आज हिंदी भाषा की दशा

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भाषाओं की डारि पर,हिंदी फल की कैसी चाहत हैं
जब छोटे से पौधे को,इंगलिश दी जावत है

उत्तर से लेकर दक्षिण तक,केवल भाषा ही एक अदावट है
कोई हिंदी को बोलन चाहत है,कोई तमिल बोलन चाहत है

हिंदी का कैसे विकास होगा,जब इसको हीन द्रष्टि से देखत जावत है
जब बड़े नेता अपने बच्चो को,इंगलिश स्कूल में ही प्रवेश दिलावत है 

इंगलिश माध्यम स्कूलों में प्रवेश दिलाकर सब शान दिखावत है
इसलिए हिंदी माध्यम स्कूलों में प्रेवेशो में काफी बड़ी गिरावट है

हिंदी भाषा को हीन समझ कर,कोई नहीं बोलन चाहत है
अंग्रेजी भाषा को गर्व समझ कर,उसको  बोलन चाहत है

चलता रहा ऐसे कुछ हिंदी भाषा में आयेगी काफी गिरावट है
कैसे इसका प्रसार करेगे अब,इसकी सोचने की अब जरूरत है

साल में इसका एक दिवस मनाये,ये ही हिंदी की एक हिमाकत है
दिन प्रति दिन हिंदी का उपयोग करे,बनाओ इसको एक आदत है

आर के रस्तोगी 

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आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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