लेखक परिचय

डॉ. प्रवीण तोगड़िया

डॉ. प्रवीण तोगड़िया

वैभवपूर्ण जीवन को भारतमाता के श्रीचरणों की सेवा में समर्पित करने वाले ख्‍यातलब्‍ध कैंसर सर्जन तथा विश्‍व हिंदू परिषद के अंतरराष्‍ट्रीय महामंत्री।

Posted On by &filed under धर्म-अध्यात्म.


-डॉ. प्रवीण तोगड़िया

श्रीराम जन्मभूमि के प्रश्न पर गत 450 वर्षों से निरन्तर संघर्ष चल रहा है। जो स्थान श्रीराम जन्मभूमि है और हिन्दू उसकी श्रद्धा से निरन्तर पूजा करते आया है, तब से जब बाबर के मजहब का जन्म भी नहीं हुआ था। उसी स्थान पर मस्जिद बनाने और हिन्दुओं को उस स्थान पर पूजा करने से रोकने का षड्यंत्र गत् 450 वर्षों से चल रहा है।

प्राचीन काल से अयोध्या मोक्षदायिनी सप्त नगरियों में से एक रही है। हिन्दुओं के लिए अयोध्या का महत्व धार्मिक रहा है, जिनके प्रमाण स्कन्द पुराण, मत्स्य पुराण, पद्मपुराण तथा अन्य कइयों जगह भलीभांति मिलते हैं। वहीं अयोध्या मुसलमानों के लिए कभी धार्मिक महत्व का स्थान रहा हो, ऐसा नहीं है। पवित्र सरयू नदी के तट पर प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर था और हिन्दू श्रद्धा से उस की एवं सम्पूर्ण अयोध्या नगरी की पूजा-परिक्रमा भी करते थे तथा आज भी कर रहे हैं।

उसी पवित्र स्थान पर भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर तोड़कर और कई जगह उस मंदिर के स्तम्भ का उपयोग कर वहाँ मस्जिद बनाने का प्रयास बाबर के सेनापति मीर बाँकी ने किया। परन्तु वहाँ कभी मीनारें नहीं बनीं। भगवान श्रीराम की शक्ति और हिन्दुओं की अटूट श्रद्धा की शक्ति ही थी कि उस ढाँचे के मीनार बांधकर बाबर कभी भी वहाँ मस्जिद नहीं बना पाया। इस्लाम के नियमानुसार जिस ढाँचे की मीनारें नहीं होती वह कभी मस्जिद नहीं हो सकता, अर्थात् उस ढाँचे का इस्लाम में कोई धार्मिक महत्व नहीं।

450 वर्षों तक हिन्दुओं ने यह पवित्र स्थान कभी नहीं त्यागा। पवित्र श्रीराम जन्मभूमि होने के कारण, हिन्दुओं ने उस स्थान पर पूजा कभी नहीं त्यागी। बाबर ने विकृत ढाँचा बना भी लिया, किन्तु हिन्दू उस स्थान पर पूजा और उस स्थान की परिक्रमा करते ही रहे। जब उन्हें अन्दर जाने से रोका गया, तब उन्होंने बाहर राम चबूतरे से उस स्थान की पूजा प्रारंभ कर दी।

भगवान श्रीराम की पवित्र जन्मभूमि के लिए गत् 450 वर्षों में उसी स्थान पर निरन्तर हिन्दू पूजा-परिक्रमा करते आये और उस स्थान के लिए आज तक 78 संघर्षों में चार लाख हिन्दू शहीद हुए। हिन्दू कोई मूर्ख नहीं है कि इतनी बड़ी संख्या में शताब्दियों से इतने प्राण यूँ ही गंवाएँ। हिन्दुओं में युगों-युगों से चली आयी पूजा-परम्पराओं के कई स्थान हैं। कई युग बीत गए फिर भी उन्हीं जगहों पर हिन्दू उस तय समय पर करोड़ों की संख्या में जाते हैं, स्नान पूजा करते हैं। जैसे कुम्भ, 12 ज्योतिर्लिंग, 52 शक्तिपीठ, नदी तटों पर स्नान के विशिष्ट पर्व आदि।

अयोध्या में प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर युगों-युगों से चली आयी हुई ऐसी ही यह निरन्तर परम्परा है जो इस्लाम के जन्म के कई युगों पहले से चली आ रही है। अयोध्या के अलावा कोई दूसरा स्थान भगवान श्रीराम का जन्मस्थान कहीं भी नहीं। युगों की यह निरन्तर पूजा परम्परा हिन्दुओं ने जतन से की है। प्रश्न केवल मंदिर का ही नहीं, उसी स्थान पर भव्य मंदिर बनाने का है। जहाँ श्रीरामलला विराजमान है, जहाँ युगों-युगों से 4 लाख प्राणों की आहुति देकर भी हिन्दू पूजा करते आये, उसी श्रीराम जन्मभूमि पर ही भव्य मंदिर बने, यह महत्व का है।

आप में से कोई अपना जन्म स्थान किसी भी कानूनी कागजों में जो सच है उसके अलावा दूसरा लिख सकते हैं? नहीं ना! तो फिर भगवान् श्रीराम की जन्मभूमि पर उनका अस्तित्व और उनका मंदिर कैसे नकारा जा सकता है? जन्मस्थान नहीं बदला जा सकता, आम आदमी का भी नहीं बदला जा सकता, तो भगवान् श्रीराम के जन्मस्थान से हटकर मंदिर कैसे बन सकता है? जन्मस्थान कैसे बदल सकता है? हिन्दुओं की श्रद्धा के साथ मजाक, बिलम्ब, विश्वासघात अब बहुत हुए। अब भगवान् श्रीराम का भव्य मंदिर उनकी उसी जन्मभूमि पर बनेगा जहाँ युगों-युगों से हिन्दू पूजा-परिक्रमा करते आए हैं। अब इसमें किसी भी प्रकार का विलम्ब याने हिन्दुओं की अटूट श्रद्धा का घोर अपमान।

अयोध्या में मस्जिद नहीं बनाने दी जायेगी। हिन्दुओं के लिए केवल प्राण-प्रतिष्ठापित मूर्ति ही नहीं वह स्थान भी देवता है। अयोध्या की यह सम्पूर्ण पवित्र भूमि हिन्दुओं के लिए देवता है। भारत के आज के कानून ने भी देवता का भूमि पर का यह अधिकार मान्य किया है। तो फिर जिस पवित्र भूमि पर भगवान् श्रीराम का ही केवल अधिकार है, उस पवित्र भूमि पर कोई मस्जिद कैसे बन सकती है? इसलिए अयोध्या में पवित्र श्रीराम जन्मभूमि पर और अयोध्या की शास्त्रीय सीमा में कोई भी मस्जिद अब नहीं बनाने दी जायेगी।

बाबर के नाम पर भारत में मस्जिद कहीं भी बनाने नहीं दी जायेगी। भारत के संविधान की मूल पुस्तक में भारत के राष्ट्र-पुरुषों में भगवान् श्रीराम का चित्र दिया है। बड़ा सुन्दर चित्र है जिसमें भगवान् श्रीराम पुष्पक विमान से आते हुए दिखते हैं। ऐसे राष्ट्र-पुरुष भगवान् श्रीराम का मंदिर तोड़कर वहाँ कोई विकृत ढाँचा बाँधने वाला विदेशी बाबर और उस विदेशी आक्रांता बाबर की कोई इमारत भारत में कैसे बन सकती है?

भारत के मुसलमान जो अपनी राष्ट्रीयता की बार-बार दुहाई देते रहते हैं, उनका प्यार भारत के संविधान में दिए हुए श्रीराम से नहीं बल्कि विदेशी आक्रांता बाबर से है? जब भारत से अंग्रेज भगाए गए, तब राष्ट्रीय कंलक मानकर उनके कई स्मारक हटाए गए। किंग्स पथ का नाम बदलकर जनपथ किया गया, बॉम्बे का मुम्बई, वेलिंग्टन अस्पताल का डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल किया गया और ऐसे कइयों उदाहरण हैं जहाँ केवल नाम परिवर्तन ही नहीं, अंग्रेजों के पुतले भी हटाए गये। फिर उनके पहले जिन विदेशियों ने भारत पर अत्याचार किये, जिनमें से बाबर भी एक है, उसके नाम का स्मारक भारत में रखना और नए सिरे से भी बाँधना, यह तो केवल देशद्रोह है।

इसलिए जो कोई बाबर के नाम के किसी भी ढाँचे का जिसने हमारे संविधान में जिन भगवान् श्रीराम का सम्मान से चित्र दिया है, उनका भव्य मंदिर उनकी जन्मभूमि पर का तोड़ा था, वे लोग निश्चित ही भारत में अराष्ट्रीय विचार फैलाना चाहते हैं और भारत में बाबर के नाम का कोई भी ढाँचा कहीं भी बाँधने का राष्ट्रद्रोही कृत्य हिन्दू भारत में कभी भी होने नहीं देंगे।

68 Responses to “मंदिर वहीं, मस्जिद अयोध्या में नहीं और बाबर के नाम की मस्जिद भारत में कहीं नहीं!”

  1. Shariq

    Togadiya ji aap ke likha 450 vasho se shangharsh chal raha hai aap bhi ab 60 ke qareeb ho gaye honge or jaldi hi swargwasi ho jaye ge par viwaad chalta rahe ga raha sawal mandir bannae ka to woh kab bane ga pata nahi haan is beech me rajneeti chalti rahe gi loog mandir -masjid ke chakkar me loogo ko chalt erahe ge or aam janta ko iska khamiyaja uthana parega…to desh hit ki sochiye Dhanyabad

