और फिर विधायक बने थे।यानी संजय सिंह ने अपने पिता के साथ राजनैतिक ‘धोखेबाजी’ की।सब कुछ ठीकठाक रहा तो 21 दिसंबर को अनंत लखनऊ में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर लेंगे।उनके साथ ही विदेश में रह रही उनकी बहन भी ऑन लाइन भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर सकती हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस से राज्यसभा सांसद डा. संजय सिंह के पुत्र अनंत विक्रम सिंह को पार्टी में शामिल कराने की बिसात बिछाकर भाजपा ने अमेठी का सियासी गढ़ जीतने की रणनीति तैयार की है तो अनंत ने भी अपने भाजपा में जाने की पुष्टि की।यहां यह बता देना जरूरी है कि अमेठी में कांगे्रस दो बार को छोड़कर हमेशा अजेय रही है।एक बार इमरजेंसी के बाद हुए आम चुनाव में यहां से जनता पार्टी के रविन्द्र प्रताप सिंह की जीत हासिल हुई थी,दूसरी बार 1998-1999 में भाजपा ने यहां संजय सिंह के सहारे ही जीत का सेहरा बांधा था,यह और बात थी तब गांधी परिवार का कोई सदस्य तो मैदान में नहीं था,लेकिन उनके सबसे विश्वास पात्र कैप्टन सतीश शर्मा को हार का सामना करना पड़ा था।

खैर,अब गांधी परिवार की सियासती जमीन हिलाने के लिये उसने संजय सिंह की जगह उनके पुत्र अंनत पर दाॅव चला है। युवराज ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा भी है कि वह भाजपा में शामिल होकर बुढ़ऊ महराज (दादा रणंजय सिंह) का सपना सच करेंगे।गौरतलब हो अमेठी सियासत का वह केंद्र बिंदु है जिसे जीतने की चाहत हमेशा से ही हर दल की रही है।अनंत विक्रम सिंह 21 दिसंबर को लखनऊ में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में दल बल के साथ पार्टी में शामिल होंगे। इसे वह अमेठी की जनता का आदेश बता रहे हैं।उन्होंने कहा कि अमेठी की जनता चाहती है कि वह राजनीतिक पारी की शुरुआत करें। भाजपा जो दायित्व सौंपेगी, उसे पूरा करेंगे। अनंत के मुताबिक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी और संगठन मंत्री सुनील बंसल से उनकी बात हो चुकी है।

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संजय सक्‍सेना
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी संजय कुमार सक्सेना ने पत्रकारिता में परास्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद मिशन के रूप में पत्रकारिता की शुरूआत 1990 में लखनऊ से ही प्रकाशित हिन्दी समाचार पत्र 'नवजीवन' से की।यह सफर आगे बढ़ा तो 'दैनिक जागरण' बरेली और मुरादाबाद में बतौर उप-संपादक/रिपोर्टर अगले पड़ाव पर पहुंचा। इसके पश्चात एक बार फिर लेखक को अपनी जन्मस्थली लखनऊ से प्रकाशित समाचार पत्र 'स्वतंत्र चेतना' और 'राष्ट्रीय स्वरूप' में काम करने का मौका मिला। इस दौरान विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं जैसे दैनिक 'आज' 'पंजाब केसरी' 'मिलाप' 'सहारा समय' ' इंडिया न्यूज''नई सदी' 'प्रवक्ता' आदि में समय-समय पर राजनीतिक लेखों के अलावा क्राइम रिपोर्ट पर आधारित पत्रिकाओं 'सत्यकथा ' 'मनोहर कहानियां' 'महानगर कहानियां' में भी स्वतंत्र लेखन का कार्य करता रहा तो ई न्यूज पोर्टल 'प्रभासाक्षी' से जुड़ने का अवसर भी मिला।

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