लेखक परिचय

लिमटी खरे

लिमटी खरे

हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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भारत पर सालों साल राज करने वाले ब्रितानियों के बारे में कहा जाता था कि अंग्रेजों का सूरज कभी नहीं डूबता, अर्थात उनकी सल्तनत इतने सारे देशों मे थी कि कहीं न कहीं सूरज दिखाई ही देता था। आज हम हिन्दुस्तानी गर्व से कह सकते हैं कि भारतवंशियों का सूरज कभी भी नहीं डूबता है। विश्व के कमोबेश हर देश में भारतीय मिल जायेंगे तो अपनी सफलता के परचम लहरा रहे हैं।

अपने ज्ञान और कौशल से दुनिया भर को आलोकित करने वाले भारतवंशियों के दिमाग का लोहा दुनिया का चौधरी माने जाने वाला अमेरिका भी मानता है। हर क्षेत्र हर विधा, हर फन में माहिर होते हैं भारतवंशी। भले ही वे गैर रिहायशी भारतीय (एनआरआई) हों पर कहलाएंगे वे भारतवंशी ही।

अपनी प्रतिभा के बलबूते पर ही दुनिया भर में भारत के नाम का डंका बजाने वाले भारतीयों को भी अपने वतन पर नाज है। भारत सरकार द्वारा प्रवासी भारतीयों के योगदान को रेखांकित करने के लिए 2003 से हर साल नौ जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन किया जाता है।

दरअसल इस दिन 1915 में भारत के सबसे बडे प्रवासी भारतीय मोहन दास करमचंद गांधी ने दक्षिण आफ्रीका से भारत लौटकर स्वाधीनता का बिगुल बजाया था। कोट पेंट से आधी धोती पहनने वाले इस महात्मा ने अहिंसा के पथ पर चलकर भारत को आजादी दिलाई और हम भारतीयों का जीवन ही बदल दिया।

देखा जाए तो हिन्दुस्तानियों की तादाद लगभग हर देश में है। कनाडा में दस लाख, अमेरिका में साढे बाईस लाख, त्रिनिदाद में साढे पांच लाख, गुयाना में तीन लाख बीस हजार, सूरीनाम में एक लाख चालीस हजार, ब्रिटेन में 15 लाख, फ्रांस में दो लाख अस्सी हजार, साउदी अरब में 18 लाख, बेहरीन में साढे तीन लाख, कुबेत में पांच लाख अस्सी हजार, कतर में पांच लाख, यूनाईटेड अरब अमीरात में 17 लाख, दक्षिण अफ्रीका में 12 लाख, मरीशस में नौ लाख, यमन में एक लाख 20 हजार, ओमान में पांच लाख साठ हजार, श्रीलंका में 16 लाख, नेपाल में 6 लाख, मलेशिया में 21 लाख, म्यांमार में साढे तीन लाख, सिंगापुर में 6 लाख, फिजी में 3 लाख 22 हजार और आस्ट्रेलिया में साढे चार लाख भारतवंशी निवास कर रहे हैं।

दुनिया के चौधरी अमेरिका जैसे देश में 38 फीसदी चिकित्सक भारतीय हैं। यहां वैज्ञानिकों में 12 फीसदी स्थान भारतवंशियों के कब्जे में है। नासा में 36 फीसदी कर्मचारी भारतवंशी हैं। इतना ही नहीं कम्पयूटर के क्षेत्र में धमाल मचाने वाली माईक्रोसाफ्ट कंपनी में भारत के 34 फीसदी तो आईबीएम में 28 और इंटेल में 17 फीसदी कर्मचारियों ने अपना डंका बजाकर रखा हुआ है। फोटोकापी के क्षेत्र में 13 फीसदी हिन्दुस्तानी अमेरिका में छाए हुए हैं। भारतवंशियों की पहली पसंद बनकर उभरा है अमेरिका, यहां भारतीय मूल के स्वामित्व वाली 100 शीर्ष कंपनियों का सालाना राजस्व 2.2 अरब डालर है, जो दुनिया भर के 21 हजार लोगों को रोजगार मुहैया करवा रही हैं।

