दागियों पर दांव खेल सकते हैं, मुख्यमंत्री कमलनाथ

प्रमोद भार्गव

एक आपराधिक मामले में पवई से विधायक प्रहलाद लोधी की बर्खास्तगी के बाद मध्य-प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ दागी विधायकों पर बड़ा दांव खेलकर अपनी अल्पमत सरकार का बहुमत बरकरार रख सकते हैं। हालांकि लोधी की सजा उच्च न्यायालय ने सात जनवरी 2020 तक टाल दी है। दरअसल मध्य-प्रदेश विधानसभा ने पन्ना जिले की पवई विधानसभा सीट से निर्वाचित भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता समाप्त की है। लोधी के खिलाफ एक आपराधिक मामले में भोपाल की विशेष अदालत ने दो साल की सजा सुनाई थी। इस आधार पर विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी थी। इस मामले में लोधी समेत 12 लोगों पर आरोप था कि उन्होंने रेत खनन के खिलाफ कार्यवाही करने वाले रैपुरा के तत्कालीन तहसीलदार आरके वर्मा को बीच सड़क पर रोककर मारपीट की। यह अपराध बलवा का आधार बना। इस मामले में भोपाल स्थित सांसदों व विधायकों से जुड़े आपराधिक मामले देखने वाली विशेष अदालत ने 31 अक्टूबर को लोधी को दो साल के कारावास की सजा सुनाई थी। सजा मिलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने 2 नवंबर को लोधी की सदस्यता समाप्त कर दी। इस फैसले से प्रेरित होकर प्रदेश सरकार इस फिराक में है कि भाजपा के गंभीर अपराध वाले दागी विधायकों के विचाराधीन मामलों में तेजी लाकर इन्हें जल्द से जल्द अदालत के कटघरे में खड़ा कर दिया जाए, जिससे वेंटिलेटर पर चल रही सरकार को जीवनदान मिल जाए।  

                इस फैसले के बाद भी यह पेच उलझा हुआ है कि लोधी की विधानसभा सदस्यता बहाल हुई भी है अथवा नहीं ? इस असमंजस को विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने यह कहकर उलझा दिया है कि इसी प्रकृति के एक मामले में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने आशा सिंह के खिलाफ भी ऐसा ही फैसला लिया था। जिसमें उच्च न्यायालय के फैसले के बाद भी विधायक की सदस्यता टाले रखी थी। साफ है, कि लोधी की विधायकी कब तक बहाल होगी ? वैसे भी विधानसभा पवई सीट के रिक्त होने की अधिसूचना जारी कर चुकी है। यदि विधायकी बहाल होती है तो दूसरी अधिसूचना जारी करनी होगी। इधर राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने यह कहकर इस संशय को और गहरा दिया है कि इस मामले को उच्चतम न्यायालय ले जाएंगे। यदि मामला उच्च न्यायालय पहुंच जाता है तो लोधी की बहाली मुष्किल में पड़ जाएगी।

                चूंकि इस मामले से कांग्रेस को आॅक्सीजन मिली है, इसलिए अब कमलनाथ की निगाहें उन विधानसभा सीटों पर हैं, जहां से चुने गए भाजपा विधायकों पर आपराधिक मामले चल रहे हैं। हालांकि इस परिप्रेक्ष्य में रोचक पहलू यह भी है कि विधायकों की आपराधिक सूची में कांग्रेस समेत उसे सहयोग कर रहे अन्य दलों के विधायक भी शामिल है। संगीन अपराधों से जुड़े 47 विधायक ऐसे है, जिनके मामले न्यायालय में विचाराधीन है। चूंकि इस सिलसिले में सर्वोच्च न्यायालय के भी निचली अदालतों को स्पष्ट निर्देश है कि वे ऐसे मामलों पर जल्द फैसला दें। दरअसल लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा आठ की उपधारा 4 के तहत जब तक आरोपी की अपील और समीक्षा पर फैसला नहीं हो जाता था, तब तक आरोपी की सांसदी अथवा विधायकी बहाल रहते थे। परंतु 2013 में इस धारा की उपधारा-4 को असंवैधानिक करार दे दिया गया। नतीजतन माननीयों की सदस्यता समाप्त होने और जेल जाने का रास्ता खुल गया।

मध्य-प्रदेश की वर्तमान विधानसभा में 230 में से 94 विधायक ऐसे हैं, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 47 पर गंभीर मामले दर्ज हैं। कांग्रेस के निर्वाचित 114 विधायकों में से 56 ऐसे हैं, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं, भाजपा के प्रहलाद लोधी समेत 109 विधायकों में से 34 पर मामले दर्ज है। यदि गंभीर मामलों वाले 47 विधायकों की बात करें तो इनमें से कांग्रेस के 28, भाजपा 15, बसपा 2, सपा 1 और एक निर्दलीय विधायक इस सूची में शामिल हैं। जिन धाराओं में इन विधायकों पर अपराध कायम हैं, उन पर यदि विशेष अदालत में जल्द सुनवाई हो जाती है तो उनमें से कईको पांच साल से भी ज्यादा की सजा होना तय है। शायद इसीलिए मध्य-प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा है कि ‘दागी नेताओं पर जल्द निर्णय आना चाहिए। कांग्रेस हमेशा से ही न्यायालय का सम्मान करती आई है, आगे भी करेगी। हमें इस पर न तो कभी कोई आपत्ति थी और न होगी। इस विषय में भाजपा को सोचने की जरूरत है कि अपने विधायकों की सदस्यता रद्द होने की बात की स्थितियों से वह कैसे निपटेगी।‘

                लेकिन, कांग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए कि उसके खेमे में भी दागी बड़ी संख्या में हैं। बल्कि दागियों की बिना पर ही कमलनाथ सरकार अस्तित्व में बनी हुई है। कमलनाथ सरकार की कैबिनेट में 11 दागी विधायकों को मंत्री बनाया गया है। जिनमें से 6 मंत्रियों पर तो गंभीर, आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। इसीलिए कमलनाथ सरकार को जवाब देते हुए भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा है कि ‘कमलनाथ सरकार न्यायालय के मध्ययम से भाजपा विधायकों को कटघरे में खड़ा करने की नीति पर काम कर रही है ? क्या, प्रहलाद लोधी के मामलें में सरकार ने ऐसा ही किया ? अपनी सरकार को बचाए रखने के लिए कांग्रेस क्या बहुत नीचले स्तर पर चली गई है ? क्या कांग्रेस संविधान के साथ खेल खेलने पर उतारू हो गई है, यदि ऐसा है तो भाजपा कांग्रेस के इन गलत मंसूबों को कभी सफल नहीं होने देगी ?‘ बहरहाल दोनों की दलों के घर कांच के हैं, बावजूद एक-दूसरे पर पत्थर उछालने में लगे हैं। 

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