    Reply
  2. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. प्रो. मधुसूदन उवाच

    मीणाजी:
    निम्न दो अलग स्रोतों से जानकारी प्राप्त हुयी है। (एक पर्शियन स्रोत है, और दूसरा जो पहले भेजा था, वह Elliot and Dowson वाला है।}
    पता:=> http://persian.packhum.org/persian/main/url=pf%3Ffile%3D03501052%26ct%3D0
    दो संदर्भोंसे कुछ अलग अनुवाद मिला है। केवल “शामियाना” उल्लेख इसमें नहीं है।पर बाबर शामियाने के बिना हो यह कॉमन सेन्स के विपरित होगा। जो मुझे Elliot और Dowson में मिला था। पुस्तकें मेरी नहीं है, मैंने मांगकर पढी थी।उन सज्जन की बदली हुयी है। e mail भेज कर देखता हूं।
    {फिर भी कोशिश कर रहा हूं, उत्तर मिलनेपर प्रेषित करूगा।}
    ———————————————————————————–
    एक:
    933 AH. OCT. STH 1526 TO SEP. 27TH 1527 AD. 573
    became the food of crows and kites. Mounds were made of
    the bodies of the slain, pillars of their heads. (Different Translation)
    =====================================================
    दो:
    Bābur constructs a tower of skulls.(शीर्षक है)
    The battle was fought within view of a small hill near our camp. On this hillock, I directed a tower of the skulls of the infidels to be constructed. (Here “I” means Babur)
    ==================================================
    फ़यजाबाद D G (District Gazetteer) में Mr.(H. E. Nevill) p. 173 पर लिखते हैं। ” In 1528 AD. Babur came to Ajodhya (Aud) and halted a week. He destroyed the ancient temple” (marking the birth-place of Rama) “and on its site built a mosque, still known as Babur’s Mosque … It has two inscriptions, one on the outside, one on the pulpit ; both are in Persian ; and bear the date
    935 AH.” This date maybe that of the completion of the building. (Corrigendum : On f. 339 n. I, I have too narrowly restricted the use of the name Sarju.

    Reply
  3. GOPAL KRISHAN ARORA

    एक कविता
    प्रश्न आस्था और भावना का

    वह मुकदमा बड़ा अजीब था,
    जितना सुलझाया उतना उलझा,
    इसलिए बहुत परेशान, न्यायाधीश था ..

    दो माँ थीं, एक बच्ची,
    एक झूठी थी, एक सच्ची
    दोनों ही बच्ची पर अपना हक जमा रहीं थी
    स्वयं को बच्ची की असली माँ बता रहीं थी..

    वकील दे रहे थे तर्क पर तर्क
    जज साहब नहीं समझ पा रहे थे,
    असली और नकली में फर्क …

    अंतत: न्यायाधीश ने सुना दिया इन्साफ,
    बच्ची के दो टुकड़े करो “हाफ एंड हाफ”
    दोनों को दे दो एक एक हिस्सा
    बंद करो यह रोज रोज का किस्स्सा..

    न्यायाधीश ने जैसे ही यह बात कही,
    नकली माँ चुप रही
    असली चीख उठी “नहीं, नहीं, नहीं”

    चेतावनी का स्वर गूंजा
    “यह न्यायालय की अवमानना है”
    उत्तर मिला “ मेरी बच्ची मेरा रक्त, मेरी भावना है
    इसके टुकड़े जो भी करेगा
    वह जज हो या सिपाही
    मैं दुर्गा बन, कर दूंगी उसकी तबाही “

    भावना और अवमानना के द्वन्द से
    तुरंत फैसला हो गया
    न्यायाधीश का फैसला
    असली माँ के पक्ष में हो गया ///

    -गोपाल कृष्ण अरोड़ा

    Reply
  4. shrikant upadhayay

    सम्माननीय प्रवीण तोगड़िया जी
    यदि भारत में १० % मुस्लमान राम को झुठला सकते है तो क्यों न भारत के नब्बे % हिंदुवो को अपने हार को स्वीकारते हुवे राम के नाम की एक मस्जिद ही बना लेनी चाहिए कम से कम श्री राम के लिए मंदिर नहीं तो मस्जिद सही लेकिन घर तो बन जायेगा और हम भी देखेंगे हिन्दू होने की हुंकार भरने वाले जन नेता कितनी बार श्री राम क नाम की नमाज अदा करते है
    सावधान हिन्दुवो यदि तुम राम के नहीं हो सकते तो राम तुम्हारा कभी नहीं हो सकता राम मंदिर न बनना हिन्दुवो का मुसलमान बनने की ओर मौन स्वीकृति है !

    Reply
  5. निरंकुश आवाज़

    डॉ. मधुसूदन जी द्वारा लिखित निम्न विवरण यदि सत्य है, तो गम्भीरता पूर्वक सोचने का विषय है!
    ————————-
    बाबर कत्ल किए काफिरों की खोपडियों का ढेर लगाकर, मैदान में शामियाना तानकर, फिर उस ढेर को फेरे लगाकर मद होश हो कर, नाचा करता था।
    पर, एक बारकी बात जो (History of India as written by Own Historians)- में पढा हुआ याद है, कि जब खूनसे लथपथ ज़मिन हुयी और बाबर के पैरों तले खूनसे भिगने लगी, तो शामियाने को पीछे हटाना पडा। फिर भी मारे हुए काफ़िरों की मुंडियों का ढेर बढता ही गया, और फिरसे बाबर के पैरोंतले ज़मिन रक्तसे भीगी, तो फिर और एक बार शामियाना पीछे हटाना पडा। ऐसे बाबरी को, सोच भी नहीं सकते!
    जिस बाबरने ऐसा काम किया हो, उसकी नामकी मस्ज़िद तो दुनिया में कहीं भी ना बनना चाहिए।
    ————————
    डॉ. मधुसूदन जी से अपेक्षा है कि अपने विवरण की विश्वसनीयता को प्रमाणित करेंगे!
    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’

    Reply
    • डॉ. मधुसूदन

      डॉ. प्रो. मधुसूदन उवाच

      डॉ. मीणाजी —-
      यह विवरण एलियट और डॉसन की ८ ग्रंथोंकी (History of India, as told by her own historians नामक पुस्तकोंमें पढा हुआ था।) आप Google पर Babur’s Historical records, by Elliot and Dawson लिखकर देखिए। कुछ संदर्भ निकल आएंगे। Download कर के देखिए। यदि नहीं बन पाता तो बताइए। उस मित्रसे कोशिश की जा सकती है। भारतमें शायद उसपर प्रतिबंध है।

      Reply
    • डॉ. मधुसूदन

      डॉ. प्रो. मधुसूदन उवाच

      मीणाजी:
      निम्न दो अलग स्रोतों से जानकारी प्राप्त हुयी है। (एक पर्शियन स्रोत है, और दूसरा जो पहले भेजा था, वह Elliot and Dowson वाला है।}
      पता:=> http://persian.packhum.org/persian/main/url=pf%3Ffile%3D03501052%26ct%3D0
      दो संदर्भोंसे कुछ अलग अनुवाद मिला है। केवल “शामियाना” उल्लेख इसमें नहीं है।पर बाबर शामियाने के बिना हो यह कॉमन सेन्स के विपरित होगा। जो मुझे Elliot और Dowson में मिला था। पुस्तकें मेरी नहीं है, मैंने मांगकर पढी थी।उन सज्जन की बदली हुयी है। e mail भेज कर देखता हूं।
      {फिर भी कोशिश कर रहा हूं, उत्तर मिलनेपर प्रेषित करूगा।}
      ———————————————————————————–
      एक:
      933 AH. OCT. STH 1526 TO SEP. 27TH 1527 AD. 573
      became the food of crows and kites. Mounds were made of
      the bodies of the slain, pillars of their heads. (Different Translation)
      =====================================================
      दो:
      Bābur constructs a tower of skulls.(शीर्षक है)
      The battle was fought within view of a small hill near our camp. On this hillock, I directed a tower of the skulls of the infidels to be constructed. (Here “I” means Babur)
      ==================================================
      फ़यजाबाद D G (District Gazetteer) में Mr.(H. E. Nevill) p. 173 पर लिखते हैं। ” In 1528 AD. Babur came to Ajodhya (Aud) and halted a week. He destroyed the ancient temple” (marking the birth-place of Rama) “and on its site built a mosque, still known as Babur’s Mosque … It has two inscriptions, one on the outside, one on the pulpit ; both are in Persian ; and bear the date
      935 AH.” This date maybe that of the completion of the building. (Corrigendum : On f. 339 n. I, I have too narrowly restricted the use of the name Sarju.

