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    बहुत ही करीने से आपका पासवर्ड और कुकीज को चोरी करता है यह वायरस

    (लिमटी खरे)

    विज्ञान लोगों के वरदान है तो अभिषाप से कम भी नहीं है। जब से इंटरनेट आया है तब से सायबर ठगी के प्रकरणों में इजाफा हुआ है। आज के समय में आपकी पूरी दुनिया आपके मोबाईल के अंदर ही कैद होकर रह गई है। युवा वर्ग की आंखें तो दिन में छः से आठ घंटे तक मोबाईल पर गड़ी रहती हैं।

    हाल ही में देश के साईबर क्षेत्र में एक नए मोबाईल बैंकिंग वायरस ने आमद दी है। दरअसल ट्रोजन नामक यह वायरए से रैसमवेयर है, जो एंड्रायड फोन की फाईलों को नुकसान पहुंचा रहा है। इसके साथ ही इसके जरिए संबंधित व्यक्ति वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार भी बन सकता है। इसकी एक खासियत है कि इस वायरस को आप अपने मोबाईल से आसानी से हटा भी नहीं सकते हैं। देश के सायबर एक्सपर्टस को इसकी जानकारी तीन माह पूर्व जुलाई में लगी थी, तब से अब तक इसके पांच वर्जन आ चुके हैं।

    बताते हैं कि इस वायरस का पहला संस्करण सितंबर 2021 में हेकर्स के बीच बिकने के लिए आया था। उस समय यह मालवेयर अमेरिका, रूस, स्पेन जैसे देशों के लोगों को अपना निशाना बना रहा था, पर जुलाई 2022 के बाद इसके निशाने पर भारत जैसे देश भी आ गए।

    दरअसल, अधिकृत एप्स को डाऊनलोड न कर उनके अन्य वर्शन को जब डाऊनलोड किया जाता है तो यह वायरस उनके साथ चिपककर आपके मोबाईल में प्रवेश कर जाता है। उदहारण के लिए अगर आप व्हाट्सऐप का अधिकृत वर्शन उपयोग करते हैं तो आपको एक संदेश को सिर्फ पांच लोगों तक ही भेजने की पात्रता होती है, पर इसी व्हाट्सऐप के कुछ संस्करण इस तरह के भी हैं जो आपको असीमित संदेशों को असीमित लोगों तक भेजने की पात्रता प्रदान करते हैं।

    बताते हैं कि इस तरह इन एप्स के जरिए यह वायरस आपके मोबाईल में प्रवेश कर जाता है और उसके बाद यह अमेजन, क्रिप्टो करंसी के टोकन, पेटीएम, गूगल पे, फोन पे आदि लोकप्रिय एप्स के रूप में रूप बदलकर सामने आ जाता है। आप अगर इन एप्स का उपयोग करते हैं तो यह आपके साथ वित्तीय धोखाधड़ी आरंभ कर देता है।

    इतना ही नहीं, यह एप प्रमुख कंपनियों के नाम पर एसएमएस, व्हाट्सऐप संदेश के जरिए कुछ इस तरह के संदेश वितरित करने लगता है जिसके जाल में फंसकर लोग धोखाधड़ी का शिकार बहुत ही आसानी से हो जाते हैं। जानकार बताते हैं कि एक बार मोबाईल फोन पर फर्जी एंड्रॉयड एप्लिकेशन इंस्टॉल हो जाने के बाद यह लक्षित एप्लिकेशन की सूची प्राप्त करने के लिये मोबाइल पर इंस्टॉल किए गए सभी एप्लिकेशन की सूची सी 2 अर्थात कमांड एंड कंट्रोल सर्वर को भेजता है। और इस सर्वर को वे लोग नियंत्रित करते हैं जो लक्षित एप्लिकेशन की सूची प्राप्त करना चाहते हैं।

    बताते हैं कि यह वायरस इतना खतरनाक है कि यह की स्ट्रोक प्रोग्रामिंग के जरिए आपको एक विशेष बटन दबाने के लिए बार बार प्रेरित करता है। यहां तक कि यह एप आपके मोबाईल का स्क्रीन शॉट भी लेकर कमांड एण्ड कंट्रोल सर्वर को भेजता है। यह दो सैकड़ा से ज्यादा बैंकिंग और पेमेंट एप्स की नकल तैयार कर सकता है।

    एक संस्था के द्वारा एडवाईजरी जारी करते हुए कहा गया है कि इसके तहत उपयोगकर्ताओं को ऐप आधिकारिक ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करने चाहिए। इसमें डिवाइस विनिर्माता या ‘ऑपरेटिंग सिस्टम’ के ऐप स्टोर शामिल हैं। उन्हें हमेशा ऐप के बारे में समीक्षा करनी चाहिए। उपयोगकर्ताओं के अनुभव, टिप्पणियों पर भी गौर करने चाहिए। साथ ही नियमित तौर पर एंड्रॉयड अद्यतन अर्थात् अपडेट करते रहना चाहिए और ई-मेल या एसएमएस के माध्यम से प्राप्त केवल भरोसेमंद ‘लिंक’ का ही उपयोग करना चाहिए।

    जब भी कोई एप डाऊनलोड करें तो पहले उसके रिव्यूज अवश्य पढ़ लीजिए, अन्यथा आप जाने अनजाने इस वायरस का शिकार हो सकते हैं।

    लिमटी खरे
    लिमटी खरेhttps://limtykhare.blogspot.com
    हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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