भारतवंशियों के अंदर कोई तो खूबी होगी जो कि विदेशों की धरा में ये अपने आप को संजोकर रखे हुए हैं। परदेस में परचम फहराने वाले भारतियों में अमेरिका में लुइसियाना के गर्वनर बाबी जिंदल, न्यूजीलेंड के गर्वनर जनरल आनंद सत्यानंद, जाने माने ब्रिटिश सांसद कीथ वाज, लिबरल डोमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष लार्ड ढोलकिया, सुरीनाम के उपराष्ट्रपति राम सर्दजोई, सिंगापुर के महामहिम राष्ट्रपति एस.आर.नाथन, तीसरी बार गुयाना के महामहिम राष्ट्रपति बने भरत जगदेव के अलावा मरीशस के महामहिम राष्ट्रपति अनिरूध्द जगन्नाथ, मरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम, 1999 में फिजी के प्रधानमंत्री महेंद्र चौधरी, केन्या के प्रथम उपराष्ट्रपति जोसेफ मुरूम्बी, त्रिनिदाद एवं टौबेगो की पहली महिला अटार्नी जनरल कमला प्रसाद बिसेसर के नाम प्रमुख हैं।

विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल विजेता डॉ हरगोविंद खुराना, एस.चंद्रशेखर, अंतरिक्ष विज्ञानी कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स के अलावा 2009 में नोबेल विजेता वेंकटरमन रामाकृष्णन तो साहित्य के क्षेत्र में बुकर ऑफ बकर्स पुरूस्कार से नवाजे गए सलमान रशदी, बुकर विजेता किरण देसाई अर्थशास्त्र के नोबेल विजेता आमर्त्य सेन, पुलित्जर विजेता झुम्पा लाहिडी, नोबेल विजेता सर वी.एस.नागपाल प्रमुख हैं।

कारोबार के क्षेत्र में भारतवंशियों की सफलता इतनी है कि उनकी उंचाईयों को सर उठाकर देखने पर सर की टोपी पीछे गिरना स्वाभाविक ही है। पेप्सिको में मुख्य कार्यकारी अधिकारी इंदिरा नूरी, ब्रिटेन के धनी परिवारों में से एक हिन्दुजा बंधु, बोस कार्पोरेशन के संस्थापक अमर बोस, इस्पात करोबारी लक्ष्मी नारायण मित्तल, 1978 में नून प्रोडक्टस की स्थापना करने वाले सर गुलाम नून, मूलत: चार्टर्ड एकाउंटेंट करन बिलीमोरिया ने 1989 में कोब्रा बीयर का कारोबार आरंभ किया जो आज सर चढकर बोल रहा है। इसके अलावा साठ के दशक में अपनी बिटिया के इलाज के लिए ब्रिटेन पहुंचे लार्ड स्वराज पाल ने 1978 में कापरो समूह की स्थापना की जो आज बुलंदियों पर है।

कंप्यूटर की दुनिया में तहलका मचाने वाले एचपी के जनरल मेनेजर राजीव गुप्ता, पेंटियम चिप बनाने वाले विनोद धाम, दुनिया के तीसरे सबसे धनी व्यक्ति अजीम प्रेमजी, वेब बेस्ड ईमेल प्रोवाईडर हॉटमेल के फाउंडर और क्रिएटर समीर भाटिया, सी, सी प्लस प्लस, यूनिक्स जैसे कंप्यूटर प्रोग्राम देने वाली कंपनी एटी एण्डटी बेल के प्रजीडेंट अरूण नेत्रावाली, विंडोस 2000 के माईक्रोसाफ्ट टेस्टिंग डायरेक्टर संजय तेजवरिका, सिटी बैंक के चीफ एग्जीक्यूटिव विक्टर मेंनेंजेस, रजत गुप्ता और राना तलवार, का नाम आते ही भारतवासियों का सर गर्व से उंचा हो जाता है।