      Reply
  6. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. प्रो. मधुसूदन उवाच

    एक मस्ज़िद बाबर के नाम बने, औरंगज़ेब के नाम भी एक मस्ज़िद बननी चाहिए, उसी प्रकार महमूद गजनी के नाम भी तो होनी चाहिए। ओसामा बिन लादेन को भी क्यों भूलते हो?
    उदार हिंदू की उदारता तभी प्रमाणित होगी, जब वह बलात्कारियोंका, चोर लूटेरोंका सत्कार करना सीखेगा, उन्हे भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्मश्री इत्यादि से गौरवान्वित करेगा।
    कंसके नाम मंदिर बने, रावण की मूर्ति सहित मंदिर भी बनना चाहिए, जो श्री लंका में भी नहीं है।
    सारे बलात्कारियों को ढूंढ कर उन्हे पद्म श्री भी दी जानी चाहिए। इसमें राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील को गौरव अनुभव होना चाहिए, कि भारतकी महान परंपरा जो है सर्व धर्म समभाव, सहिष्णुता, बलात्कारियोंके प्रति गौरव हो, हिसकों का भी आदर करना सीखो। वे भी तो मानव ही तो थे/है।आप अधर्म को भी धर्म मान कर चले।इसे ही कहते हैं सच्चा हिंदुत्व।
    लाज नामका शब्द पता है क्या?

    Reply
    • Vishwash Ranjan

      hindu ko to choodi pehn lena chahiye, Babar jaise log jinhone nirdosh logo ko mara. uska is desh main to name bhi nahi lena chahiye.
      babar ke name se vigyapan banta hai….jisko hum log chupchap sunkar apmanit hote rehte hain. Sharm aana chahiye Hindu sangthano ko.

      Reply
  7. sunil patel

    सच तो पत्थर की लकीर होता है जिसे मिटाया नहीं जा सकता है. कागज़ बदल सकते है, इतिहास तो नहीं बदल सकते है. बाबर एक आक्रान्ता था. उसने भारत में बहुत मार काट मचाई थी, हजारो मंदिर तोड़े थे, यह इतिहास है.

    बाबर के नाम की एक नहीं दस मस्जिद इस देश में बने, किन्तु मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का एक मंदिर उनके जन्म स्थान पर क्यों नहीं बन सकता है?

    Reply
  8. sunil patel

    सच तो पत्थर की लकीर होता है जिसे मिटाया नहीं जा सकता है. कागज़ बदल सकते है, इतिहास तो नहीं बदल सकते है. बाबर एक आक्रान्ता था. उसने भारत में बहुत मार काट मचाई थी, हजारो मंदिर तोड़े थे, यह इतिहास है.

    बाबर के नाम की हजारो मस्जिद इस देश में बने, किन्तु मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का एक मंदिर उनके जन्म स्थान पर क्यों नहीं बन सकता है?

    Reply
  9. zubair

    jis tarah tehalka.com par pabandi hai usi tarah pravakta.com ko bhi ban ka dena chahiye…kuchh log fursat hai aur hindu muslim dange karane ki firaq me rehtein hain….yahi log khule hue atankwadi hain….

    ye nahi jante ki …dango me marne wala …aam nagrik hota hai…jo ki is tarah ki website se bhadakta hai….aap log to AC room me baith kar …website update karte rehte ho aur char logo me uchein uthne k liye dharm ko sahara banate ho…..koshish karo aman aur shanti bani rahe…aur tudwana hai to woh saari imaaratein tudwado jin ko mughalon ne banwai thi..aur yaad rakho inhi imarton k zariye bharat ko log pehchantein hain…

    Reply
  10. shishir chandra

    आज वोट बैंक की राजनीती ने भगवन राम को छोटा बना दिया है. मुस्लिम वोटों की चाहत और हिन्दुओं को नीचा देखने के लिए राजनीती अयोध्या से लड़ी जा रही है. अयोध्या में हक सिर्फ हिन्दुओं का है, जिसे कोई ताकत नहीं छीन सकती. अदालत भी नहीं और सरकार भी नहीं. हिन्दू जनता से अनुरोध करूँगा की इस मुद्दे में स्पष्ट जनादेश दे. बीजेपी ने राम के मुद्दे में चुनाव लड़ कर विश्वासघात किया. आज स्थापित होने के बाद बीजेपी को राम से लेना देना नहीं रह गया है. सत्ता में आने के लिए बीजेपी क्ष्द्माधार्म्निर्पेक्ष्वादी पार्टियों से समझौता करने लगी है. बीजेपी को नहीं भूलना चाहिए की राम के बदौलत ही देश की प्रमुख पार्टी बन पाई. और इसकी उपेक्षा भारी पड़ने लगी है. बीजेपी को कांग्रेस की तरह अवसरवादी होने से बचना चाहिए. अन्यथा बीजेपी को झटका लगना तय है.

    Reply
  11. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. प्रो. मधुसूदन उवाच

    ॥बाबर का काफिर खोपडियों के ढेरके सामने मदहोश नाच॥–बाबर के तवारिख से पढा हुआ निम्न वृत्तांत-{सच्चायी बताओ तो पूछते है, क्यों सच बता रहे हो?}
    कृष्णने अर्जुन को कहा क्या? कि क्यों लडते हो, हिमालय जा के ध्यान धरो}
    सच्चायी सह सकते हो? तो ही पढो। नहीं तो बेसुध हो जाओगे।
    =>बाबर कत्ल किए काफिरों की खोपडियों का ढेर लगाकर, मैदान में शामियाना तानकर, फिर उस ढेर को फेरे लगाकर मद होश हो कर, नाचा करता था।
    पर, एक बारकी बात जो (History of India as written by Own Historians)- में पढा हुआ याद है, कि जब खूनसे लथपथ ज़मिन हुयी और बाबर के पैरों तले खूनसे भिगने लगी, तो शामियाने को पीछे हटाना पडा। फिर भी मारे हुए काफ़िरों की मुंडियों का ढेर बढता ही गया, और फिरसे बाबर के पैरोंतले ज़मिन रक्तसे भीगी, तो फिर और एक बार शामियाना पीछे हटाना पडा। ऐसे बाबरी को, सोच भी नहीं सकते!
    जिस बाबरने ऐसा काम किया हो, उसकी नामकी मस्ज़िद तो दुनिया में कहीं भी ना बनना चाहिए।
    यह रपट मैंने एलियट और डॉसन के ८ ग्रंथोंके संग्रह में पढा हुआ है।
    भारत में इन ग्रंथोंपर पाबंदी थी। मैं ने इन किताबोंको मेरे मित्र, जिन्होने इन पुस्तकों को खरिदा था, उनसे लाकर पढी थी।
    शायद आज यह किताबें भारत मे बिकनेपर प्रतिबंध है। यह सारा इतिहास तवारिखें लिखनेवाले दरबारी लेखको ने लिखा है।
    किसी तीसरे ने लिखा हुआ नहीं। बडा अधिकृत है। भारत की सरकार की हिम्मत हो, तो इन किताबोंपर लगी पाबंदी हटाए।
    ।सत्यमेव जयते।- लिखते हो, काहे ?
    असत्यमेव जयते लिखा करो।
    तवारिखोंके के कुछ नाम जैसे, बाबरनामा, जहांगिरनामा, ऐसे करीब ४० एक नाम थे। मैं ने यह मेरी दृढ स्मृतिके(संदेह नहीं) आधार पर लिखा है।
    ऐसे बाबर की बाबरी? सोच भी कैसे? क्या? हमारी सरकार हमें अंधेरेमें रखकर वोट बॅंक पक्की करना चाहती है।
    हिंदुओंके देशमें राम तालेमें बंद? क्या उलटा ज़माना आया है। तो मंदिर क्या सौदि अरेबियामें, या अफगानिस्तान मे? Come on have some Common Sense. Ref:History of India As Told by Own Historians (8 Volumes)-H. M. Elliot (Author), John Dowson (Editor)

    Reply
  12. Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'

    !! प्रवक्ता.कॉम के पाठकों से विनम्र अपील !!

    आदरणीय सम्पादक जी,

    आपके माध्यम से प्रवक्ता.कॉम के सभी पाठकों से विनम्रतापूर्वक अनुरोध/अपील करना चाहता हूँ कि-

    1- इस मंच पर हम में से अनेक मित्र अपनी टिप्पणियों में कटु, अप्रिय, व्यक्तिगत आक्षेपकारी और चुभने वाली भाषा का उपयोग करके, एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

    2- केवल इतना ही नहीं, बल्कि हम में से कुछ ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सम्पादक की नीयत पर भी सन्देह किया है। लेकिन जैसा कि मैंने पूर्व में भी लिखा है, फिर से दौहरा रहा हूँ कि प्रवक्ता. कॉम पर, स्वयं सम्पादक के विपरीत भी टिप्पणियाँ प्रकाशित हो रही हैं, जबकि अन्य अनेक पोर्टल पर ऐसा कम ही होता है। जो सम्पादक की नीयत पर सन्देह करने वालों के लिये करार जवाब है।

    3- सम्पादक जी ने बीच में हस्तक्षेप भी किया है, लेकिन अब ऐसा लगने लगा है कि हम में से कुछ मित्र चर्चा के इस प्रतिष्ठित मंच को खाप पंचायतों जैसा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। मैं उनके नाम लेकर मामले को बढाना/तूल नहीं देना चाहता, क्योंकि पहले से ही बहुत कुछ मामला बढाया जा चुका है। हर आलेख पर गैर-जरूरी टिप्पणियाँ करना शौभा नहीं देता है।

