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    Homeसाहित्‍यकविताअब भी समय है जातिभेद मिटाने का

    अब भी समय है जातिभेद मिटाने का

    —विनय कुमार विनायक
    अपने ही बाणों से बींधे जाएंगे ब्राह्मण,
    अपने ही तीरों से तीरे जाएंगे ब्राह्मण,
    शब्द ब्रह्म है साक्षी प्रमाण ऐसा होने का,
    अब भी समय है जाति भेद मिटाने का!

    जब अधम योनिजा; मछुआरन,स्वपाकी,
    दासी, गणिका का बेटा थे श्रेष्ठ ब्राह्मण;
    वेद व्यास,पराशर, शक्ति व ऋषि वशिष्ठ,
    फिर वशिष्ठ का बेटा अबके ब्राह्मण कैसे
    विशिष्ट औ’ ब्राह्मणों के मातृगोत्री जाति
    दास, स्वपच, कोल, भंगी कैसे अवशिष्ट?

    ब्रह्म अगर ईश्वर है,ब्रह्मा सब के स्रष्टा,
    जो ब्रह्मा को पिता जाने, जिनमें आस्था,
    ऐसे ब्रह्मा का बेटा स्वत: ब्राह्मण होता!

    आज एक बात पते की है ये सबको पता
    कि वेदी अब वेद नहीं गढ़ते, पाठक जी भी
    वेद पाठ नहीं करते,मिश्र मिश्रित नहीं होते,
    उपाध्याय कोई नया अध्याय नहीं लिखते!

    दूबे बाबा आज दूब उखाड़ा करते, त्रिवेदी से कहीं
    अधिक गुणी व धुनी गांव का कनछेदी दास और
    नकछेदी नाई जो जूता से चण्डी पाठ तक करते!
    परंतु चौबे ही छब्बे बनने के योग्य समझे जाते!

    तबके सिंह अब भी सिंह है, कुछ और अधिक ही,
    तबके साह अब भी साह है, कुछ और अधिक ही,
    तबके दास अब भी दास हैं, कुछ और अधिक ही,
    लेकिन तब के ब्राह्मण आज के ब्राह्मण नहीं है!

    अबके ब्राह्मण सिंह नहीं/साह नहीं/नहीं दास दफ्तरी,
    ब्राह्मण के ब्राह्मणत्व की तरह,ब्राह्मण की नेतागिरी,
    अफसरी, चपरासीगिरी धर्म निष्ठा भी संदिग्ध ही होती!

    तब चारों वर्ण जन्म नहीं, कर्म, गुण, स्वभाव के होते थे
    वैदिक काल में सभी वर्ण एक दूसरे में विवाह करते थे,
    आगे चलकर ऊपर वर्ण के पुरुष से नीचे वर्ण की स्त्री में
    अनुलोम विवाह मान्य था,फिर प्रतिलोम विवाह होने लगा!
    विगत में ब्राह्मण अब्राह्मण में विवाह निषिद्ध नहीं था!

    पूर्व में ब्राह्मण ऋषियों का चार वर्णों में विवाह मान्य था,
    आज के ब्राह्मण सिर्फ जन्मगत, वेदज्ञान विहिन हो गए!
    पूर्व की तरह ब्राह्मण जबतक ऋषिगुण सम्पन्न होंगे नहीं,
    गैर ब्राह्मणों से प्यार, दुलार, वरदानी संस्कार रखेंगे नहीं,
    तबतक हिन्दू संस्कृति और ब्राह्मण की भलाई होगी नहीं!
    —विनय कुमार विनायक

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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