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    Homeसाहित्‍यकविताये तिरंगा परचम लहरानेवाला भारत की महान संस्कृति का

    ये तिरंगा परचम लहरानेवाला भारत की महान संस्कृति का

    —विनय कुमार विनायक
    अब तो सन दो हजार बाईस ईस्वी में मनाना है,
    अब तो आजादी का पचहत्तरवां दिवस को आना है,
    हां! पंद्रह अगस्त को घर-घर में तिरंगा फहराना है,
    आजादी का अमृत महोत्सव हम सबको मनाना है!

    हर घर में तिरंगा हो,जय हो,हर हाथ में तिरंगा हो,
    ना देश में दंगा हो, नहीं कोई भूखा प्यासा नंगा हो,
    ईमान ही धर्म हो,प्यार सहकार की बहे देश में गंगा,
    सभी सुखी हो,ना कोई गबन घोटाला गोरखधंधा हो!

    बच्चा-बच्चा राणा प्रताप, गुरु गोविंद,शिवाजी, विरसा,
    आजाद,भगत,ऊधम,सुभाष,बिस्मिल,असफाक जैसा हो!

    अज्ञान अशिक्षा अंधविश्वास रुढिवादी विचार का क्षय हो,
    वैज्ञानिक हो आर्यभट्ट, वराहमिहिर, होमी जहांगीर भाभा,
    जगदीशचंद्र वसु,मेघनाथ साहा, रमन, अब्दुल कलाम सा!

    हर सैनिक हो वीर अभिमन्यु, अर्जुन, कर्ण, एकलव्य,
    जस्सासिंह अहलूवालिया, बंदा बहादुर, हरि सिंह नलवा,
    अब्दुल हमीद, अल्बर्ट एक्का सा जलवा दिखाने वाला!

    केशरिया है शौर्य हमारा, हिमालय सा धैर्य हमारा,
    वसुधैव कुटुंबकम् का नारा, सादा है सत्यमेव जयते,
    हरा भरा हो खेत हमारा,खलिहान धन-धान्य मय हो,
    नहीं किसी से भय हो,हम मां भारती की जय कहते,
    हम अहिंसक निडर आत्मनिर्भर निरंतर निर्भय रहते!

    हर घर में तिरंगा लहर लहर लहराना है,
    देश से जातिवाद फिरकापरस्ती को मार भगाना है,
    घर घर में अमन चैन खुशहाली को लाना है,
    शिक्षा चिकित्सा संचार रोजगार सभी को पाना है!

    धर्म पंथ मत मजहब से अंधविश्वास को मिटाना है,
    ईश्वर अल्लाह खुदा रब में एकता भाव को जगाना है,
    राम-रहीम, कृष्ण-करीम-क्राइस्ट को एक कर जाना है!

    ये तिरंगा है हम सबका, ये तिरंगा है भारत भारती का,
    ये तिरंगा देशहित में शहीद हुए भारत मां की संतति का,
    ये तिरंगा सूर्य किरण सा,चंदा की आभा, चमक नक्षत्र का,
    ये तिरंगा केसरिया शौर्य,अशोकचक्र शांति,हरा हरियाली का,
    ये तिरंगा परचम लहरानेवाला भारत की महान संस्कृति का!
    —विनय कुमार विनायक

    स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस में झंडा फहराने में क्या अंतर है ???

    *पहला अंतर*

    *15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झंडे को नीचे से रस्सी द्वारा खींच कर ऊपर ले जाया जाता है,*  फिर खोल कर फहराया जाता है, जिसे *ध्वजारोहण* कहा जाता है क्योंकि यह 15 अगस्त 1947 की ऐतिहासिक घटना को सम्मान देने हेतु किया जाता है, जब प्रधानमंत्री जी ने ऐसा किया था। संविधान में इसे अंग्रेजी में *Flag Hoisting* (ध्वजारोहण) कहा जाता है।

    जबकि – 

    *26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर झंडा ऊपर ही बंधा रहता है, जिसे खोल कर फहराया जाता है,* संविधान में इसे *Flag Unfurling* (झंडा फहराना) कहा जाता है।

    *दूसरा अंतर*

    *15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री जो कि केंद्र सरकार के प्रमुख होते हैं वो ध्वजारोहण करते हैं,* क्योंकि स्वतंत्रता के दिन भारत का संविधान लागू नहीं हुआ था और राष्ट्रपति जो कि राष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख होते है, उन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया था। इस दिन शाम को राष्ट्रपति अपना सन्देश राष्ट्र के नाम देते हैं।

    जबकि – 

    *26 जनवरी जो कि देश में संविधान लागू होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, इस दिन संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं ।*

    *तीसरा अंतर*

    *स्वतंत्रता दिवस के दिन लाल किले से ध्वजारोहण किया जाता है।*

    जबकि – 

    *गणतंत्र दिवस के दिन राजपथ पर झंडा फहराया जाता है।*

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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