    4- कितना अच्छा हो कि हम आदरणीय डॉ. प्रो. मधुसूदन जी, श्री आर सिंह जी, श्री श्रीराम जिवारी जी आदि की भांति सारगर्भित और शालीन टिप्पणियाँ करें, और व्यक्तिगत टिप्पणी करने से बचें, इससे कुछ भी हासिल नहीं हो सकता। कम से कम हम लेखन से जुडे लोगों का उद्देश्य तो पूरा नहीं हो सकता है। हमें इस बात को समझना होगा कि कोई हमसे सहमत या असहमत हो सकता है, यह उसका अपना मौलिक अधिकार है।

    5- समाज एवं व्यवस्था पर उठाये गये सवालों में सच्चाई प्रतीत नहीं हो या सवाल पूर्वाग्रह से उठाये गये प्रतीत हों तो भी हम संयमित भाषा में जवाब दे सकते हैं। मंच की मर्यादा एवं पत्रकारिता की गरिमा को बनाये रखने के लिये एकदम से लठ्ठमार भाषा का उपयोग करने से बचें तो ठीक रहेगा।

    6- मैं माननीय सम्पादक जी के विश्वास पर इस टिप्पणी को उन सभी लेखों पर डाल रहा हूँ, जहाँ पर मेरी जानकारी के अनुसार असंयमित भाषा का उपयोग हो रहा है। आशा है, इसे प्रदर्शित किया जायेगा।

    Reply
  13. दीपा शर्मा

    deepa sharma

    mahoday ateet जी, लगता है आप अपने नाम के अनुरूप ही हैं ,
    Apse request hai ki Kabhi Muslimo aur Crishchan ke bare me na likhe nahi to jeena doobhar ho जायेगा……………
    हा हा हा हा , में वास्तव में dar gayee hun, mahoday jin logo ki सिखाई भाषा बोल रहे हो उनको z plus सुरक्षा मिलती है बेवकूफ न बनो
    और जब आप मुझे ऐसा कह सकते हो तो अल्पसंख्यकों का तो पता नहीं क्या हाल करते होंगे ……… हे राम …………..
    दीपा शर्मा

    Reply
    • तिलक राज रेलन

      तिलक राज रेलन

      आप किन अल्प संख्यकों की बात कर रही हैं, कश्मीर में जो अल्प संख्यक हैं उनका हाल क्या है? उसके प्रति तो आपकी आंख सदा बंद ही रहती है, बापू के बन्दर जैसे. जिन्हें आप अल्प संख्यक मानती हैं वो सेना पर, अर्ध सेनिक बलों पर, बम्ब गोली, क्या क्या प्रहार करते हैं. दीखता है कि नहीं ? जब अल्प संख्यक हो कर वो इतना कुछ करते हैं, जहाँ बहुमत होता है उसे इस्लामाबाद बना देते हैं ? शर्मा हो कर बेशर्मी की बात मत करो ! भारत का खा कर पाक के नापाक कामों को वो और आप मिल कर भी कभी पूरा नहीं कर सकते! जय चन्द गद्दारी व धोखेसे पृ.रा.चौहान को हरा कर अँधा करवा देता है किन्तु देश भक्त अँधा होकर भी गद्दार को दण्डित कर सकता है! जय भारत ! वन्देमातरम !!

      Reply
      • ateet

        डिअर तिलक जी,
        यह दीपा शर्मा नहीं है यह रियल में एक जेहादी है और पाकिस्तान के लिए काम करती है तो परेशां न होइए .यह हमशा हिन्दुओ और देश के अप्पोसित बोलती है.

        अतीत

        Reply
      • अहतशाम त्यागी

        महाशय तिलक जी
        पृथ्वीराज चौहान तो देशभक्त था
        तो गाँधी जी कोन थे ?
        गाँधी जी को किसने मारा?
        और वो मारने वाला कोन था ये भूल गए
        बस! आप जैसो को दुसरो पे कीचड उचालनी आती है अपने गिरेबान में झाक कर देखा है कभी ?

        Reply
  14. Ateet Agrahari

    Dear Deepa je,
    Jaha tak mujhe lagat hai ki aap kabhi news dekhti nahi aur na hi paper padhti agar padhti to apko yah jarur pata hota ki aaj hamare kasmiree pandit apne hi desh me pravasuit jeevan batane par majboor hai.aur hai kabho apni Congressi niyay se uthkar aur tustikarn ke alawa desh ke bare me socho.Aaj congress niti sasan ne India ko barbad kar diya hai, Wahi aap jaise log bhi usi mansukta me samil .Samon yourself Deepa je.Jis netao ko Bachane ke liye hamare jawano Jaan laga unhi haram khor netao ne Aatankvadio ko Chakan chilli khila rahe hai.

    Apse request hai ki Kabhi Muslimo aur Crishchan ke bare me na likhe nahi to jeena doobhar ho jayega

    Reply
  15. डॉ. मधुसूदन

    डॉ.मधुसूदन उवाच

    प्रवक्ता निम्न सुझाव पर निर्णय करे।
    कुछ चर्चा सत्रोंका मध्यस्थ (Moderator) रहनेका अनुभव है, इस लिए सुझाव रखता हूं। स्वीकार/अस्वीकार करे। हम चर्चा डॉ. प्रवीण तोगडिया के लेखकी कर रहे हैं,उसीसे जुडे बिंदु उठाइए। मुझे जैसा उचित लगा वैसा उसका सारांश नीचे प्रस्तुत है। इन बिंदुओंको केंद्रमें रखकर ही आप सभी चर्चा करें तो, हम/आप असहमत भी हो, तो अपना मत रखें। चर्चा की सफलता उसीमें है।और सारा पुराण घसीटकर चर्चामें घुसपैठ ना करें। सारोंको नियंत्रित नहीं करना है। आप सभी भारतकी भलाई ही चाहते हैं, इसमें मुझे संदेह नहीं। पर चर्चा का बिखराव देख, मैं यह सुझाव दे रहा हूं। मेरी युनिवरसीटीमें कान्फ़्रेन्स चल रही है।इस लिए,चर्चा आप करें, इससे आप बंधु/भगिनियोंका समय भी बचेगा, निरर्थक चर्चा भी घटेगी। मै चर्चामें अभी १० एक दिन भाग ले नहीं सकता।
    ==============सारांश===========
    (१) ले परिच्छेदमें तोगडिया जी ने श्रद्धाकी ऐतिहासिक सच्चायी रखी है।
    (२) रे में अयोध्या का सप्त मोक्ष दायीनि नगरियोंमें से एक का उल्लेख, और उसका हिंदुके लिए महत्त्व पुराणोंके प्रमाणोंसे संदर्भ है, साथमें इस्लाम पंथियोंके लिए ऐसा महत्त्व नहीं है, ऐसा विधान किया है।
    (३) रे में वे कहते हैं, कि कैसे मंदिर तोडकर मीर बाँकी द्वारा, बिना मीनार(मस्ज़िद नहीं) ढांचा बनाया गया।
    (४)थे में, 450 वर्षों तक हिन्दुओं ने यह पवित्र स्थान और, श्रीराम जन्मभूमि होने के कारण, हिन्दुओं ने उस स्थान पर पूजा कभी नहीं त्यागी।
    (५) वे में उस स्थान के लिए आज तक 78 संघर्षों में चार लाख हिन्दू शहीद हुए, ऐसा कहा है।
    (६)वे में, अयोध्या के अलावा कोई दूसरा स्थान भगवान श्रीराम का जन्मस्थान कहीं भी नहीं।
    (७) वे में कहते हैं, कि, जन्मस्थान नहीं बदला जा सकता, आम आदमी का भी नहीं बदला जा सकता, तो भगवान् श्रीराम के जन्मस्थान से हटकर मंदिर कैसे बन सकता है?
    (८) वे में वे *दृढता* से कहते हैं, कि अयोध्या में मस्जिद नहीं बनाने दी जायेगी। हिन्दुओं के लिए केवल प्राण-प्रतिष्ठापित मूर्ति ही नहीं वह स्थान भी देवता है। अयोध्या की यह सम्पूर्ण पवित्र भूमि हिन्दुओं के लिए देवता है।**भारत के आज के कानून ने भी देवता का भूमि पर का यह अधिकार मान्य किया है।** तो फिर जिस पवित्र भूमि पर भगवान् श्रीराम का ही केवल अधिकार है, उस पवित्र भूमि पर कोई मस्जिद कैसे बन सकती है? इसलिए अयोध्या में पवित्र श्रीराम जन्मभूमि पर और अयोध्या की शास्त्रीय सीमा में कोई भी मस्जिद अब नहीं बनाने दी जायेगी।
    (९) बाबर के नाम पर भारत में मस्जिद कहीं भी बनाने नहीं दी जायेगी। भारत के संविधान की मूल पुस्तक में भारत के राष्ट्र-पुरुषों में भगवान् श्रीराम का चित्र दिया है। बड़ा सुन्दर चित्र है जिसमें भगवान् श्रीराम पुष्पक विमान से आते हुए दिखते हैं। ऐसे राष्ट्र-पुरुष भगवान् श्रीराम का मंदिर तोड़कर वहाँ कोई विकृत ढाँचा बाँधने वाला विदेशी बाबर और उस विदेशी आक्रांता बाबर की कोई इमारत भारत में कैसे बन सकती है?
    (१०) जिन विदेशियों ने भारत पर अत्याचार किये, जिनमें से बाबर भी एक है, उसके नाम का स्मारक भारत में रखना और नए सिरे से भी बाँधना, यह तो केवल देशद्रोह है।भारत में बाबर के नाम का कोई भी ढाँचा कहीं भी बाँधने का राष्ट्रद्रोही कृत्य हिन्दू भारत में कभी भी होने नहीं देंगे।
    ====यह सारे डॉ. तोगडिया के बिंदू हैं। इनके संदर्भसे चर्चा करे, यह प्रार्थना मेरी है।