दुनिया भर के देशों में सरकार में सर्वोच्च या प्रमुख पद पाने वालों में भारतवंशी आगे ही हैं। फिजी में एक, गुयाना में 14, मलावी में 1 मलेशिया में चार, मारीशस में 17, मोजाम्बिक में 1, सिंगापुर में 8, श्रीलंका में 9, सूरीनाम में 5, त्रिनिदाद और टुबैगो में 8, दक्षिण आफ्रीका में चार लोगों ने सरकार में सर्वोच्च या प्रमुख पद पाया है।

इसी तरह कनाडा में 9, जिम्वाब्बे में 1, जांबिया में 1, ब्रिटेन में 24, त्रिनिदाद और टुबैगो में 23, युगांडा में 1, तंजानिया में 4, इंडोनेशिया में 1, आयरलेंड में 1, मलेशिया में दस, सूरीनाम में 18, श्रीलंका में 2, दक्षिण अफ्रीका में 16, सिंगापुर में 4, पनामा में एक, मोजाम्बिक में 11 और मारीशस में 36 भारतीय मूल के संसद सदस्य या सीनेटर रहे हैं।

इस लिहाज से माना जा सकता है कि भारतवंशी समूचे विश्व में फैले हुए हैं, और हर क्षेत्र, हर विधा हर फन में भारत का तिरंगा उंचा करने के मार्ग प्रशस्त करते जा रहे हैं। भारतीय दिमाग को विश्व के हर देश में पर्याप्त सम्मान दिया जाता है। माना जाता है कि भारतवंशी के दिमाग के बिना कोई भी देश प्रगति के सौपान तय नहीं कर सकता है। तभी तो हम भारतीय गर्व से कहते हैं -”वी लव अवर इंडिया”।

-लिमटी खरे

36 Responses to “भारतवंशियों का कभी नहीं डूबता है सूरज”

  1. VIJAY

    BHAI VA!!! PADHKAR MAJHA AA GAYA LEKIN APKO
    MALUM HAI KI BHARATKI 70 % LOGONKI AMDANI
    ROJKI 20 RUPAYE HAI ! VISHVAKE 119 BHUKHE DESHOME BHARAT KA STHAN 96 HAI !! DESHME 4 KAROD VIDHVAYE NARAK JAISI JINDAGI JI RAHI HAI!
    BHARAT EM 40 % ASHKSHIT HAI ! BHARTIY NYAYALAYOME 2 KAROD MAMLE LAMBIT PADE HUYE HAI !HARVARSH BHARATME T-B SE 3LAKH LOG MARATE HAI !!DESHME PUJASTHAL KI SAMKHYA 24 LAKH HAI AUR DAVAKHANO KI SANKHYA SIRF 6 LAKH HAI ! 60 % LOG AB BHI KHULE SHTHANPAR SHOUCHH KARTE HAI !AUR
    90 % SHOOLOME SHUCHYALAY NAHI HAI !!
    FIR SOCHO HAMARA DESH KAHAN HAI !!!!!!!!!!!!!!

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  2. डॉ. मधुसूदन

    madhusudan uvach

    “अमेरिका जैसे देश में 38 फीसदी चिकित्सक भारतीय हैं। यहां वैज्ञानिकों में 12 फीसदी स्थान भारतवंशियों के कब्जे में है। नासा में 36 फीसदी कर्मचारी भारतवंशी हैं। इतना ही नहीं कम्पयूटर के क्षेत्र में धमाल मचाने वाली माईक्रोसाफ्ट कंपनी में भारत के 34 फीसदी तो आईबीएम में 28 और इंटेल में 17 फीसदी कर्मचारियों ने अपना डंका बजाकर रखा हुआ है। फोटोकापी के क्षेत्र में 13 फीसदी हिन्दुस्तानी अमेरिका—???? —————“यह आंकडे संदेहात्मक है” यह पहलेभी शंकाकी दृष्टिसे देखे गए हैं| भारतके प्रति गौरव के विषयमे शंका नहीं|

