More
    Homeसाहित्‍यकविताये अपना नववर्ष नहीं है

    ये अपना नववर्ष नहीं है

    —विनय कुमार विनायक

    ये अपना नववर्ष नहीं है,

    अबतक कोई हर्ष नहीं है!

    कोविड19 से उबरे नहीं है,

    जीवन में उत्कर्ष नहीं है!

    सूर्य उत्तरायण में नहीं है,

    कमी ठिठुरन में नहीं है!

    जबके बसंती बयार नहीं,

    तब तक हम तैयार नहीं!

    जब चैत्र प्रतिपदा आएगा,

    तब ही बसंतऋतु छाएगा!

    अमुवां की डाली महकेगी,

    तबके कोयलिया कुहुकेगी!

    जबके भौंरा गुंजार करेगा,

    कृषक-चैता मल्हार उठेगा!

    जब सजनी मनुहार करेगी

    पिया संग ससुरार चलेगी!

    ऋतुराज का आगाज होगा,

    मौसम में कुछ फाग होगा!

    तब एक साल नया आएगा,

    जनमन खुशहाल बनाएगा!

    उस चैत से गिले-शिकवे थे,

    अबके चैत में गले मिलेंगे!

    कोरोना से निजात पा लेंगे!

    तब अपना नववर्ष मनाएंगे!

    चलो भाई अंग्रेजों खुश होले,

    नव वर्ष की शुभकामना देते!

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    * Copy This Password *

    * Type Or Paste Password Here *

    11,736 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress

    Captcha verification failed!
    CAPTCHA user score failed. Please contact us!

    Must Read