    Reply
    • प्रेम सिल्ही

      डा: मधुसूदन उवाच जी, आपका सुझाव उत्तम और विषय-उपयुक्त है| लेकिन समय और परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं| जो लोग इतिहास में उपद्रवी व शत्रु माने जाते थे उनके वंशज और अनुयायी शताब्दियों पश्चात आज लोकतान्त्रिक भारत के नागरिक हैं| चिरकाल से चल रही इस समस्या का हल लोकतान्त्रिक ढंग से केवल न्यायलयों में ढूंडा जाना चाहिए और जैसा मैंने पहले कहा है तोगडिया जी का अध्ययनशील लेख का लाभ लोकमत को बढ़ावा देते हुए न्यायालय में इस मामले पर हो रही बहस को अनुकूल दिशा देने में ही है| आप की तरह कई और लोग भी निरर्थक चर्चा के बिखराव से अप्रसन्न होंगे| कुछ एक ने तो श्री राम के अस्तित्व में संदेह कर समस्या के महत्व को फीका करने का प्रयत्न किया है! यदि मात्र उल्लेख से समस्या पर मन मुटाव हो सकता है तो खुले में साम्प्रदायिक विष घोलने वाले उपद्रवी साधारण नागरिकों के जान-माल को खतरा बन सकते हैं| लोकतान्त्रिक भारत में हिंसा का कोई स्थान नहीं है और इस कारण उचित कानून व उनके अनुसरण द्वारा प्रत्येक समस्या का हल खोजना चाहिए| मेरा स्वयं का विचार है कि तोगडिया जी के लेख के अंत में भारत सरकार व न्यायाधिकरण संस्थायों को संबोधित करते हुए इस विलम्बित समस्या पर निर्णय करने का आग्रह करना चाहिए था| लेख में “भारत में कभी भी होने नहीं देंगे।” चुनोती मूढ उपद्रवी तत्वों को निमंत्रित करने के समान है|

      Reply
    • दीपा शर्मा

      Deepa sharma

      Is pirkar ke laikh aur writer bharat ke savindhan aur judiciary system ke khilaaf jate hein aur afsos aap jese vicharsheel log bhi inka samarthan karte hein. Jbki har indian janta he ki inka nature dogla he. Aapko nahee lagta ki writer ne indian constitution ke khilaf likha he? Jo nahi höna chaiye

      Reply
      • mukesh bijlwan from ludhiana

        jai ram ji ki deepa ji hamara apse anuraodh hai ki apna naam deepa sharma se kaat kar deepamohamad ya deepakhusaro ya deepabaabar rakh liyiye mafi chahate hain lekin dhikar hai apko aur dhikar hai apke panidit hone ko aap jaise logon ko to makka madina mein janam lena chahiye tha.sach kahen aapka naam to deepa nahi andhera hona chahiye tha sry lekin ek baar ayadhaya ja kar dekhna aur suno ham jante hain ki pandit ka ye hi kaam hota hai maafi dena lekin sach kahnen ab vo samay nahi raha plz khud ko badlo muslim vo dharm hai jo apne aba ammi ka nahi hua phir apka aur hamara kya hoga. plz khud ko badlo aap hamari behan ki tarah ho sach kahte hain aap hamari bahan ki tarah ho lekin abhi bhi sudhar jao khud ko change karo bhaut ho chuka hai agar koi aap ke dada ji ki jamin pr najayaj kabja kar le to kya apka hak nahi banta ki aap apne purkhon ki vo nishani vapis lo. babar ne bhi hamare ram mandir pr masjid banvai aur ham wahan pr mandir jarur banayenge jarur banayenge. chahe jo marji ho jaye. plz kabhi zafarnama padh kar dekhna padhana aurangjeab aur babar ne kaise kaise jurum kiye ham pr plz apni vichardhara badlo ham na bjp wale hain aur na congress wale

        Reply
        • तिलक राज रेलन

          तिलक राज रेलन

          क्या आपको लगता है कि यह दीपा बेशर्मा वास्तव में कोई छद्म नाम नहीं है? इसका प्रोफाइल सच्चा है या झूठा? अयोध्या के शहीदों से झूठी हमदर्दी दिखाने वाले जानते हैं कि काश्मीर के बाद पूर्वोत्तर राज्यों आसाम, व ब,ओड़िसा, केरल, में इनकी शर्मनिरपेक्षता के कारण विदेशी बंगलादेशीओं का दुस्साहस भारत के जिस संविधान के लिए यह नकली आंसू दिखा रही है वही संविधान कुचला जा रहा है इन्ही के समर्थन से. शर्म फिर भी इन्हें नहीं आती? अल्पसंख्यक की बात करते हैं अर्थ उसका जानते ही नहीं, कैसे हिन्दू हैं यह? राम का अस्तित्व भी मानते ही नहीं! राष्ट्रद्रोही देश के शत्रुओं का पक्ष लेने में असमान पर भी थूक सकते हैं? बेशर्मों कुछ तो शर्म करो!

          Reply
          • zubair

            s tarah tehalka.com par pabandi hai usi tarah pravakta.com ko bhi ban ka dena chahiye…kuchh log fursat hai aur hindu muslim dange karane ki firaq me rehtein hain….yahi log khule hue atankwadi hain….

            ye nahi jante ki …dango me marne wala …aam nagrik hota hai…jo ki is tarah ki website se bhadakta hai….aap log to AC room me baith kar …website update karte rehte ho aur char logo me uchein uthne k liye dharm ko sahara banate ho…..koshish karo aman aur shanti bani rahe…aur tudwana hai to woh saari imaaratein tudwado jin ko mughalon ne banwai thi..aur yaad rakho inhi imarton k zariye bharat ko log pehchantein hain…

          • तिलक राज रेलन

            तिलक राज रेलन

            tum sena, CRPF, aur janta par gole & goli barsate raho, ek tarfa yudh chahiye, jab dusri taraf se mukabla ho to kanoon ki ad lete ho, dusra bhari parhe to ek tarfa yudh viram, yani sena ko rok diya jaye, tum prahar karte raho, kuchh Jai chand pal kar aage kar do, pichhe se khel khelte raho, bas bahut ho chuka chadm yuddh ! Gandhi ne jinhe napunsak banane ka prayas kiya tha ab jag chuke hain, roj roj marne se achchha ek bar do or die to karne ke liye tum hi badhya kar rahe ho, dangon ki shuruat bhi tumhi karte ho maar bhi khate ho, fir rote bhi ho.

          • Mayank Verma

            तिलक जी ये दीपा जी लगाना मजबूरी है…महिला का सम्मान जो करना है…यही सोचने मजबूर करता है की ((((((((((((( दीपा)))))))))))))) और इस तरह के कई छद्म बहरूपिये, नाम बदलकर लिंग बदलकर अत्यंत उत्तेजक बहस को हवा दे रहे हैं…किसी सुनोयोजित प्रोपेगंडा के हिस्से हैं या हो सकते हैं !!!!!!!!!!!!!!!!!! सभी टिप्पणीकारों से निवेदन है की क्रपया इसकी जाँच की जाये अन्यथा ये बहस सार्थक नहीं होगी…

  16. प्रेम सिल्ही

    तोगडिया जी द्वारा लिखा लेख उनके व्यक्तिगत विचारों को बहुत खूबी से प्रस्तावित करता है| ऐसे लेखों का उपयुक्त लाभ लोकमत को बढ़ावा देते हुए न्यायालय में इस मामले पर हो रही बहस को नयी दिशा देने में ही है| इसके अतिरिक्त ऐसे लेख भारतीय मुसलमान जन समुदाय को राम जन्मभूमि की विशेषता से अवगत कराते हुए उनकी विचारधारा को विषय के अनुकूल बनाने के प्रयोजन में भी सहायक हो सकते हैं| लेकिन इसी विषय पर लिखे लेखों द्वारा साम्प्रदायिक विष उगलना और हिंसक प्रतिक्रिया देश व देशवासियों की शांति व जान-माल के लिए घातक सिद्ध हो सकता है| दीपा जी द्वारा प्रस्तुत विचार हिंसक प्रतिक्रया के कारण उत्पन्न जान-माल की हानि का जीता जागता उदाहरण है| उसमे कायरता कतई नहीं है|

    Reply
    • दीपा शर्मा

      Deepa sharma

      Dhanywad! Loktantr ka mahtavpurnt istambh he ek mazboot nyaypalika. Is mudde par desh pehle hi 92 ki ghatna se kalankit ho chuka he. Sahi baat kehna kayarta nahe he. Vahan kya tha ya kya nahee? Ya kya hoga? Ye court he karega. Vese bhi togadiya ji jese kae aur log bhi hen jo bahar chillate hen. Aur court me kehte hen hum babri distroy me shamil nahee thay. Plz zamanat de do. Me yakeen karti agar ye log saty ko sweekarte. Lekin sirf vote ki raajniti ke hai. Har hindu aapke sath khada hota agar aapne 92 ke baad jhute halafname dayar na kiye hote. Vahan qun dar jate ho. Yahan sb shair hote hen vahan geedad ban jate hain. Sadhvi pragya jeso ki haalat ke zimmedar ye log hen. Qki inhone he unka mindwash kiya he. Aur lagatar yahe karte he. Jbki hakikat me constitution se bada koi nahe. Aap ki baat mujhe pasand aaye.

