लाइक, कमैंट और शेयर की दुविधा

कुछ जरूरी टिप्स
 केवल कृष्ण पनगोत्रा

लाइक, कमैंट और शेयर। यानि पसंद करें, टिप्पणी करें या फिर सांझा करें। कभी-कभी सोशल मीडिया साइटस् पर कुछ ज्यादा ही संदेश मिलना शुरू हो जाते हैं। कई मित्रों के साथ भी ऐसा होता है। लेकिन जब आप अपने या किसी अन्य मित्र के पोस्ट किसी साइट पर शेयर करते हैं तो हर मनुष्य की स्वाभाविक मनोदशा यह रहती है कि उक्त संदेश, चाहे वह आपकी अभिव्यक्ति का कोई भी रूप हो, लाइक करने के अलावा टिप्पणी सहित शेयर भी किया जाए। यदि आपके संदेश की लाइक, कमैंट और शेयर के आप्शन में से एक भी प्रतिक्रिया नहीं मिलती तो क्षणिक भर थोड़ी सी निराशा भी होती होगी। ऐसे में यह जरूरी है कि लाइक, कमैंट और शेयर जैसे विकल्पों का कब और कैसे पालन किया जाए ताकि मित्र आपकी मित्रता से संतुष्ट रह सकें।

1. लाइक का उपयोग:
किसी सामान्य फोटो या छोटे संदेश को लाइक किया जा सकता है, बशर्ते कि उसमें किसी गहन सोच या दर्शन के तत्व न हों।
किसी छोटे से कथन में एक परिपूर्ण दर्शन समायोजित हो सकता है। ऐसे संदेश पर टिप्पणी भी की जा सकती है और दूसरों के साथ शेयर भी, ताकि अच्छी बात का प्रसार हो।
2. कमैंट का उपयोग:
जैसा कि उपरोक्त बिंदू में बताया गया है कि कमैंट का उपयोग किसी गहन चिंतनतत्वीय लघु संदेश पर भी किया जा सकता है, लेकिन आमतौर पर कमैंट किसी ऐसे संदेश पर ही किया जाना चाहिए जिसके कांटैंट यानि विषय वस्तु टिप्पणी की स्वाभाविक मांग कर रहा हो।
कमैंट विकल्प को हलके में नहीं लेना चाहिए। यह एक प्रकार से आपकी बौद्धिक क्षमता का मापदंड समझा जा सकता है।
उदाहरणतः एक रोज मैंने मात्र दो पंक्तियों पर आधारित एक शे’र फेसबुक पर पोस्ट किया। मेरी दृष्टि में एक मित्र ने जो टिप्पणी की, मुझे पसंद नहीं आई। मैंने कोई प्रतिटिप्पणी नहीं की। इस पोस्ट पर करीब पच्चास लाइक और इससे भी ज्यादा कमैंट प्राप्त हुए। आश्चर्य की बात यह रही कि मात्र एक कमैंट के किसी ने भी मेरी दृष्टि में प्रतिकूल या निराशाजनक टिप्पणी नहीं की। आप समझ सकते हैं कि छिछोरी टिप्पणी करने वाले सज्जन की इस पोस्ट पर कैसी मनोदशा रही होगी? यदि आपको टिप्पणी पर कोई तार्किक या प्रासंगिक बात न सूझे या फिर पोस्ट की अवधारणा का भान न हो तो बेहतर होगा कमैंट से बचा जाए।
3. शेयर का उपयोग:
शेयर यानि किसी संदेश को साझा करने की महत्ता लाइक और कमैंट से कहीं ज्यादा रहती है। हर मनुष्य की स्वाभाविक मनोदशा और रुचि रहती है। उसी के अनुसार किसी संदेश को दूसरों के साथ साझा किया किया जाता है।
कई बार कुछ पोस्ट की शब्द संख्या ज्यादा होती है या फिर यह कोई पठनीय लेख-आलेख अादि होता है। ऐसे पोस्ट अक्सर बौद्धिकजनों के होते हैं। अगर ऐसी पोस्ट किसी पत्र-पत्रिका या बेब पत्रिका में पूर्व प्रकाशित भी होते हैं। ऐसे पोस्ट को अवश्य पढ़ना चाहिए और तत्पश्चात सोच कर कमैंट करना चाहिए , क्यों कि आपका संवाद किसी बुद्धिजीवी से हो रहा है।
सर्वविदित है कि सोशल मीडिया इन दिनों प्रचार प्रसार का एक सशक्त माध्यम है। आप घर बैठे लाखों-करोड़ों लोगों से संवाद और संपर्क स्थापित कर सकते हैं और अपनी पहचान बना सकते हैं।
वैसे लाइक, कमैंट और शेयर के लिए कहीं कोई विशेष वैधानिक शर्तें तो स्थापित नहीं की गई हैं, फिर भी आपका कमैंट और शेयर आपकी सूझबूझ का परिचायक होता है।
सोशल मीडिया के दुरुपयोग के दृष्टिगत आजकल कई कायदे बनाए गए हैं, जिन्हें ध्यान में रखना भी आवश्यक है।

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