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  3. rajesh kapoor, shimla

    राम ka nam lo bhaiya koi bhi bharat vanshi desh ke liye nahe sochta hai jee

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  4. sadik khan

    हम भारत वंसी हैं हमारा सूरज कैसे डूब सकता hai

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  5. shivesh

    विकास की बात मैं दम है तस्वीर का दूसरा पहलु भी है

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  6. rani mukarjee, kolkata

    बहुत बहुत बधाई इस तरह के आलेख निशित तौर पर भारत वंशी लोगों को देश के लिए कुछ करने का मददा पैदा करेंगे

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  7. D.Shrivastava, new yark, usa

    थैंक्स मिस्टर खरे, यू हेवे गिवेन अ गुड थिंग थैंक्स अगेन

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  8. rahul, vardha maharastra

    आपने बहुत ही अच्छे जानकारी दी है धन्यवाद खरे जी

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  9. VIKAS

    बहुत बढ़िया लेख है ! लेकिन इसका दूसरा पहलू भी अंधकार में है आज भी ६० फीसदी लोग गरीबी
    रेखा के निचे जीते है ! कई कई पैर में चपल डालना भी मुस्किल है ! महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में
    अबतक १० हजारसे ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके है , और इसकी मिसाल दुनिया के इतिहास में
    कही नहीं मिलेगी ! हम अभी भी दुनियासे पीछे है ,अन्न -धान्य उत्पादन हो लोगोंकी आमदनी हो
    रहन -सहन हो दूसरी बात , यहांकी सरकार , पुलिस का काम , नगर पालिका का काम , भ्रष्टाचार , रोज धर्म के
    नाम होने वाले झगड़े -हिंसा ,में हम सबसे आगे है ! बढ़ती आबादी -पानीका दुर्भिक्ष , रोजगार की कमी
    धर्म के नामपर चढावो पर करोडो लुटाये जाते है ! लेकिन गरीब बच्चोको शिक्षा नहीं मिल रही है !
    एक तरफ उजाला जरुर है लेकिन दूसरी ओर घनघोर अँधेरा भी है ,उसे नहीं भूलना चाहिए !

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  10. संजना

    वह वह हम आपके कलम के दीवाने हिं खरे जी, ठीक उसे तरह जिस तरह मीरा बाई थी कृष्ण भगवन की, आप दिनों दिन प्रगति के सोपान तय karen यहे कमाना है

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  11. ज़किया ज़रिने

    हम इस बात से सहमत हैं के इस बहतरीन आलेख को इंग्लिश मैं भी diya jana chaheye ताकी विदेशों मैं रहने वाले भारत वंशी देश के लिए कुछ करने के सूच साकं

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  12. Jeet Bhargava

    बहुत अच्छी बाते बताई आपने. लेकिन दुःख इस बात का है कि जब भी इन भारतवंशियों पर मुसीबत आती है, भारत सरकार कुछ भी नहीं करती. आस्ट्रेलिया से लेकर मलेशिया तक और अब तक नेपाल में भी भारत के लोगो को माओवादी दुश्मन मानते हैं. और भारतवंशी जुल्म का शिकार होते रहे हैं लेकिन सरकार सिर्फ गाल बजाने के अलावा कुछ नहीं करती है.

