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    Homeशख्सियतसमृद्धि से सेवा की विरासत के अग्रदूत हैं के. एल. जैन

    समृद्धि से सेवा की विरासत के अग्रदूत हैं के. एल. जैन


    -ः ललित गर्ग:-

    राजस्थान के मारवाड़ी समाज में ऐसे अनेक विलक्षण व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने अपने सद्पुरुषार्थ से असंभव को संभव कर दिखाया है। समृद्धि के नये इतिहास गढ़ने वाला यह समाज सेवा के शिखर भी निर्मित करता रहा है। इतिहास में कई मौके आए, जब इस समाज की अनेक प्रतिभाओं ने अदम्य साहस का परिचय देकर दुनिया में अपने नाम को अमर किया। ऐसे लोगों के सही दिशा में किये गये पुरुषार्थ के साथ जब भाग्य का सुयोग मिला तो सफलताएं उनके कदम चूमती हुई देखी गयी हैं। ऐसा ही एक विलक्षण व्यक्तित्व है कन्हैयालाल जैन पटावरी, जिन्होंने 60 वर्ष पूर्व मात्र 75 रुपये से व्यापारिक संघर्ष की शुरुआत की और आज 8000 करोड़ रुपये का टर्नओवर के साथ अनेक कंपनियों के मालिक हैं। अपने दृढ़ निश्चय, अटूट संकल्प, सर्वात्मना समर्पण, बेजोड़ हौसले और उम्दा जज्बे के दम पर भारत सहित विभिन्न देशों में अपने व्यावसायिक उपक्रमों को नये आयाम देते हुए न केवल जैन समाज बल्कि संपूर्ण भारतीय उद्यम जगत के एक चमकते सितारे बन गये हैं। सच उनके साथ है, जनकल्याण की भावना से ओतप्रोत होकर जो उन्हें सही लगा, वही उन्होंने किया और समृद्धि से सेवा की विरासत के अग्रदूत बने।
    श्री के. एल. जैन ने हाल ही में आईआईएफएल वेल्थ हुसन इंडिया रिच लिस्ट 2022 में भारत के सबसे अमीर लोगों में 323वां स्थान प्राप्त कर न केवल मोमासर बल्कि तेरापंथ समाज का गौरव बढ़ाया है। वे एक सच्चे अर्थों में सफल उद्यमी एवं अर्थ के शिखरपुरुष हैं। आर्थिक जगत में शुचिता की बात करने वाले और प्रामाणिकता व शुद्ध साधन से कमाई का पक्ष लेने वाले श्री जैन वर्तमान के व्यवसायियों के लिए आदर्श हैं। वे न केवल व्यवसाय एवं उद्योग के आदर्श हैं बल्कि एक समाज-निर्माता और संवेदनशील जनसेवक हैं। वे गहन आध्यात्मिक हैं तो विनम्र साधक भी हैं। उनकी सहृदयता, मानवीयता और आत्मीयता प्रेरणादायक है। श्री जैन की आर्थिक उपलब्धियों, समाज एवं राष्ट्र सेवाओं, उनके आदर्शों, नैतिकता, सदाचार से जुड़े जीवनक्रम और भावी पीढ़ी के लिए आर्थिक, आध्यात्मिक और सामाजिक प्रेरणाओं का एक प्रेरक एवं अनूठा इतिहास है।
    धार्मिकता से उन्हें विशेष लगाव है और वे धर्मप्रेमी भी हैं। वे स्वयं को ईश्वर से डरने वाला व्यक्ति मानते हैं। वे कहते हैं कि मैं निश्चित तौर पर इस बात में यकीन करता हूं कि कोई ऐसी शक्ति है जो मेरा मार्गदर्शन करती है, जिसे मैं ईश्वर कह सकता हूं। जीवन केवल मेरे और मेरे प्रयासों के बारे में नहीं हो सकता और अच्छी बात यह है कि यह शक्ति मुझे सही दिशा में निर्देश देती