      Reply
  17. डॉ. राजेश कपूर

    dr.rajesh kapoor

    वाह पंकज जी ! बहुत सुंदर. आपके उत्तर हम जैसों के मन को छू रहे हैं. कृपया जारी रखें. बड़ा संतोष व समाधान मिल रहा है आपकी टिप्पणियों से. बहुत -बहुत शुभ कामनाएं !

    Reply
    • पंकज झा

      पंकज झा.

      उत्साहवर्द्धन के लिए आभारी हूँ कपूर साहब…आप जैसे अग्रजों के मार्गदर्शन की सतत ज़रूरत है.

      Reply
  18. आर. सिंह

    R.Singh

    Maine ek additional comment likha tha,jisme maine Ganga and Yamuna ki safaai ke baare mein hinduon ko aage badhne ki salaah thee thee,Mere vichaar seooskaa mahatav Mandir Masjid nirmaan se kahi jyadaa hai.Aap kattar baadi aur udaarvaadi dono tarah ke hinduon se mera anurodh hai ki uske liye tan man dhan se aage yaayen

    Reply
  19. Vishwash Ranjan

    Deepa Ji aap koi mahila nahi hain….ye jo bhi vyakti hai wo congressi hai. kyonki agar koi vyakti mahila ke comments per reply karta hai to wo apni Bhasha ko kafi had tak sambhal sakta hai but agar purush ho to thoda hard words ka bhi prayog kar sakta hai….aur yanha phir bhi agar hard comment hota hai to BJP walon ko mahila virodhi bataya ja sakta hai…

    ye comments koi blog readers dwara post nahi kiye ja rahe hain ye congress ki sanghthit communication team ke madhyam se post hote hain….

    es desh main congress jis tarah asadharan roop se mass communication ko bahut bade hathiyaar ke tour per use kar rahi hai….usko samjhne ke liye BJP ko bahut badi research karni pdegi…

    Reply
    • आर. सिंह

      R.Singh

      Lagta hai aapko congress se khaas prem hai,isiliye aapko sab jagah congress aur congressi najar aate hain.Aisa pubaagrah health ke liye bahut injurious hai yani swasthya ke liye bahut haanikaarak hai.

      Reply
    • दीपा शर्मा

      Deepa sharma

      Adarniy ranjan ji,
      mene kalpana bi ni ki thi ki mje is pirkar ka comment b mil sakta he. Fir bi ek swasth vichar vimarsh k lye is tarh ki tippani achi nahe. Yadi apko lagta h ki mujme koi truti he to aap margdarshan kar sakte hen. Qki gyaan kbi pura nahi hota wo nirantar chalne wali pirkirya he. Mahoday aap ko ye bi samjhna chaiye ki bjp aur congresee k alwa kuch log insaan b hen. Kirpiya mujhe cong. Kehkar simit na karen. Yadi apko meri tippani apko pasnd nahi aati to aap maryadit shabdo me mje mana kar den. Me tippani ni karungi. Lekin jivan me hamesha acha 2 nahi sunne ko milta he ye ham aur aap dono par lagu hoti he.
      Parntu aapko vishwas k sath kehti hun ki me dharm ityadi vishay par comment ni karungi. Wese bhi in par kuch kehne kabil bacha nahee hai.
      Shayad esa bhi ho sakta he ki aapko ek mahila ka is vishay me comment karna pasnd nahe he.

      Reply
      • Vishwash Ranjan

        Deepa Ji, mera comment bahut maryadit and sanyamit hi hai. Cong and BJP ke alawa insane bhi hain….ye baat kehne main to acchi lagti hai but hakikat ye nahi hai….mera matlab hai Cong & BJP matlab rajneeti….Rajneeti har aadmi ko bahut had tak prabhvit karti hai….isiliye har aadmi ki jo vichardhara hai wahi uska charitra bhi ban jata hai….isiliye apko congressi keh raha hun….jab IIT main padnewale ko IItian keh sakte hain….india main rehnewale ko Indian usi tarah Congress ki Vichardhara ko mannewale ko Congressi kehne main mujhe nahi lagta koi burai hai…..

        CNG and BJP ke alawa jo insane hain…matlab 30 krore log bhooke sote hain jabki 30 hajar krore commonwealth game main kharch kar diye jaate hain. log apne pet bharne ke moulik adhikaar tak se vanchit hain….kyon rajneeti ke karan.

        Apki dusari tippni hai ki jeevan main hamesha accha sunne ko nahi milta…ye aap per bhi lagu hota hai isiliye vyartha main apmanit mehsoos na karen. Mere shabd sanymit hain, chahen to jankaar se varification kara len.

        Dharm per tippni na karen to hi behtar hai….kyonki jisne apna dharm chhode diya wo mrut (mara hua) hai. ye baat batakar apne sabit kar diya hai ki, aap dharma main vishwash nahi karti ya phir jhoot bol rahi hain.

        Apka sochna galat hai ki ek mahila ka is vishay per bolna theek nahi laga… aap mahila hoker bhi ram aur seeta ki virodhi hain unke mahan charitra ko samjh nahi payi…ek hindu mahila hone ke naate es dharm ke prati apki bhi bahut jyada jawabdaari hai….aap log maut (rajneetik and vyaktigat) ke bhy se grast, tushtikaran ki neeti ko apnanewale log hain.

        Jai Shreeram – ek abhivadan hi hai….lekin jo log isko sunkar dar jaate hain unke liye ye Uttejak shabd ho sakta hai….ye iska matlab nikalnewale per nirbhar hai. aapko ye pasand nahi hai kya…?

        Jai siyaram….ek bahut hi adarpurvak abhivadan hai….aap bhi ese bolne ka prayas kare.

        Ramseeta ke bare main galat baaton ka dusprachaar na karen. anyatha bhakt naraj ho sakte hain….Mujhe pura Vishwas hai ki aap Deepa Sharma to nahi hain….koi hindu virodhi jehadi muslim hain.

        Reply
        • दीपा शर्मा

          Deepa sharma

          Aap pehle meri tippani padhen aur fir apni. . . , . . . .
          Aur apni bhasha dekhen aur meri bhasha dekhen.
          Ab me nishchint hun ki aap tark-vitark nahe blki kutark kar rahen hein. Agar me apni raay de rahi hun to aap mujhe jehadi bta rahe ho? Kya desh ya is web par sirf apko hi bolna chaiye? Agar aisa he to fir kisi behas me na pada karen. Apna sayanm kyn khote hein? Ek baar dubara se tippaniyon ka avlokan karen

          Reply
        • दीपा शर्मा

          Deepa sharma

          Ranjan ji. Aap pehle nirnay kar len ki me congress hun ya jehadi ya anay, pareshan kyn hote hein

          Reply
  20. पंकज झा

    पंकज झा.

    पहली बार आपकी टिप्पणी में तथ्य दिखा था दीपा जी. अपने को यह लगा था की यह एक ऐसे राम भक्त की टिप्पणी है जिसे करोड़ों आस्थावान भारतीयों की तरह. इसके राजनीतिकरण से पीड़ा है, लेकिन अब लग रहा है की आप थोडा भटक रही हैं तथ्यों से. अब इसमें साम्यवाद कहाँ से आ गया. तुलसी ने भी तो राम के मिथिला पहुचने से पहले तक केवल राम का ही गुणगान किया है न और यह स्वाभाविक ही है. जिस दस्तावेज़ की की ओर आप इससे पहले की टिप्पणी में इशारा कर रही थी वह मुझे मेरे आईडी jay7feb@gmail.कॉम उपलब्ध करवाएंगी तो आभारी होउंगा.

    Reply
    • दीपा शर्मा

      Deepa sharma

      Pankaj jha ji, sirf mandir hi nahe pirtyak samajik mudde ke rajnitikaran se peeda avashay hoti he.

      Reply
      • तिलक राज रेलन

        तिलक राज रेलन

        मुसलमानों की कथित गरीबी के राजनीतिकरण पर भी, उनके विशेषाधिकार आरक्षण पर भी? क्या आपका प्रोफाइल या लिंक दिया है जिससे आपके बदलते वक्तव्यों पर आपकी चालों पर प्रकाश डल सके, आप क्या हैं कौन हैं पता लगता हो ?

        Reply
  21. दीपा शर्मा

    Deepa sharma

    Ram ko ham jitna jante hein goswami tulsi ki wajh se hi jante hen. Unhone to kbhi is shko nahee btaya. Iske atirikt dekha jaye to ram ek samyavadi purush thay unse bade bharat thay jo unki khadun se hi shashan kiye. Ese mahan purush ke naam par ye khel khelna unko kasht dena hi he. Ram jo samyvadita ki misaal thay unke naam par hue is tandav ne kitni asamaanta ki he aap khud anuman lagao. Aur kirpya vaigyanik dirshtikon se avlokan karen.

    Reply
    • Vishwash Ranjan

      Ram ko dosh dene ki chesta na karen, aap mahila hain to kya kuch bhi bakengi. Is nafrat ki shuruaat ki thi babar ne, Babar ne aur muglon ne jo mandir tode unka hisab kon dega. aap?

