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    Homeसाहित्‍यलेखनेक नीयत की नोक-झोंक प्यार के रंग को चोखा करती है,

    नेक नीयत की नोक-झोंक प्यार के रंग को चोखा करती है,

                    * केवल कृष्ण पनगोत्रा 
    जिंदगी समग्रता से संपूर्ण होती है और समग्रता तब आती है जब जिंदगी हर रंग से रंगी जाए.संगीत तभी संपूर्ण होता है जब सात सुरों का संगम होता है. सिर्फ एक ही सुर से न गीत मुकम्मल होता है और न ही संगीत. जैसे सात सुरों का संगीत है वैसे ही सात रंगों का रौशन संसार है. रौशनी एक ही रंग के आधीन नहीं है. जैसे रौशनी एक रंग की मोहताज नहीं, संगीत एक सुर का गुलाम नहीं, वैसे ही जिंदगी के अलग-अलग रंग हैं. कोई सुर ऊंचा है तो कोई नीचा है, कोई रंग फीका है तो कोई चोखा है.अगर जिंदगी को भी रंगों के लिहाज से देखें तो प्यार का रंग सबसे चोखा होगा. रूठना, झगड़ना, मान जाना, मनाना और नेक नीयत से की गई नोक-झोंक प्यार के रंग को संपूर्णता देती है, बाशर्त कि हर झगड़े की नीयत सकारात्मक और नेक हो, ठीक वैसे ही जैसे हर फीका और चोखा रंग इन्द्रधनुष और रौशनी को मुकम्मल करता है.
    अति सर्वत्र वर्जियेत:
    यूपी के संभल जिले में हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। 21 अगस्त, 2020 को care of media पोर्टल द्वारा प्रसारित एक खबर के अक्षरशः शब्दों के अनुसार एक महिला ने पति से तलाक मांग लिया क्योंकि उसका पति उससे बहुत ज्यादा प्यार करता था, उससे लड़ाई नहीं करता था. महिला ने शरिया अदालत का दरवाजा खटखटाया है और पति से तलाक की मांग की है.महिला से जब तलाक का कारण पूछा तो उसे सुन मौलवी भी हैरान रह गए. बाद में मौलवी ने महिला की दलील को बेमतलब बताते हुए उसकी तलाक की याचिका को खारिज कर दी. रिपोर्ट के अनुसार, जब मौलवी ने याचिका पर फैसला करने से इनकार किया, तो मामला स्थानीय पंचायत तक पहुंच गया जिसने मामले पर फैसला करने में असमर्थता जताई.शरिया अदालत में अपनी दलील में, महिला ने दावा किया कि वह अपने पति के प्यार को पचा नहीं सकती. रिपोर्ट में महिला के हवाले से लिखा गया है, “न तो पति कभी मुझ पर चिल्लाया और न ही उसने कभी किसी भी चीज को लेकर निराश किया. मैं ऐसे माहौल में घुटन महसूस कर रही हूं. कभी-कभी वह मेरे लिए खाना बनाता है और घर का काम करने में भी मेरी मदद करता है.”उन्होंने कहा, “जब भी मैं कोई गलती करती हूं, तो वह हमेशा मुझे माफ कर देता है. मैं उससे बहस करना चाहती थी. मुझे ऐसी जिंदगी की जरूरत नहीं है, जहां पति हर किसी बात के लिए सहमत हो.” इसके अलावा महिला से कोई और कारण पूछा गया तो महिला ने मना कर दिया.इस बीच, महिला के पति ने कहा कि वह हमेशा अपनी पत्नी को खुश रखना चाहता था. उन्होंने शरिया अदालत से मामला वापस लेने का अनुरोध किया है. कोर्ट ने अब इस दंपति को मामले को सुलझाने के लिए कहा है.
    इस मामले में हम क्या समझ सकते हैं? :
    अगर पत्नी पति से प्यार नहीं कर रही होती तो तलाक का कोई बहाना या आरोप लगाती. लेकिन महिला सच बोल रही है. यहां हमें उस पति को भी आफरीं कहना होगा जिसने पत्नी के साथ बहस या झगड़ा नहीं किया. झगड़ा सकारात्मक और नेक नीयत से प्रेरित हो तो प्यार के रंग को चोखा करता है. कुछ महिलाएं मायके और भाई-बहनों के प्रति अत्याधिक प्यार दिखलाती हैं मगर अंतत: यह अधिकता उनके ही परिवार को बर्बाद करती है. अति यानि excess के दुष्प्रयोग को समझने के लिए यहां एक कहानी का उद्धरण माकूल होगा. एक राजा की छह पुत्रियां थीं. राजा सबको समान प्यार करता था. एक दिन राजा ने सब पुत्रियों को एक ही सवाल पूछ लिया. सबसे पहले बड़ी पुत्री को पूछा, “बेटी, तुम मुझे कितन प्यार करती हो और तुम्हें में कैसा लगता हूं? ज्येष्ठ पुत्री ने कहा, “मैं आपसे अथाह प्रेम करती हूं और अाप मुझे मिश्री की तरह मीठे लगते हैं.”इसके बाद दूसरी बेटी ने भी राजा को शक्कर जैसा मीठा कहकर प्रसन्न कर दिया. इस प्रकार पांच बेटियों ने राजा को मीठा और प्यारा कहकर प्रसन्नचित कर दिया. अब छठी और सबसे छोटी बेटी की बारी थी.”बेटी, तुम सबसे छोटी हो, इसलिए मैं तुम्हें सबसे ज्यादा प्रेम करता हूँ. बताओ मेरी लाडली मैं तुम्हें कैसा लगता हूं?”, राजा ने पूछा.सबसे छोटी बेटी चुप रही. राजा ने फिर पूछा, “बताओ बेटी, मैं तुम्हें कैसा लगता हूं?” “पिता जी, आप बुरा तो नहीं मनाओगे?”, बेटी ने सवाल किया.”नहीं पुत्री.”छोटी बेटी ने कुछ सोचते हुए कहा, “पिता जी, मैं भी आपसे बहुत प्यार करती हूं मगर आप मुझे नमक जैसे कड़वे लगते हो.”इतना सुनते ही राजा क्रोध में आ गये और छोटी पुत्री की शादी एक कोढ़ी लड़के से कर दी.छोटी बेटी ने किसी सुदूर देश में अपने कोढ़ी पति से जैसे-तैसे जीवन बिताना शुरू कर दिया और पति की सेवा में रत रहने लगी.कालांतर में लड़की की सेवा रंग लाई और कोढ़ी चंगा-भला हो गया. उसे उस देश के राजा के जहां अंगरक्षक की नौकरी मिल गई. उस देश के राजा की कोई संतान नहीं थी. लड़के की सेवा और बहादुरी से प्रसन्न हो कर राजा ने समय आने पर उसे राजपाट दे दिया और स्वयं तप करने चले गए.कुछ साल के बाद छोटी बेटी और उसके राजा पति ने एक राजयज्ञ का आयोजन किया और दूर देशों से राजाओं-महाराजाओं को भोज पर आमंत्रित किया.   इस शाही भोज में लड़की ने अपने पिता को विशेष तौर पर बुलावा भेजा. शाही भोज में अनेकानेक स्वादिष्ट पदार्थ मेहमानों को परोसे जा रहे थे मगर लड़की ने सेवकों को सख्त आदेश दे रखा था कि उसके पिता को सिर्फ और सिर्फ मिष्ठान्न आदि ही परोसे जाएं. राजा हैरान हो रहा था कि समस्त मेहमानों को नमकीन और चटपटे पदार्थ भी परोसे जा रहे हैं किन्तु उसे ही मिठे पदार्थ क्यों दिए जा रहे हैं! राजा से जब रहा नहीं गया तो उसे क्रोध आ गया और चिल्लाया, “यह क्या मूर्खता है, मुझे तत्काल यहां के राजा और रानी से इस मूर्खता के विषय में चर्चा करनी है.”इतना सुनते ही रानी के रूप में राजा की छोटी बेटी सामने आ कर कहने लगी, “हे राजन! मुझे गौर से देखिए. मैं वही अभाग्या हूं जिसे आपने एक कोढ़ी के पले बांध दिया था.”अपने पति की ओर संकेत करते हुए लड़की पुनः बोली, “यह वही हैं जो इस देश के सम्राट हैं. राजा प्यार में मिठास की अधिकता भी प्यार को नीरस करती है, नोक-झोंक के रूप में कुछ नमकीन और चटपटा भी रहे तो प्यार का रंग चोखा हो जाता है.”राजा अपनी ही बेटी के सामने शर्मिंदगी में तिनके से हल्का और पानी से पतला होता जा रहा था.बोला, “बेटी, मैं क्षमा के योग्य नहीं हूं. आज तुने मुझे जिंदगी का बहुत बड़ा सबक दे दिया.”कहने का तात्पर्य यह है कि नेक नीयत की नोक-झोंक प्यार को चोखा करती है, फीका नहीं और बदनीयत के दिखावटी प्यार में धोखा और दुश्मनी के सिवा कुछ नहीं होता.

    केवल कृष्ण पनगोत्रा
    केवल कृष्ण पनगोत्रा
    स्वतंत्र लेखक

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