है। उनको यह शक्ति अदृश्य ईश्वर के साथ-साथ उनके गुरु भी देते हैं। यही कारण है कि तेरापंथ के तीन-तीन आचार्यों- गुरु आचार्य तुलसी, आचार्य महाप्रज्ञ एवं वर्तमान आचार्य महाश्रमण का उन्हें वरदहस्त प्राप्त है और उनके द्वारा समय-समय पर उनकी विशिष्ट संघ सेवाओं एवं कर्तृत्व की ऊंचाई का आलौकिक अंकन होता रहा हैं। पूज्यवरों ने जहां उन्हें ‘शासनसेवी’ सम्बोधन प्रदत्त किया वहीं अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद ने अपना सर्वोच्च अलंकरण ‘युवक रत्न’ उन्हें प्रदत्त किया। संपूर्ण तेरापंथ समाज, जैन समाज, धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक संस्थाएं आदि आकर आपसे जुड़ते रहे हैं। उनका परिचय प्रवेश दिल्ली, राजस्थान और संपूर्ण भारत तक विस्तीर्ण हो गया। आपकी धर्मपत्नी नारी रत्न श्रीमती सुशीला पटावरी ने आपके विकास की यात्रा में कदम से कदम मिलाकर सहयोग किया।
     श्री कन्हैयालालजी जैन सफलताओं एवं उपलब्धियों को गढ़ने वाले महान शिल्पी हैं, उनके द्वारा स्थापित केएलजे ग्रुप एक बहु उत्पादकीय कंपनी है जो भारत सहित विभिन्न देशों में है। केएलजे ग्रुप एक बहु-उत्पाद और विभिन्न स्थानों पर अवस्थित एक प्रतिष्ठित व्यापार समूह है। उसके पीछे श्री कन्हैयालालजी जैन का नींव में दिया गया समय, श्रम, मौलिक सोच और सूझबूझ प्रेरणास्पद है। केएलजे ग्रुप एक विश्वव्यापी ब्रांड है। इस विशाल ग्रुप को उनके तीनों पुत्रों द्वारा बखूबी आगे बढ़ाया जा रहा है। श्री हेमंत जैन केएलजे रिसोर्सेज लिमिटेड, श्री कमल जैन केएलजे पॉलीमर्स एण्ड केमिकल्स लिमिटेड और श्री पुष्प जैन केएलजे आर्गेनिक लिमिटेड के मैनेजिंग डॉयरेक्टर हैं। श्री जैन ने व्यावसायिक क्षमताओं, औद्योगिक कुशलताओं, आत्मप्रेरणा, सेवाभावना, समर्पण एवं आध्यात्मिक निष्ठा के बल पर न केवल राजस्थान बल्कि समूचे राष्ट्र में कीर्ति अर्जित की है।
    व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास तब होता है जब वह अपने पुरुषार्थ के साथ-साथ अपनी सेवा और परोपकारवृत्ति से समाज के सम्मुख व्यक्त होता है। धनोपार्जन तो हजारों-लाखों लोग करते हैं परंतु अपने व्यक्तिगत गुणों एवं परमार्थ कार्यों से किसी सुकृत कीर्तिवान का अभिनंदनीय स्थान प्राप्त करना किसी-किसी सौभाग्यशाली को ही प्राप्त होता है। अपने ग्राम मोमासर के विकास के लिए आप सदैव तत्पर रहते हैं। आप द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं जनकल्याण के क्षेत्र में बहुत ही सराहनीय कार्य किये जा रहे हैं। मोमासर में एक विद्यालय भवन बनवाकर राजस्थान सरकार को दिया जहां बारहवीं तक की छात्राओं का अध्ययन सुचारू रूप से संचालित है। यह किसी निजी विद्यालय से कम नहीं है। नई दिल्ली में सुमेरमल जैन विद्यालय संचालित है जहां 2400 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। मोमासर ग्राम की संपूर्ण स्ट्रीट लाइट आपके द्वारा संचालित है, पंचायत भवन का निर्माण भी आपने कराया है।
