“सत्यमेव जयते” संग “शक्तिमेव जयते” का उपयुक्त समय

संदर्भ: कमल हासन

दक्षिण व मुम्बईया फिल्मों में लम्बी पारी खेल चुके कमल हासन अपने व्यक्तिगत जीवन के सम्बंधों में एक असफल व्यक्ति रहे हैं. जिन्हें हम जीवन सम्बंध कहते हैं व उनके प्रति निष्ठावान व गंभीर रहते हैं ऐसे उनके जीवन सम्बंध अत्यंत तदर्थ, अस्थायी व विवादास्पद ही नहीं बल्कि हास्यास्पद और भोंडे प्रकार के रहे हैं. फिल्मों में काम करना और धन कमाना यह कमल हासन का अब तक का जीवन ध्येय रहा है. सार्वजनिक जीवन के नाम पर अब उन्हें फिल्मों के अतिरिक्त कोई मंच खोजने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी है. कमल हासन के सार्वजनिक सरोकार या यूं कहें कि उनका समाज से लेना देना शून्य ही रहा हैं. भारतीय समाज से जितना उन्होंने लिया है उसका सहस्त्रांश भी लौटाने का सामाजिक दायित्व बोध उनमें अब तक कभी देखा नहीं गया है. समाज से फिल्मों में समाप्त होते कैरियर व परिवार में बिखरते रिश्तों में उलझे कमल हासन को अब राजनीति में अपना कैरियर बनाना है तो कुछ न कुछ तो वितंडा खड़ा करना ही पड़ेगा न ?! सो उन्होंने हिंदू आतंकवाद का भूत खड़ा करने का प्रयत्न कर लिया. इन दिनों राजनीति में प्रवेश करने हेतु भारत भर के मोदी विरोधी नेताओं के द्वारों पर माथा टेकते कमल हासन जीवन भर कभी किसी  जन आंदोलन, जन समस्या, जन विषय से जुड़े नहीं रहे. जनता से उनका सीधा सम्बंध कभी रहा नहीं, अब ऐसे व्यक्ति को यदि राजनीति में आना है तो प्याले में तूफ़ान तो पैदा करना ही पड़ेगा और इसके लिए हिंदुत्व से छेड़छाड़ से अच्छा कोई अन्य विषय हो नहीं सकता (ऐसा कमल हासन को लगता है). तो ऐसा ही कर लिया कुछ कमल हासन ने, हिंदू आतंकवाद का विषय उठाकर.

‘आनंद विकतन’ नामक पत्रिका के अपने लेख में हासन ने लिखा है, ‘गुजरे जमाने में हिंदू दक्षिणपंथी अन्य धार्मिक समूहों के साथ अपने विवादों पर सिर्फबौद्धिक तर्क वितर्क या शास्त्रार्थ किया करते थे, लेकिन जैसे ही यह तरीका नाकाम होने लगा, वे बाहुबल का सहारा लेने लगे और अब उन्होंने हिंसा का रास्ताअख्तियार कर लिया है. अब हिंदू दक्षिणपंथी दूसरे समूहों के अतिवाद पर उंगली नहीं उठा सकते हैं क्योंकि उनके अंदर भी इसी तरह के तत्व मौजूद हैं।’
इस लेख में कमल हासन ने हिन्दुओं के बाहुबल प्रदर्शन को तमिलनाडु के धार्मिक उत्सवों से भी जोड़ा है.  गणेश चतुर्थी पर्व को भी  व्यक्तिगत स्तर पर मनाया जाने त्यौहार बताया और कहा है कि पहले लोग अपने घरों में मिट्टी से बने गणपति की स्थापना करते थे लेकिन हाल के वर्षों में यहां भी मुंबई की तरह सार्वजनिक स्तरपर गणेश उत्सव का आयोजन होने लगा है.  प्लास्टर ऑफ पेरिस की विशालकाय मूर्तियों की स्थापना की जा रही है और विसर्जन के दिन भारी-भरकम जुलूसनिकाले जा रहे हैं.
प्रश्न यह कि अपनी राजनैतिक पारी की तैयारी कर रहे कमल हासन को यह सब कुछ अब ही क्यों दिखा? यह भी प्रश्न है कि उन्हें केवल हिंदुत्व में ही धार्मिक अतिवाद क्यों दिखा?! निश्चित ही इसका उत्तर केवल यही है, और यह उत्तर उनके हिंदू अतिवाद के दावे को झूठलाता भी है, कि सभी धर्मों में केवल हिंदुत्व पर हमला ही सर्वाधिक सुरक्षित है. उन्हें इस बात की ग्यारंटी रही कि यदि वे हिंदूत्व की आलोचना करते हैं तो उन्हें अतिवादियों का सामना नहीं करना पड़ेगा व साथ ही साथ वे राजनीति के चमकते सितारे भी बन जायेंगे.

निश्चित ही भारत में हिंदुत्व के लिए यह सर्वाधिक निराशा का दौर है जबकि हिंदी, हिंदू, हिंदूत्व को सर्वाधिक साफ्ट मटेरियल समझकर जो चाहे, जब चाहे, जैसा चाहे और जितना चाहे उतना आक्रमण कर देता है.

इस पुरे प्रकरण में कमल हासन ने जो एक बात और कही वह यह है कि हिंदूत्व अब “सत्यमेव जयते” के स्थान पर “शक्तिमेव जयते” करने लगा है. समूचा विश्व जानता है कि हिंदूत्व की अवधारणा में कभी “शक्तिमेव जयते” की स्थितियों का कोई स्थान नहीं रहा. किंतु इतना अवश्य है कि जिस प्रकार की परिस्थितियाँ हिंदूत्व को लेकर बन रही हैं उन स्थितियों में हिंदू को अब “सत्यमेव जयते” के साथ साथ “शक्तिमेव जयते” का उद्घोष भी करना ही पडेगा अन्यथा “सत्यमेव जयते” का उद्घोष मद्धम, दुर्बल होकर प्रभावहीन होने के मार्ग पर बढ़ सकता है. हर हिंदू को चाहे वह किसी भी मत, पंथ, सम्प्रदाय जाति या धर्मं  का हो, निर्धन हो या धनवान हो, सामान्य हो या विशिष्ट हो; सभी को एकभाव से स्वयं को क्षमाशील, सहनशील व सौजन्यशील व विनयशील रहने के भाव को एक सीमा तक ही बांधे रहना होगा. अर्थात जैसे ही कमल हासन जैसा कोई व्यक्ति हमारी धार्मिक, सांस्कृतिक व सामाजिक पहचान पर हमला करेगा हमें उसका जवाब केवल प्रखर होकर नहीं अपितु प्रचंड होकर देना होगा.

इतना अवश्य है कि कमल हासन को वर्तमान में हिंदू समाज इतनी प्रतिक्रया अवश्य दे देवे और यह भी बता देवे कि उन्हें यह विश्वास हो जाए कि – “ यदि हिंदू आज शक्तिमेव जयते का पक्षधर होता तो कमल हासन यह सब वितंडा फैलाने का दुस्साहस न करते और इतनी मूंहफट, हलकट  वाचालता करने के बाद भी देश में इतने सुरक्षित विचरण न कर रहे होते.

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