      Reply
  22. पंकज झा

    पंकज झा.

    यह तर्क कही से भी उचित नहीं है दीपा जी. जन्मभूमि पर किसी भी अवतार का मंदिर बनना कही से भी निषिद्ध नहीं है. जैसे की खुद सीता जी का प्राकट्य स्थल बिहार के सीतामढ़ी के पुनौरा नामक जगह पर है. और राजा जनक की राजधानी जनकपुर में भी उनके नाम से मन्दिर स्थापित है. और जब राम-जन्मभूमि पर भी मंदिर निर्माण होगा तो वहां भी श्रीराम के साथ-साथ सीताजी और सभी विग्रहों की स्थापना होगी ही. इस तरह केवल भगवान राम के नाम का मंदिर होने से मां सीता को जगह नहीं मिलेगी ऐसा नहीं है. आप अयोध्या में ही देखेंगी कि सबसे मुख्य मंदिर हनुमान गढ़ी माना जाता है लेकिन फिर भी वहां भी सभी पूज्य देवताओं का मंदिर है ही. ऐसा नहीं है कि हनुमान जी का नाम हो जाने के कारण वहां अन्य देवतागण उपेक्षित हो गए. ऐसा विभेद ठीक नहीं. जहां तक जय श्रीराम का सवाल है तो रामायण का स्मरण कीजिये यह नारा हनुमान जी के प्रिय नारों में से एक है. इसके अलावे चुकि ‘राम जन्मभूमि’ की बात आते ही भगवान के उस ‘बाल रूप’ का स्मरण आता है, जब माता सीता का पदार्पण नहीं हुआ था, शायद इसीलिए केवल जयश्री राम का ही नारा दिया गया होगा. वैसे भी ‘श्री’ का आशय ही लक्ष्मी से होता है जिसकी अवतार मां सीता जी मानी जाती है. इसे अन्यथा नहीं लेने का निवेदन….धन्यवाद.
    पंकज झा.
    jay7feb@gmail.com

    Reply
  23. पंकज झा

    पंकज झा.

    दीपा जी..आपकी पहली बातों में तो असहमति की गूंजाइश नहीं थी लेकिन यह क्या कह दिया आपने की ‘राम मंदिर’ बनाना शास्त्रों के अनुसार सही नहीं है? कृपया शास्त्रों में राम मंदिर का निर्माण कहाँ प्रतिबंधित किया गया है….प्रकाश डालेंगी?

    Reply
    • दीपा शर्मा

      Deepa sharma

      Pankaj jha ji!
      Shastron ke anusaar raam mandir bnaya hi nahee ja sakta he. Shastron me hamesha ram k sath seeta mata ki puja hoti aaye he. So sirf bhagwan ram ka mandir bnana anuchit he. Aap iski satyta pata kar sakte hen. Isme any tathy pehle likhe hen aapke laikh k pehle jahan tulsi ko samjhaya gaya he.
      Aapko ye sunkar aur hairat hogee ki ram janm mandir ayodhya me pehle hi maujud he. Aap satyta ka pata kar sakte hen.
      Aapko yaad hoga ki 90 se pehle hmare yahan raam ko yaad karne ka tarika tha JAI SIYARAM. Yani ram k sath sita mayya ko bhe yad kiya jata tha qki wo maryada purshottam hen islye. Is abhivadan ko in ativadiyo ne bna diya JAI SHRIRAM- jo ek uttejit aur avaidh nara he qki sita mayya ke bina ram nahe.
      Agar apko is par vishwas na ho to mere pas document hen jo me apko provide karwa sakti hun.

      Reply
      • तिलक राज रेलन

        तिलक राज रेलन

        आपको किसने समझा दिया कि राम जन्म भूमि मंदिर सीता माता के बिना होगा, आज तक कोई राम मंदिर सीता जी के बिना नहीं बना, देश की अस्मिता के प्रश्न को कुतर्क से उलझाने, अल्प संख्यक के नाम पर अफज़ल का साथ देने की बेशर्मी, के कारण देश के कई राज्य देश से कट चुके हैं !

        Reply
  24. Jeengar Durga Shankar Gahlot

    Ham, Deepa Sharma & R. Singh ke vicharo se puri tarah se sahmat hai. Pravin Togriya jese vyakti na to Dharm ke hiteshi ho sakte hai, na hi Desh ke oor na hi Insaniyat ke. Dharm hit oor Dharm raksha ke nam par Insano ka khoon bahane wale – sirf ‘Mot ke Sodagar’ ya phir Mot ke Sodagaro ke ‘Dalal’ hi ho sakte hai.
    “Bhagwan Ram” ke nam par Insano ka khoon bahane wale “Ram” ke ‘Bhakt’ nahi balki “Ram” ke ‘Bhakshak’hi hai. Jin “Ram” ne jeevan bhar musibato ko sahna swikar kiya, lekin maryada ko tutne nahi diya – aaj usi “Ram” ke nam ko ye ‘Tathakathit Ram Bhakt’ kalankit karne ko aamda bane huye hai. Kash, en ‘Tathakathit Ram Bhakto’ ne Mugal Badshah Akbar ke samaykal ke Sant TulsiDas dwara likhi hui “Ramcharitmanas” ka man ki gahnta se adhyyan kiya hota, to nishchit hi P.Togriya jese logo ka lok oor parlok dono hi sudhar gaya hota. Oor, tab ye “Dharm hit” ke nam par Insani khoon bahane ki chale nahi chal rahe hote oor tab na hi ‘Hindutav kattarvad’ ke janmdata kahe jane wale L. K. Aadwani “Ram Rath Yatra” hi nikalte, jiske karan samucha Desh hi ‘sampradayik unmand’ki aag me jal utha tha.
    Kash, Ayodhya me Babar ke samay kal me Mandir ko torkar Masjid banai gayi hoti to uska jikra Sant Tulsi ne avasya hi kiya hota, jinhone “Ram” ko samja hai, “Ram” ko pahchana hai, “Ram” ko dekha & mahsoos kiya hai tatha “Ram” ko apne aap me jiya hai. Lekin es sachchai ko sirf “Ram” ke Bhakt hi samj sakte hai, “Ram” ke nam ko kalankit karne wale kya samje?
    Jis tarah se ki- “Hanuman Chalisa” ki rachna ko lekar enhi “Ram” ke nam ko kalankit karne walo dwara yah dushprachar kiya jata rahta hai ki Mugal Badshah Ooranjeb dwara Sant Tulsidas ko jabran Muslim Dharm swikar karaye jane ke karan jab Jel me band kar diya gaya tab apne 40 din ke karawas me Sant Tulsi ne 40 laino ki yah “hanuman Chalisa” ki rachna ki oor tab Lal Muh ke Bandaro ne aakar Jel par hamla kiya, es tarah Ram Bhakt Hanumanji ki sena ne Tulsidasji ko karawas se chudaya.
    Jabki, vastikta yah hai ki- Sant Tulsidas ka janm Humayu ke kal me hua, Akbare ke kal me unne “Ramchritmanas” ko likha tatha Jahagir ke kal me unka nidhan ho gaya. Ease me sochane ki bat hai ki- jo insan Jahagir ke kal me mar gaya hai, vah Jahagir ke pote Oorangjab ke kal me kese ja phuncha? Kya ye ‘Tathakathit Ram Bhakt’ hamare ukt sawalo ka jawab dene ka sahas karenge? Philhal etna hi, shes phir khabhi aage ….. Dhanaywad.
    – Jeengar Durga Shankar Gahlot, Publisher & Editor, “SAMACHAR SAFAR” [Fornightly], Satti Chabutre ki Gali, Makbara Bazar, Kota – 324 006 (Raj.}

    Reply
  25. Vishwash Ranjan

    Congress jis tarah CBI ka durupupyog kar BJP ko and AAJ TAK ka upyog kar Hindu Sanghathano ko kamjor kar rahi hai uska vyapak VIRODh andolan pure desh main hona chahiye tha…

    agar AAJ TAK ne aisa kisi anya DHARM ke khilaf kiya hota to…..shayad Videocon Tower ko RDX se uda diya jata…ya koi truck usme ghus gaya hota…

    yahi fark hai…

    Reply
  26. Vishwash Ranjan

    Jai shree Ram…HUM log shayad baaten hi karna jante hain….es uddeshya ki purti ke liye jis Jabardast ranneeti ki aawashyakta hai…uski kami sabhi sanghthono main dikhti hai. sabse pehle congress ko khtam karna jaroori hai….sabhi hindu sanghthano ko ek hone ki jaroorat hai….hindu vote bank ko puri tarah ek disha main lekar aana chahiye…

    Reply
  27. दीपा शर्मा

    Deepa sharma

    Shailendra g aap kya us karsewa ki tulna hamari desh ki sena se kar sakte ho? Mahoday me swarthi nahe hun. Kayar keh nahee sakti hun. Lekin aap khud sochiye mandir bnana ek samasya he agar karsewa se kuch ho sakta to kbhe ka mandir ban gaya hota ye aap bhe jante hen or koi bi samany budhi ka vyakti samajh sakta he ki karsewa se kuch hasil nahee ho sakta he ye khud ek samsya ban jati he. Sena desh ki raksha karti he aur karsewa desh me bhay utpan karti he aap unki tulna kese kar rahe hain. Mahoday sena ka jawan jb shaheed hota hai to usko sammanit karne wale uske officer or pura desh hota he. Anay kai baten aur uske sammaan me hoti he lekin jab karsewak marta he to ye log samman to dur pata lagana ya puchna bhe zaruri nahe samajhte. Jis din aap par ye samay ayga (bhagwan na kare) us din bhe aap ko koi swarthi aur kayar avashy kahega. Mandir agar in log bnwane ki haisiyat rakhte to bnwa chuke hote lekin ye nahee bnwaynge qki fir inka astitv hi khatm ho jayga. Wese bi ye mamla court me he. Ye to sirf bhashan aur rajniti ka drama hai. Jo VHP hamesha se karti he. In logo ne is desh ke liye kya kiya he? Mere mitr ankhe kholo aur dekho sirf inke karan desh tabah ho raha he. Hinduon ko aatankwadi kaha jane laga he. Agar ab bhi nahe sambhle ye to hinduon ko puri tarh bdnam karke chodenge. Sirf ek question ka jawab de aap. . . , . . . . , .
    Kya shastron ke hisaab se raam mandir banana sahee hai? Sochkar dena qki me bi brahman hun. Hindu hun rambhakt hun. Sahi galat behtar samne aayga iska jawab dete hi. . . . .