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  13. Kiran Rajpurohit Nitila

    वाह वाह!
    हमें गर्व है इन होनहारों पर जो भारत का परचम पूरी दुनिया में फहराये हुये है।
    भारत सनातन कालीन सभ्यता है और हर युग में भारत का डंका बजता ही रहा है।

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  14. रूचिका बजाज, वरली, मुम्बई

    वाह वाह, जनाब क्या बात कह दी, हम तो कहेंगे रहते हैं विदेश में फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी, आपकी इस जानकारी पर एक मन को छूने वाली कहानी लिखी जाए और फिर उस पर बने फिल्म तब जाकर विदेश से भारतवंशी वापस आने का विचार बना सकते हैं। आपका बहुत बहुत आभार लिमटी खरे जी, आपका अभिनन्दन

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  15. सोमेन्द्र मेहता, अहमदाबाद

    चल चल रे नौजवान, चल चल रे नौजवान, भारत माता की जय

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  16. जयपुर से रजनी उईके

    बहुत ही उम्दा लिमटी खरे जी, जय जवान, जय किसान और वाकई अब तो कहना पडेगा जय जय लिमटी खरे, इस तरह की उपयोगी जानकारी के लिए आपका कोटिश: आभार

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  17. सोनाली, रायपुर

    भारतवंशियों, लिमटी जी के इस लेख को पढो अगर हिन्दी आती हो तो, और नहीं तो लिमटी जी इस आलेख को अंग्रेजी में करके प्रकाशित अवश्य करें, ताकि विदेशों में रहने वाले भारतवंशियों को अपने वतन की याद आ जाए, और वे देश के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें

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  18. स्वीटी अरोरा

    वाह क्या बात कह दी खरे साहेब, भारतवंशी हैं ही महान, जय हिन्द जय भारत और अब तो कहना ही पडेगा जय जय लिमटी खरे

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  19. बैंग्लुरू से सतीश बडोनिया

    बहुत बिढया लिमटी जी, आपको बधाई इस तरह के सकारात्मक लेखन के लिए, आपके तप और जानकारियों से लवरेज इस आलेख के लिए आपको बारंबार नमन।

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  20. abhijeet

    जब दूध को उबाला जाता है ,तब क्रीम बाहर चला जाता है .बस इतनी सी बात है .

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  21. पंकज झा

    पंकज झा.

    मेरा भारत महान और इसकी सकारात्मक चीज़ों को सामने लाने वाली कलम भी महान…बधाई लिम्टी जी.

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  22. ajit gupta

    जैसे इन भारतवंशियों पर हमें गर्व है, वैसा ही गर्व उन्‍हें भी होना चाहिए और अपने भारत के नवनिर्माण में आगे आना चाहिए। आज इन्‍हीं के कारण भारत की परिवार संस्‍था खतरे में पड़ गयी है। ये जितना टेक्‍स वहाँ देते हैं यदि उसका कुछ हिस्‍सा भी अपने देश के लिए खर्च करें तो इस देश का भी कल्‍याण हो सकता है। आपने अच्‍छी जानकारी दी, इसका आभार।

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  23. ahtsham

    भारतवंशियों का सूरज कभी नहीं डूबेगा ये मेरा मानना, और कभी न डूबे ये मेरी दुआ है
    लेकिन जब भारतीय ही उसे डुबोने का प्रयास करतें हैं तो मुझे बड़ा दुःख होता है
    अभी मेने सुना है की महाराष्ट्र में शपथ लेने पर एक नेता के मुहं पर तमाचा जड़ दिया गया
    उसका कुसूर इतना था की वोह राष्ट्र भाषा में शपथ ले रहा था क्यू न ले भाई हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है और हम हिन्दुस्तानी हँ
    और कमाल की बात ये है की राष्ट्र भाषा (हिंदी) से जलन रखने वाला भी अपने आप को हिन्दुस्तानी कहता है
    में तो यही कहना चाहूँगा जी
    “कोई न जाने अपना फिउचर क्या होगा “

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  24. संगीता पुरी

    इस आलेख को पढकर और भारतीयों के बारे में जानकर बहुत गर्व हुआ .. भारतवंशी के दिमाग के बिना कोई भी देश प्रगति के सौपान तय नहीं कर सकता .. पर इतने सारे भारतवासियों के होते हुए भी हमारे देश की यह स्थिति है .. सोंचकर भी ताज्‍जुब होता है !!

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