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    Homeआर्थिकीभारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी व्यापार का बढ़ रहा योगदान

    भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी व्यापार का बढ़ रहा योगदान

    भारतीय अर्थव्यवस्था में विकास दर सामान्यतः उत्पादों की आंतरिक मांग पर अधिक निर्भर करती है परंतु वित्तीय वर्ष 2021-22 में विदेशी व्यापार भी भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने में अपनी महती भूमिका निभाते नजर आ रहा है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत से 40,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि के वाणिज्यिक उत्पादों के निर्यात होने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है जो वित्तीय वर्ष 2020-21 में किए गए 29,063 करोड़ अमेरिकी डॉलर की तुलना में 38 प्रतिशत अधिक होने जा रहा है एवं वित्तीय वर्ष 2019-20 में किए गए 30,398 करोड़ अमेरिकी डॉलर की तुलना में 32 प्रतिशत अधिक रहेगा। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ के अनुमान के अनुसार आगे आने वाले वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत से 47,500 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि के वाणिज्यिक उत्पादों का निर्यात होने की सम्भावना है।

    निर्यात-आयात बैंक के एक अन्य अनुमान के अनुसार वित्तीय वर्ष 201-22 के प्रथम नौ माह (अप्रेल-दिसम्बर 2021) के दौरान भारत से वाणिज्यिक उत्पादों का निर्यात 51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 30,398 करोड़ अमेरिकी डॉलर के होने जा रहा है। इसी वृद्धि दर को जारी रखकर वित्तीय वर्ष 2021-22 के निर्धारित लक्ष्य को आसानी हासिल कर लिया जाएगा, ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है।

    वित्तीय वर्ष 2021-22 में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर लगभग 10 प्रतिशत के आसपास रहने की सम्भावना है जबकि इसी अवधि में वाणिज्यिक उत्पादों के निर्यात में वृद्धि दर 38 प्रतिशत रहने की सम्भावना है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि भारत की विकास दर में अब विदेशी व्यापार की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है जो कि एक अच्छा संकेत है।

    भारत से निर्यात किए जा रहे उत्पादों की टोकरी में शामिल विभिन्न उत्पादों का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि देश से रोजगारोन्मुखी उद्योगों के उत्पाद तेज गति से बढ़ रहे हैं। यह देश के लिए हर्ष का विषय होना चाहिए क्योंकि इन उद्योगों से निर्यात के साथ साथ रोजगार के नए अवसर भी पर्याप्त मात्रा में निर्मित हो रहे हैं। भारत से निर्यात होने वाले 80 उत्पादों की, देश से होने वाले कुल निर्यात में, 50 प्रतिशत से अधिक की भागीदारी है। इन उत्पादों में विशेष रूप से शामिल हैं पेट्रोलीयम उत्पाद, कृषि उत्पाद, मछली एवं मांस के उत्पाद, केमिकल उत्पाद, दवाईयों के उत्पाद, धातु के उत्पाद, ऑटो, रेल, पानी के जहाज एवं हवाई  यातायात के उपकरण, आदि। वित्तीय वर्ष 2012-13 में भारत से होने वाले कुल निर्यात के 50 प्रतिशत भाग में केवल 20 उत्पादों का ही योगदान रहता था। इस प्रकार इन 8 वर्षों के दौरान देश से निर्यात किए जाने वाले उत्पादों की टोकरी में शामिल उत्पादों का अच्छा विस्तार हुआ है।

    कृषि क्षेत्र से निर्यात का बढ़ना भी देश के लिए हर्ष का विषय है। क्योंकि इससे किसानों की आय में वृद्धि दृष्टिगोचर है। वैसे भी हमारे देश में लगभग 60 प्रतिशत आबादी अभी भी ग्रामों में ही निवास करती है जो अपनी आजीविका के लिए मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र पर ही निर्भर है। देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का केवल 16 से 18 प्रतिशत तक का योगदान रहता है। ऐसे में यदि कृषि क्षेत्र से निर्यात बढ़ रहे हैं तो इससे किसानों की आय में वृद्धि हो रही है और देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान बढ़ने के आसार नजर आने लगे हैं एवं इस प्रकार ग्रामीण इलाकों में गरीबी में कमी आने की सम्भावना बनती नजर आ रही है।

    कृषि के क्षेत्र में भारतीय किसान ने अपनी मेहनत के बल पर एवं सरकारी नीतियों को लागू करते हुए, कृषि उत्पादों की पैदावार को मांग की तुलना में आपूर्ति आधिक्य की श्रेणी में ला खड़ा किया है। अब भारतीय कृषि क्षेत्र में उत्पादों की पैदावार में आधिक्य रहने लगा है और देश के किसान लगातार साल दर साल बहुत अच्छा उत्पादन करते दिख रहे हैं। विशेष रूप से सरकारी नीतियां एवं उत्पादकता में हो रही वृद्धि भी इस बढ़ती पैदावार में अहम भूमिका अदा कर रही है।

