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    Homeसाहित्‍यलेखइस बार दिवाली स्वदेशी और आत्मनिर्भरता वाली

    इस बार दिवाली स्वदेशी और आत्मनिर्भरता वाली

       दीपावली हमारे उत्सवों में एक ऐसा उत्सव है जिसके आने की तैयारियाँ कई दिन पूर्व से ही होने लगती हैं | घरों की सफाई पुताई अन्य तैयारियाँ  देख कर सहज जी अनुमान लगाया जा सकता है कि दिवाली आने वाली है | दीपावली अर्थात प्रकाश का पर्व, हर्ष उल्लास उमंग और माँ लक्ष्मी जी की आराधना का पर्व | इस पर्व पर हम सभी माता लक्ष्मी जी से आराधना करते हैं कि वे हमारे घर-परिवार और देश पर कृपा बरसाएँ | हमारी कथनी और करनी में यह कैसा अंतर्विरोध है कि हम लक्ष्मी माता से घर आने का आह्वाहन करते हैं किन्तु जाने-अनजाने ही हम उन्हें दूसरे  देशों की ओर भेज देते हैं | जिस चीन ने छल से हमारी हजारों वर्ग मील भूमि छीन ली वह हमसे अब हमारी धन लक्ष्मी भी छीन रहा है या कहें कि हम हीं उसे दे रहे हैं  | यह कैसी विडंबना है कि दीपावली पर माता लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियाँ तक भी हम चीन से बनी हुई ले लेते हैं, चीनी लाईट, चीनी पटाखे, चीनी खिलौने और-तो-और घर में शुभ-लाभ व बंधनवार तक चीनी लगी होती हैं | यद्यपि इस बार प्रसन्नता की बात है कि कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने पिछले चार पाँच माह पूर्व से ही चीनी माल के बहिष्कार की घोषणा कर दी है  | इसका परिणाम यह हुआ कि इसबार दीपावली से जुडी  हुई बस्तुओं का आयात लगभग चालीस हजार करोड़ घटने का अनुमान है |  देश के लगभग सात करोड़ व्यापारी “भारतीय सामान -हमारा अभिमान” अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं | यह पहली बार देखने को मिल रहा है कि बड़े-बड़े शहरों के बाजारों में चीनी सामान बहुत कम या नहीं देखने को मिल रहा है | देश के नागरिकों में भी अद्भुत उत्साह है यह उत्साह ही हमारे स्वाभिमान का रक्षक है | “इस बार दिवाली स्वदेशी दिवाली “ का नारा जोर पकड़ता जा रहा है | यही अवसर है जब पूरे देश के समक्ष एक सुनहरा अवसर है जबकि हम अपने त्योहारों से चीनी घुसपैठ सदैव के लिए समाप्त कर सकते हैं | यदि दीपक,झालर, मोमबत्तियाँ, रंग-विरंगे वल्व,पूजन सामग्री, मूर्तियाँ और सजावट की बस्तुएँ सभी स्वदेशी हों तो चीन की कमर टूट जाएगी | वह भारत का विरोध करना और पकिस्तान का समर्थन करना भूल जाएगा | कोरोना महामारी के कारण भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा अघात लगा है हमारे उद्योग जगत में भी निराशा आई है | यदि सभी भारतवासी एक साथ खड़े हो जाएँ तो इसी त्यौहार से इस निराशा को दूर करने का उपक्रम आरंभ हो सकता है | रक्षाबंधन और गणेश उत्सव से भी अधिक चीनी वस्तुओं की बिक्री दीपावली पर होती है | यदि इस बार पूर्ण स्वदेशी दीपावली का संकल्प  कर लिया जाए तो अगले एक वर्ष में सभी त्याहारों से चीनी वस्तुएं पूर्णतः विलोपित हो जाएँगी | कितने आश्चर्य और अपमान की बात है कि टेक्नोलोजी से लेकर मिट्टी के छोटे से दीपक के लिए भी  हम अपने  शत्रु-देश पर निर्भर हैं | हमने विदेशी कर्ज लेकर चीनी वस्तुओं का आयात किया, अपनी अर्थव्यवस्था को दुर्वल कर चीन की अर्थव्यवस्था को शक्तिशाली बनाने की भूल की | होली, दिवाली,राखी सहित सभी त्योहारों पर चीन हमें लूटने आ जाता है और हम किंकर्तव्यविमूढ़  हो कर लुटते रहते हैं | कोरोना महामारी के आरंभिक चरण में देश ने ऐसे संकट को भी प्रत्यक्ष अनुभव किया था जबकि हमारे पास कोरोना से बचने के लिए मास्क जैसी छोटी वस्तु भी स्वदेशी नहीं थी | इसके  लिए भी हम चीन पर निर्भर थे क्योंकि हमने अपने उद्योगों का गला घोंट कर सस्ती चीनी वस्तुओं के उपयोग का स्वभाव बना लिया था | सुखद आश्चर्य और गर्व की बात यह है अनलॉक होते-होते अनेक वस्तुओं पर  हमारी चीन पर निर्भरता बहुत कम हो गई | अब बिना टिक-टॉक के भी देश के नौजवान उतने  ही आनन्द में हैं जैसे पहले थे | पिछले कुछ वर्षों में हमने अपने देश के पटाखा,दीपक, बल्ब,मोमबत्ती और त्योहारी साज-सज्जा एवं पूजन सगाग्री बनाने वालों को भी निराश किया है | इस समय व्यापारी और उपभोक्ता दोनों चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के पक्ष में हैं अतः यही अवसर है जबकि हम भारतीय उद्योगों/निर्माताओं को प्रोत्साहित कर उन्हें स्वदेशी वस्तुओं के निर्माण के लिए प्रेरित करें और अवसर दें ताकि वे हमें सभी प्रकार की स्वदेशी वस्तुएँ उपलब्ध करा सकें |  

    त्रेता में अयोध्या में भगवान श्री राम के आगमन के समय किस प्रकार अयोध्या सजाई गई थी उसका वर्णन गोस्वामी जी ने मानस में इस प्रकार किया है “कंचन कलस बिचित्र संवारे ,सबहिं धरे सजि निज निज द्वारे || बन्दनवार पताका केतू,सबन्हि बनाए मंगल हेतू || अयोध्या पुनः सजने को तैयार है किन्तु हमें स्मरण रखना होगा  कि इस बार हम अपने घर की अयोध्या में जो मंगल कलश स्थापित करें वह अपनी मिट्टी का हो और जो बन्दनवार पताका बांधे वह भी स्वदेशी हो और अपने ही देश के भाई-बहनों  द्वारा निर्मित  हो फिर  चाहे दीपक हो,मोमबत्ती हो या रंग-बिरंगी झालर जो भी हो उसमें स्वदेशी की सुगंध अवश्य हो | 

    डॉ.रामकिशोर उपाध्याय

    डॉ.रामकिशोर उपाध्याय
    डॉ.रामकिशोर उपाध्याय
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