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    Homeसाहित्‍यकविताआज धर्म और मजहब में तीव्र उग्रता बढ़ी है

    आज धर्म और मजहब में तीव्र उग्रता बढ़ी है

    धर्मनिरपेक्षता

    —विनय कुमार विनायक
    आज धर्म और मजहब में तीव्र उग्रता बढ़ी है,
    आज धर्म और मजहब उस चौराहे में खड़ी है,
    जहां मजहबियों में लोगों के प्रति घृणा बड़ी है,
    आज धार्मिक मजहब में दुर्भावना भरी पड़ी है!

    आज तो सारे भगवान जाति में बांट लिए गए
    परशुराम झा,रामसिंह राजपूत,कृष्णसिंह मंडल,
    जिन वणिक सुरी, बुद्ध वृषल दास बनाए गए,
    राम कृष्ण के बेटे बाबर व औरंगजेब हो गए!

    जिस अरब देश में पैगम्बर का अवतरण हुआ,
    वहां अफगानी महमूद गजनवी, मुहम्मद गोरी,
    बाबर,औरंगजेब की कुछ भी शौकत शान नहीं
    किन्तु भारत-पाक के मजहबियों के मान वही!

    आज हिन्दुओं का मुस्लिम में धर्मांतरण होते ही,
    नव धर्मांतरित मुस्लिम हिन्दुओं के शत्रु हो जाते,
    और भारत के आक्रांता के खैर मक्दम बन जाते,
    धर्मांतरण में बुराई है कि पूर्व भाई बुरे हो जाते!

    अब धर्मांतरित वर्ग वो उदाहरण पेश नहीं करते
    कि हम हैं वही जो तुम हो एक जैसे सताए हुए,
    धर्म बदल गया तो क्या हम चलेंगे उस मार्ग पर
    जो अपने सनातनी महाजन पूर्वजों के बताए हुए!

    धर्मांतरित मुस्लिमों के सबसे बेहतरीन उदाहरण
    इंडोनेशिया के संस्कृति वादी मुस्लिम धर्मावलंबी,
    जिन्होंने धर्म बदला है पर वल्दियत नहीं बदली,
    इंडो-पाक के लोग धर्म के साथ पिता बदल लेते!

    पितृत्व बदलना सीधी गुलामी है आक्रांताजन की,
    आक्रांताओं की राजनैतिक गुलामी से मुक्त होके,
    धार्मिक, मानसिक गुलामी में फिर बंध जाने की,
    एक भारतीय होके नाम अरबी यूरोपीय रख लेते!

    आज विश्व भर में मुस्लिमों को सबसे अधिक
    धार्मिक आजादी सिर्फ भारत देश में दी गई है,
    चीन में दाढ़ी रखने, अजान पढ़ने से बाधित हैं,
    हिन्द के मुस्लिम हिन्दुत्व को असहिष्णु कहते!

    हिन्दूहित की बात करे जो उससे वे घृणा करते,
    हिंदुवादी सरकार जहां उस राज्य को वे कोसते,
    उनकी जहां भीड़ होती वहां पाक के नारे लगते,
    धर्मांतरित जन अमन चैन की बात नहीं करते!
    —विनय कुमार विनायक

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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