लेखक परिचय

लिमटी खरे

लिमटी खरे

हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

Posted On by &filed under कला-संस्कृति.


लोस अध्यक्ष मीरा कुमार ने किया उद्घाटन

लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने बुधवार को भोपाल में देश के संसदीय इतिहास पर आधारित प्रदर्शनी का उद्धाटन किया। इस मौके पर राज्यसभा के उपाध्यक्ष के. रहमान, विधानसभा के अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी, उपाघ्यक्ष हरवंश सिंह सहित विभिन्न राज्यों से आए पीठासीन अधिकारी उपस्थित थे।

भारत की विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के अवसर पर विधानसभा परिसर में लगी ”भारत में लोकतंत्र अतीत से वर्तमान तक” प्रदर्शनी में भारत में वैदिक काल से चली आ रही लोकतांत्रिक परंपरा में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, भारत के संविधान व भारतीय संसद के कामकाज पर चित्रों, लेखों पर भी प्रकाश डाला गया है।

संसदीय संग्रहालय एवं डीएवीपी द्वारा लगाई गई इस प्रदर्शनी में भारत की संघीय व्यवस्था व देश के विभिन्न राज्यों में संसदीय ढांचे, विशेषकर भोपाल में संसदीय गतिविधियों पर रोशनी डाली गई है। लोकसभा अध्यक्ष व अन्य अतिथियों ने इस प्रदर्शनी का गहराई से अवलोकन किया। श्रीमती मीरा कुमार ने आगंतुक पुस्तका पर लिखे संदेश में इस प्रदर्शनी की भव्यता की प्रशंसा की। इस दौरान मध्यप्रदेश के विकास को दर्शाती एक अन्य प्रदर्शनी का उन्होंने अवलोकन किया।

13 भागों में विभक्त यह प्रदर्शनी प्राचीनकाल से आज तक की संसदीय संस्थाओं तक देश में लोकतांत्रिक परंपराओं पर विशेष बल देती है। जिनमें ऋग्वेद व महात्मा बुद्ध के काल सम्मिलित हैं।

यह प्रदर्शनी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, भारत के संविधान व भारतीय संसद के कामकाज पर चित्रों, लेखों, चार्ट, समाचार पत्रों की कतरनों इत्यादि द्वारा प्रकाश डालती है। यह प्रदर्शनी भारत की संघीय व्यवस्था व देश के विभिन्न राज्यों में संसदीय ढांचे, विशेषकर भोपाल में संसदीय गतिविधियों पर भी प्रकाश डालती है।

कम्प्यूटर, मल्टीमीडया व एलसीडी पर दृश्य-श्रव्य के माध्यम से इस प्रदर्शनी को और भी आकर्षक बना दिया है। आगंतुक यहां ऋग्वेद के श्लोकों और बौद्ध भिक्षुओं द्वारा पाली भाषा में गाए गए श्लोकों को सुन सकते हैं।

महात्मा गांधी, पं. जवाहर लाल नेहरु, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर व नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आवाजें भी सुनी जा सकती हैं। कम्प्यूटर मल्टीमीडिया पर आगंतुक भारतीय संविधान की स्केन की गई प्रति भी देख सकते हैं। प्रदर्शनी में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण क्षण व भारत में चुनाव प्रक्रिया को भी प्रदर्शनी में दर्शाया गया है।

-लिमटी खरे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *