सुप्रीमकोर्ट का सुप्रीम फैसला।

देश के सबसे बड़े विवाद की जड़ आज उच्चतम न्यायालय ने अपनी ताकत का प्रयोग करते हुए समाप्त कर दी। इतिहास इस बात का साक्षी है कि देश की आज की राजनीति ने सत्ता और कुर्सी की लालच में पूरे देश को आग में झोंकने का कार्य किया। इसका सबसे मुख्य कारण यह है कि धार्मिक भावना जिसकी आड़ में उन्माद भी फलता एवं फूलता है। क्योंकि हमारे देश की सबसे बड़ी मुख्य वजह यह है कि देश में बढ़ता हुआ जातिवाद, जिसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले अधिकतर व्यक्ति या तो अनपढ़ होते हैं या फिर न्यून्तम स्तर की शिक्षा तक ही सीमित रह जाते हैं। जोकि नेताओं की चाल को नहीं समझ पाते और नेताओं की सियासी साज़िश का आसानी के साथ शिकार हो जाते हैं। और धार्मिक भावनाओं के आधार पर विभाजित हो जाते हैं। जबकि शिक्षित एवं विद्वान व्यक्ति ऐसा कदापि नहीं करते। परन्तु ज्ञान के आभाव में अशिक्षित व्यक्ति साज़िश के आधार पर विभाजित हो जाते हैं। जोकि सदैव से एक स्थान पर रहते आए हुए होते हैं, एक ही साथ कार्य करते आए हुए होते हैँ, लेकिन वह नेताओं के द्वारा बुने गए जाल को नहीं समझ पाते। जबकि प्रत्येक व्यक्ति का वास्तविक मुद्दा उचित शिक्षा, सम्पूर्ण सुरक्षा, संतोषजनक उपचार तथा रोजगार के क्षेत्र में ध्यान केंद्रित करने से संबन्धित होना चाहिए।

परन्तु दुर्भाग्यवश ऐसा न होकर इससे इतर व्यक्तियों का समूह अपना ध्यान केंद्रित कर लेता है। और उसी ओर गतिमान हो जाता है। यदि शब्दों को बदल कहें तो शायद गलत नहीं होगा कि व्यक्ति अपने बुनियादी मुद्दों से हटकर विपरीत दिशा में गतिमान हो जाता है। जोकि किसी के भी हित में कदापि नहीं होता। आज ऐसी ही एक बड़ी समस्या पर पूर्ण विराम लगाने का कार्य देश की उच्चतम न्यायालय ने किया। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने महज 40 दिन की नियमित सुनवाई के बाद पूरे मामले में स्पष्ट फैसला दिया है। इस फैसले की एक खासियत यह है कि पांचों जजों ने एक राय होकर फैसला सुनाया। सम्पूर्ण पीठ में शामिल पांच जजों में से किसी की राय अलग नहीं रही। कोर्ट ने अपने स्पष्ट फैसले में संतुलन बनाने का भी प्रयास किया। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन रामलला को सौंप, सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराने के आदेश दिया। कोर्ट ने अपने फैसले पर सभी पक्षों के वकीलों की दलीलें, उनके द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और विवादित स्थल की खुदाई करने वाले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट पर भी अपना रुख स्पष्ट किया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि एएसआई की खुदाई में निकले हुए सुबुतों को अनदेखा नहीं किया जा सकता। एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का भी स्पष्ट उल्लेख किया है कि खुदाई में मिले अवशेष व कलाकृतियों का मस्जिद से कोई लेना देना नहीं है। साथ ही अयोध्या में भगवान राम के जन्म का किसी भी पक्ष ने विरोध नहीं किया था। हिन्दु पक्ष की तरफ से दलील दी गई की मुख्य गुबंद को ही राम का जन्म स्थान मानते हैं। साक्ष्यों के तौर पर हिन्दु पक्ष की तरफ से ऐतिहासिक व धार्मिक ग्रंथों का भी हवाला दिया गया।

देश की शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में राम मंदिर बनाने का फैसला दिया साथ ही मस्जिद बनाने हेतु अलग से भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश भी सरकार को दिया इसी के साथ आज का दिन ऐतिहासिक रहा। भारत के मुख्य मुद्दे का निराकरण शीर्ष अदालत के द्वारा कर दिया गया। भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई सहित पाँच जजों की पीठ ने यह अहम एवं ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अवगत करा दें कि देश की राजनीति में यह मुद्दा बहुत ही अहम था। इसी मुद्दे का राजनेताओं के द्वारा चुनाव में प्रयोग किया जाता रहा। जिसको कई तरीकों से राजनीतिक पार्टियाँ प्रस्तुत करती थीं। कोई समर्थन में खड़े होकर जनता से वोट मांगता तो कोई विरोध में खड़े होकर जनता को भयभीत करके वोट मांगता। अतः न्यायालय ने देश हित एवं जनहित हेतु बहुत बड़ा समाधान कर दिया जिससे कि अब राजनेताओं की सियासी रोटियों पर लगभग अंकुश लगने की संभावना प्रबल होती हुई दिखाई दे रही है। यदि राजनेताओं ने कोई दूसरा नया मुद्दा नहीं गढ़ा तो लगभग अब सियासी रोटी सेंकने पर विराम लगना तय है। परन्तु, हमारे देश के राजनेता भी महान हैं, विकास एवं शान्ति के रास्ते पर न चलकर अशान्ति एवं विनाशकारी मुद्दे गढ़ने में भी खूब महारत रखते हैं। जोकि ठीक नहीं है। 

सज्जाद हैदर

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