    कोरोना काल के भीषण संकट में आपका हृदय द्रवित हो उठा, इस आपदा की घड़ी में केन्द्र सरकार, दिल्ली सरकार एवं राजस्थान सरकार को करोड़ा रुपये का मुक्तहस्त सहयोग किया। मोमासर में सैंकड़ों ऑक्सीजन सिलिंडर, दवाइयां तथा हजारों परिवारों को राशन दिया गया, वहीं पर दादाबाडी का भव्य रूप में निर्माण आपके सहयोग से हो रहा है। राजस्थान सरकार ने आपको भामाशाह सम्मान से सम्मानित किया है, ऐसे अनेक सम्मान आपको समय-समय पर प्राप्त होते रहे हैं। कन्हैयालालजी ने अपने पुरुषार्थ के साथ सरलता, शालीनता, पवित्रता, अनुशासनप्रियता, विनम्रता, उदारता, व्यवहार-कुशलता, सेवापरायणता आदि श्रेष्ठताओं से आदरणीय व्यक्तित्व का स्थान पाया।  2 जनवरी 1947 को अपने ननिहाल राजलदेसर में मातुश्री इंदिराबाई की कुक्षि से जन्मे और पिताश्री सुमेरमल पटावरी के संरक्षण में पले बढ़े श्री जैन बचपन से ही तीक्ष्ण बुद्धि से संपन्न थे। पिताश्री सुमेरमलजी को व्यापार के लिए मण्डी डबवाली में रहने के कारण श्री जैन का शैशव और बचपन पंजाबी माहौल में बीता।
    साहस और संकल्पों के साथ सच्चाई के रास्ते से सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचने वाले श्री जैन अपने संयुक्त परिवार को जोड़कर रखे हैं। वे देश के बड़े व्यावसायियों से अपेक्षा करते हैं कि अर्थ के शिखरों के साथ-साथ परिवार की एकता को सुनिश्चित रखें। 75 वर्षीय श्री जैन उम्र के ढलान के बावजूद सदैव मुस्कुराते हुए दिखाई देते हैं। कभी भी जोश में न तो कमी दिखती है और न ही चेहरे पर थकान। इनका मानना है कि जीने को तो जीवन सभी जीते हैं किन्तु सफल जीवन वह है जो औरों के लिए जिया जाए। हिम्मत और हौसले में बड़ी ताकत होती है। यह ताकत जीरो को हीरो बना सकती है। तभी तो कहते हैं कि मन के हारे हार, मन के जीते जीत।
    श्री कन्हैयालालजी जैन के बारे में कहा जा सकता है कि वे चारित्रिक उच्चता के धनी हैं। सहजता, सरलता और सादगी उनके अप्रतिम गुण हैं। उम्र के साथ-साथ मनुष्य का ज्ञान और स्वभाव बदलता है लेकिन श्री जैन का मन और स्वभाव दोनों ही उम्र के बढ़ने के साथ-साथ भी अपनी सहजता में स्थिर है। वे अपने गहन अनुभव एवं आध्यात्मिकता के कारण छोटी-छोटी घटना को गहराई प्रदत्त कर देते हैं। अपने आस-पास के वातावरण को ही इस विलक्षणता से अभिप्रेरित करते हैं। उनकी सहजता और सरलता में गोता लगाने से ज्ञात होता है कि वे गहरे मानवीय सरोकार एवं सम्यक आर्थिक सोच से ओतप्रोत एक अल्हड़ व्यक्तित्व हैं। वे समृद्धि से सेवा की विरासत को गढ़ने वाले एक प्रेरक व्यवसायी हैं।

    ललित गर्ग
    ललित गर्ग
    स्वतंत्र वेब लेखक

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