    केंद्र सरकार, राज्य सरकार एवं कृषि संस्थानों ने कृषि के क्षेत्र को कई तरह के प्रोत्साहन उपलब्ध कराए हैं। इसके लिए विशेष रूप से कई नई योजनाएं भी लागू की गई हैं। कृषि  उत्पादों की गुणवत्ता में बहुत सुधार किया गया है, जिसके चलते भी विदेशों में भारतीय कृषि उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। यह पता करने के लिए कि किन किन देशों में किस किस कृषि उत्पाद की कमी है, विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों की भी मदद ली गई है, ताकि इन देशों को कृषि उत्पाद भारत से उपलब्ध कराये जा सके। कृषि उत्पादों की मार्केटिंग एवं निर्यात के लिए सम्पर्क तंत्र को मजबूती प्रदान की गई। कृषि उत्पाद के विदेशी खरीदारों एवं भारत के किसानों की आपस में मीटिंग कराई गई। इसके लिए एक पोर्टल भी बनाया गया है ताकि क्रेता एवं विक्रेता सीधे ही एक दूसरे से माल खरीद एवं बेच सकें। इस संदर्भ में किसानों ने भी कम मेहनत नहीं की है। आत्मनिर्भर भारत, वोकल फोर लोकल एंड लोकल से ग्लोबल, जैसे नारों ने भी देश से कृषि उत्पादों के निर्यात में लगातार हो रही वृद्धि में अपनी अहम भूमिका अदा की है।

    हमारे उत्तर पूर्वी राज्यों ने बागवानी की पैदावार में गुणवत्ता की दृष्टि से बहुत विकास किया है। इन राज्यों से बागवानी से हुई पैदावार का बहुत निर्यात हो रहा है, विशेष रूप से दुबई आदि देशों को। विशेष रूप से फल एवं सब्जियां बहुत जल्दी खराब हो जाती हैं, अतः  इनके भंडारण के लिए बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है ताकि इन पदार्थों का उचित भंडारण किया जा सके। अब तो दक्षिणी अमेरिकी देशों एवं अमेरिका को भी कृषि उत्पादों का निर्यात किया जाने लगा है। अफ्रीकी देशों को भी कृषि उत्पादों के निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है। उच्च मूल्य वाले कृषि उत्पादों का भी निर्यात अब तेजी से बढ़ रहा है जैसे आम, अंगूर, आदि पदार्थ यूरोपीयन देशों एवं अमेरिका को निर्यात किए जा रहे हैं। अंगूर का निर्यात हाल ही में शुरू किया गया है। जापान, दक्षिणी कोरीया जैसे देशों में भी अब भारतीय कृषि उत्पादों के प्रति रुझान बढ़ रहा है।

    भारत सदियों से मसाला उत्पादन के क्षेत्र में हमेशा ही पूरे विश्व में सबसे आगे रहा है। आज भी यह स्थिति बरकरार है। पिछले सात सालों में भारत में मसालों का उत्पादन 60 प्रतिशत बढ़कर वित्तीय वर्ष 2020-21 में 106.79 लाख टन के स्तर पर पहुंच गया है, जो कि एक रिकार्ड है। भारत में वित्तीय वर्ष 2014-15 में मसालों का उत्पादन 67.64 लाख टन का रहा था। मसालों के उत्पादन में हो रही वृद्धि के साथ साथ मसालों के उत्पादन क्षेत्र में भी वृद्धि दृष्टिगोचर है जो इसी अवधि के दौरान 32.24 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 45.28 लाख हेक्टेयर हो गया है। भारत में विशेष रूप से मिर्च, अदरक, हल्दी और जीरा जैसे मसालों के उत्पादन में शानदार वृद्धि हुई है और इनके निर्यात भी बहुत तेजी से बढ़े हैं। वित्तीय वर्ष 2014-15 में भारत से 14,899 करोड़ रुपए का 8.94 लाख टन मसालों का निर्यात हुआ था जो वित्तीय वर्ष 2020-21 में लगभग दुगना होकर 29,535 करोड़ रुपए का 16 लाख टन मसालों का निर्यात हुआ है।

    भारत सरकार ने हाल ही में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना प्रारम्भ की है तथा निर्यातकों को अन्य प्रकार के प्रोत्साहन (यथा निर्यातकों द्वारा कच्चे माल एवं परिष्कृत किए जा रहे माल पर राज्य एवं केंद्र सरकार को अदा किए गए विभिन्न प्रकार के करों की निर्यातकों को वापसी) आदि भी दिए जा रहे हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत शामिल किए गए विभिन्न उद्योगों से भी अब निर्यात बहुत तेज गति से आगे बढ़ेगा। साथ ही, अब तो अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाएं भी कोरोना महामारी के असर से उबरकर पटरी पर वापिस आती जा रही हैं, इसका असर भी हमारे देश से होने वाले निर्यात पर अच्छा प्रभाव डाल रहा है। अब तो भारत में कांट्रैक्ट फार्मिंग भी होने लगी है, इससे भी कृषि उत्पादों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में बहुत सुधार होने वाला है। अतः आगे आने वाले 5 से 10 वर्षों में भारत कृषि उत्पादों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक मुख्य निर्यातक देश बन सकता है।

    प्रह्लाद सबनानी
    सेवा निवृत उप-महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक ग्वालियर मोबाइल नम्बर 9987949940

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