    Reply
  28. आर. सिंह

    R.Singh

    Sorry Togadiaji.Ek baat aur.Aaiye ham sab mil kar pahle Ganga aur Yamuna ko saaf to kar le.Ayodhya mein mandir phir banaa lenge.Jagah kahi bhaagi to nahi jaa rahi hai.

    Reply
    • प्रेम सिल्ही

      R. Singh जी, आपने समाज में अन्य बातों की प्राथमिकता में गंगा जमुना की सफाई के सुझाव से मानो धर्म-भावुक सोते लोगों को जगाने का प्रयत्न किया है| जगह कहीं नहीं भागी लेकिन उतावले लोग स्थिर हो कर नहीं बैठ सकते| स्वतंत्रता के पश्चात से गाँव व शहरों में बेकार लोगों को अक्सर बन्दर, रीछ या किसी नौटंकी के इर्द-गिर्द झुरमट लगाए देखा है| समय की मर्यादा से उन्हें कोई सरोकार नहीं रहा है| आटा-तेल जुटाना एक प्रकार की गुलामी बन कर रह गया है और लोग इस आवश्यक झमेले से ऊपर उठ देश या अपने स्वयं के लिए कोई कुछ करने में असमर्थ हैं| गंगा जमुना की सफाई में भी जुट जायेंगे लेकिन आपको उन्हें यह बताना पड़ेगा कि सफाई कैसे की जाय| यथार्थ मार्ग दर्शन का अभाव ही देश का बड़ा अभिशाप है|

      Reply
      • आर. सिंह

        R.Singh

        Prem silhiji,
        Pahle to apko dhanyabaad ki aapne Mandir masjid se pare hatkar to socha.Samaadhan ya sujhao ke pahle main ek sawaal pouchoonga.Kya aap bataa sakte hain ki Ganga aur Yamuna itni Gandi kaise ho agyeen aur dino din jyada se jyada gandi kaise hoti jaa rahi hain?

        Reply
  29. आर. सिंह

    R.Singh

    Togadiaji,
    Ek baat kahoon,bura to na manenge.Aapne doctor ka profession chhod kar jo ye hinduon ke,ya yon kahiye ki upper caste hinduon ko bhadkaane ka jo dhandha apnaya hai ,wah kisi ke hit mein nahi hai.Aapke saath karsewa aur mrne ke liye kaun jaataa hai iss par kabhi aapne socha hai?Aap soch bhi kaise sakte hain?Agar iss disha mein sochna shuru kar de to aapki dookaan band ho jayegi.Togadia sahib aap kaun hain?Kya parmaan hai ki aap Bharat ke aadi nivasi hain?Aap itne lambe chaure bhasan to de jaate hain,par science ka student hote huye bhi kabhi aapne socha ki Ayodhya jaise ek chhote se rajya ka prince bhagwan kaise ban gayaa?Agar aap sachmuch mein ek science ke student ke naate ya ek doctor ke naate iss par vichaar karte to aapko khud yah sab vakwaas najar aata.Aapki maanyataayen kuchh kahe par iska koi vaigyanik aadhaar nahi hai.Waha mandir tha,iska bhi pukhta saboot abhi tak nahi mila hai.Rah gayee Babar ki baat to usne galti ki jo usne Iswar and Iswar mein bhed samjha,par aap jaisa so called vidwaan kya oosi galti ko duhraa nahi rahaa hai?Togadiaji pahle bhookhe insaan ko bina bhedbhao ke roti dijiye aur uski bimaariyon ka ilaaj kijiye,iske baad uska parlok sudhaarne ki baat kijiye.Aise mandir banaane aur usme pooja karne se kisike parlok sudhar jayega ,isme bhi mujhe sandeh hai.Aap jaise logon ka ego satisfaction jaroor ho jayega.

    Reply
    • Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'

      शानदार, मैं इससे सहमत हूँ!

      Reply
  30. शैलेन्‍द्र कुमार

    shailendra kumar

    दीपा जी आपके हिसाब से भारत ने व्यर्थ ही सेना बना रखी है क्योंकि देश की रक्षा में जो जवान बलिदान कर रहे है उनके परिवार भी तो बर्बाद हो रहे है कौन सी सरकार उनका ध्यान रख रही है लेकिन ये देश वीरों का है आपके जैसे स्वार्थी कायरों का नहीं बीजेपी या तोगड़िया जी क्या करेंगे ये तो मैं नहीं जानता लेकिन मंदिर तो वह बनना ही चाहिए मंदिरस्थल छोड़कर मस्जिद मुसलमान कही भी बनाये मुझे कोई आपत्ति नहीं मंदिर आन्दोलन के समय मैं बच्चा था अब कारसेवक बनने के लायक हो गया हूँ

    Reply
  31. पंकज झा

    पंकज झा.

    दीपा जी की बात में असहमति की गुन्जाईश नहीं है. राम जन्मभूमि का विशद निर्माण हर हिन्दू का सपना है और वह पूरा हो कर रहेगा लेकिन इस मामले पर अब राजनीतिक रोटी किसी को सेंकने नहीं दी जायेगी, ना सेंकनी चाहिए और ना ही सेंका जा सकता है. जिन लोगों ने भी इस आन्दोलन के सहारे अपना लक्ष्य हासिल कियाण जिनने भी अपने मंसूबे पूरे किये उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि काठ की हांडी एक बार ही चढ़ सकती है. अब राख हुए इस हांडी को दुबारा चूल्हे पर चढाने का प्रयास कथमपि सफल नहीं होगा. भगवान् से यही प्रार्थना कि सौहार्दपूर्ण माहौल में वहां मंदिर का निर्माण हो जाय. ऐसा लग रहा है कि शायद मुख्य मुक़दमे का फैसला भी जल्द ही आनेवाला है. ख़ास कर मुस्लिम संगठन भी यह समझ लें तो बेहतर होगा कि किसी भी तरह की भरकाऊ हरकतों को इस मामले पर जगह देना सभी के लिए घातक ही होगा.

    Reply
    • अहतशाम त्यागी

      हाँ जी सपने देखने पर पाबन्दी नहीं है इस देश में
      सुबह हो गई ………ये सपने देखने बंद कर दो

      Reply
      • तिलक राज रेलन

        तिलक राज रेलन

        राष्ट्र द्रोहियों पर तो पाबन्दी बिलकुल नहीं है. जिनके पूर्वज हिन्दू थे अपने पूर्वजों को गाली देते हैं. शर्मनिरपेक्ष जो ठहरे !

        Reply
  32. दीपा शर्मा

    Deepa sharma

    Aapke laikh jhuten nataon ke bhashan jese lagte hen. Thoda sahajta aur sommayta se likha kare. Esa lag raha he jese aap kal hi jayenge aur mandir bna kar aa jaynge. Aap logo ne kbhi ye socha hai ki 1992 tak jo karsewa huee usme kitne log mare aur unke parivaro ka kya hua. Ek parivar aaj bhi uska dansh bhugat raha he na to bhagwan hi aaye na aapme se koi aaya na us parivar ka mukhiya aaya na laash hi aayee. Aaj bhi wo bhagwan ka intzar kar rahen hen. Aap to fir wahe tabahee kar safe rahenge lekin saza hamare jese parivar bhugtege. Kya ram kya rehman. Pista bas he insan. Togadiya ji ye pakka he agli karsewa me agar huee to mera parivar to kam hua samjhen aap. Kitne log mare thay wahan aapko anuman na hoga. Qki aap sab log to dhancha girakar naach rahe thay aur bhagwan ram or hum ro rahe thay. Apne parivar ki tabahee par. So dhanywad.

    Reply
  33. दीपा शर्मा

    Deepa sharma

    Namaskar. Haan red fort bi mita do. Apko answer bad me dungi. Qki is par mere pas kuch ankde hen aur video hen jo shayad apko pasand aaye. Aapke darshan kafi samay baad hue hen. Dhanywad. Magar aapka vishay or andaz wahi he. Togadiya ji ispar me apko answer 28 ko dungi qki ghar se bahar hone ke karan wo ankde paste ni kar sakti. Namaskar

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *